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सिरसा में अब नहीं लग पाएंगे अवैध पशु मेले

Tue, 12 Apr 2016 01:15 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
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पशु मेला - फोटो : Bureau
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वर्षों से पशु मेले के नाम पर किए जा रहे अवैध धंधे पर अब पाबंदी लगेगी। इसके लिए डीसी ने सभी खंड एवं पंचायत अधिकारियों को पत्र लिख कर निर्देशों का पालन करने को कहा है। वर्षों से लग रहे इन अवैध पशु मेलों पर प्रशासन ने कभी ध्यान नहीं दिया। अब सीएम विंडो में शिकायत कर इन अवैध पशु मेलों पर रोक लगाने की मांग की गई थी जिस पर प्रशासन की ओर से कार्रवाई  की गई है। प्राइवेट पशु मेले  सिरसा में आजादी से पूर्व से ही लग रहे है। बाद में एक से अधिक मेेले लगने लगे।
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प्राइवेट लोगों की ओर से शहरों व गांवों में लगाए जा रहे पशु मेलों में पर अब पाबंदी लगेगी।

इसके लिए सभी पंचायत अधिकारियों को मेलों पर रोक लगाने के लिए पत्र जारी कर दिए गए हैं। इसके लिए पुलिस प्रशासन की मदद भी ली जाएगी। प्यूपिल फॉर एनिमल संस्था की ओर से उठाए गए कदम के बाद प्रशासन की तंद्रा टूटी है। सीएम विंडो पर संस्था के पदाधिकारी विनोद कड़वासरा ने शिकायत कर इन मेलों पर रोक लगाने की मांग की गई थी जिसके बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। इससे पूर्व जुलाई 2015 में संस्था की सर्वेसर्वा मेनका गांधी ने प्रदेश के मुख्य सचिव को पत्र लिख कर प्राइवेट लोगों द्वारा लगाए जा रहे मेलों पर रोक लगाने की मांग की थी पर उस पत्र के बाद भी अब तक मेले लगते रहे हैं। अब इस धंधे से जुड़े लोगों को कोई दूसरा ठौर ढूंढना होगा। सिरसा में आजादी से पूर्व से ही रोजाना पशु मेला लगता है जबकि अन्य जिलों में हर रोज मेला नहीं लगता। बताया जा रहा है मुंबई के बाद सिरसा का प्राइवेट पशु मेला देश भर में प्रसिद्ध है। लोग दुधारू गाय-भैंस को बेचने के लिए मेले में लाते हैं जिससे आयोजकों को मोटा कमीशन मिलता है।

कई प्रदेशों के व्यापारी आते हैं यहां
पशु मेले में पशुओं की खरीद-बेच के लिए सिरसा के मेलों में हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश व मध्य प्रदेश सहित कई प्रदेशों के व्यापारी यहां आते हैं। हर दिन बड़ी संख्या में पशुओं की खरीद-फरोख्त होती है। मेले के आयोजक राशि नगद दिलवाने पर तीन से पांच हजार रुपये वसूलते हैं। एक माह की उधार करने पर यह राशि कम हो जाती है। ऐसे में करोड़ों के हो रहे इस कारोबार पर अब तक प्रशासन का ध्यान ही नहीं गया। इस प्रकार के खेल डेयरी का धंधा करने वाले लोग भी खेलते हैं।  
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जिले में लगते हैं कई मेले
जिले में प्राइवेट पशु मेले कई स्थानों पर लगते हैं। सलारपुर रोड सिरसा, ऐलनाबाद रोड, रानियां रोड, डबवाली, फग्गू आदि क्षेत्र में मेले लगते हैं जिनमें गाय-भैंसों की खरीद-बेच होती है। ग्रामीण क्षेत्र में पशुओं का व्यापार करने वाले व्यापारियों के तार मेले के आयोजकों से जुड़े होते हैं। कई बार कई व्यापारी अपनी मनमर्जी कर ग्राहक को चपत लगाने से भी गुरेज नहीं करते।

डीसी ने कहा पुलिस की मदद भी लें
डीसी द्वारा जारी किए गए पत्र क्रमांक 1165-71 के अनुसार डीसी द्वारा सभी खंड एवं पंचायत विकास अधिकारियों को कहा गया है कि आपके अधिकार क्षेत्र में कहीं भी प्राइवेट लोगों के समूह द्वारा अवैध पशु मेला लगाया जाता है उसे पुलिस की सहायता लेकर तुरंत बंद करवाना सुनिश्चित करें तथा की गई कार्रवाई से अवगत करवाया जाएगा।

शिकायतकर्ता और एसपी को भी भेजा पत्र
डीसी द्वारा जारी पत्र की प्रति एसपी और शिकायत कर्ता को भी भेजी गई है। शिकायतकर्ता विनोद कड़वासरा ने बताया कि उन्हें पत्र प्राप्त हो गया है जिसमें कहा गया है कार्रवाई न हो तो एसपी और संबंधित पंचायत अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं। इसी प्रकार डीसी द्वारा जारी पत्र की कॉपी एसपी को भेज कर अवैध प्राइवेट पशु मेलों को बंद करवाने के लिए पुलिस सहायता प्रदान करने को कहा गया है।

आजादी से पहले ये लग रहे हैं पशु मेले
70 के दशक से पशुओं की खरीद-बेच करने वाले गांव शेरपुरा के रामकुमार हुड्डा ने बताया कि पूर्वजों से सुनी बातों के अनुसार सिरसा में प्राइवेट पशु मेला का आयोजन आजादी से पहले से हो रहा है। उन्होंने बताया कि 1952 में हमारे पूर्वजों ने इस मेले से भैंस खरीदी थी।

दूध भी बिकता है
दुधारू पशु को बेचने के लिए मेले में लाया जाता है। खरीददार के सामने पशु का दूध निकाला जाता है। हर रोज सभी पशुओं का निकाले गए दूध पर मेले के आयोजक का हक होता है। प्रति दिन एकत्रित हुआ दूध आयोजक बेचता है। इससे मोटी कमाई होती है जिसको लेकर भी प्रशासन अनभिज्ञ था।

सरकार को हो रहा है नुकसान
पशुओं की खरीद-बेच के सरकार द्वारा वैध मेले का आयोजन किया जा सकता है। हर एक पशु पर बेचने वाले और खरीदने वाले से निर्धारित फीस लेने का प्रावधान है। प्रशासन पहले चेत जाता तो सरकार को करोड़ों रुपये की आमदनी पशु मेले से हो सकती थी।
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