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मक्खी के डर से फीकी पड़ी सफेद सोने की चमक

Sat, 18 Jun 2016 01:59 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
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सफेद मक्‍खी - फोटो : Bureau
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गत वर्ष कपास की फसल पर सफेद मक्खी के प्रकोप के कारण इस बार प्रदेश में कपास की बिजाई का रकबा 20 प्रतिशत कम हुआ है। बीटी कॉटन से किसानों का मोहभंग हुआ है क्योंकि कुल रकबा कम होने के बावजूद देसी कपास का रकबा बढ़ गया है। इससे जाहिर है कि कम होने वाला रकबा बीटी कपास का ही है और जो रकबा देसी कपास का बढ़ा है वो भी बीटी से तब्दील हुआ है। अभी कहीं-कहीं सफेद मक्खी का आगमन शुरू हो गया है जिसको देख कर किसान भयभीत होने लगे हैं। उधर कृषि विभाग ने भी सफेद मक्खी प्रबंधन को लेकर प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन शुरू कर दिया है।
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प्रदेश में कपास की फसल पर सफेद मक्खी ने दस्तक दे दी है। अब फसलों पर खतरा मंडराने लगा है। हालांकि विभाग का मानना है कि अभी तक इस बीमारी का कोई प्रकोप नहीं है बल्कि कहीं-कहीं सफेद मक्खी देखने में आई है पर इससे नुकसान वाली बात नहीं है पर किसानों को जैसे ही फसल में सफेद मक्खी दिखाई देती है तो उनकी नींद उड़ जाती है।

गत वर्ष सफेद मक्खी से हुए नुकसान का जारी किया गया मुआवजा भी अभी तक सभी किसानों को नहीं मिल पाया है। कृषि विभाग द्वारा जारी कपास बिजाई के लक्ष्य में इस बार प्रदेश में लक्ष्य से 1,22,728 हेक्टयर में बिजाई कम हुई है जबकि गत वर्ष से 20 प्रतिशत रकबा कम हुआ है। कम बिजाई से केवल सफेद मक्खी ही कारण है।
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बता दें कि प्रदेश में देश का पांच प्रतिशत कपास उत्पादन होता है। सफेद सोने के नाम से जानी जाने वाली इस फसल से किसानों का मोह भंग होने लगा है। खासकर बीटी बीज से क्योंकि सफेद मक्खी का प्रकोप केवल बीटी कपास में ही था जबकि देसी कपास में गत वर्ष इसका कोई असर नहीं देखा गया। अब कपास की खेती करने वाले किसान फिर से अपने पुराने बीज देसी की ओर कदम बढ़ाने लगे हैं।

जिले के कई गांवों में कपास की फसल में सफेद मक्खी का आगमन शुरू हो गया है। खासकर अप्रैल में बीजी हुई फसल में। जैसे ही किसानों ने सफेद मक्खी की सूचना विभाग को दी तो विभाग ने भी तुरंत प्रभाव से सफेद मक्खी प्रबंधन शिविरों का आयोजन शुरू कर दिया है। कपास विशेषज्ञ डॉ. बृजलाल बैनीवाल ने बताया कि गत वर्ष सफेद मक्खी से कपास की फसल को हुए नुकसान को देखते हुए इस बार किसानों को पहले से ही आगाह किया जा रहा है।

सफेद मक्खी प्रबंधन के बारे में बताते हुए कहा कि खेत को खरतपवार रहित बनाना बहुत ही जरूरी है। कपास की फसल के खेतों के चारों ओर तरफ बाजरे या ज्वार की दो सघन पंक्तियों में बिजाई करें जो भौतिक अवरोधक के रूप में काम करेगी। साथ ही प्रति एकड़ 50 से 100 पीले स्टिकी ट्रेप लगाएं। डॉ. बैनीवाल ने बताया कि जरूरत पड़ने पर एक लीटर प्रति एकड़ निंबीसीडीन 250 लीटर पानी में घोल कर छिड़काव करें। एक-एक किसान स्प्रे न कर सामूहिक रूप से स्प्रे करें ताकि परिणाम बेहतर आएं। सिंथेटिक स्प्रे न करें केवल बीमारी के लिए रिकमेंडड स्प्रे ही करें। दो या दो से अधिक स्प्रे एक साथ घोल कर न करें।
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जिले का नाम      बिजाई का लक्ष्य      बिजाई हुई (हेक्टेयर में)
सिरसा              1,80,000           1,81,545
फतेहाबाद           75,000             65,770
हिसार               1,46,000           89,830
जींद                 70,000             46,000
भिवानी              95,000             54,660
रोहतक              18,000             13,020
सोनीपत             4000                7500
कैथल               10,000              5917
नारनौल              10,000             10,330
झज्जर                5000                4900
पलवल              4000                9000
रेवाड़ी               2000                 7800
कुल                 6,19,000            4,96,272
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