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खेतों में मिले सफेद मक्खी के प्रौढ़, खतरा बरकरार

Fri, 17 Jun 2016 01:18 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
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सफेद मक्‍खी - फोटो : Desk
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चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कीट वैज्ञानिकों द्वारा प्रदेश के कपास उत्पादक जिलों में कपास पर सफेद मक्खी के प्रकोप की स्थिति जानने के लिए किए गए ताजा सर्वेक्षण में ज्यादातर खेतों में कपास के पौधों पर इस कीट की संख्या आर्थिक कगार से नीचे दर्ज की गई है। विश्वविद्यालय के कीट विज्ञान विभाग के वैज्ञानिकों डॉ. पाले राम, डॉ. केके दहिया, डॉ. एसएस पूनिया और डॉ. केके वर्मा की टीम ने हिसार, भिवानी, फतेहाबाद और सिरसा जिलों के 22 गांवों में कपास में विभिन्न कीटों की उपस्थिति जानने के लिए सर्वेक्षण किया।
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इन वैज्ञानिकों की रिपोर्ट के मुताबिक सफेद मक्खी के प्रौढ़ सभी खेतों में उपस्थित हैं, लेकिन उनकी संख्या फिलहाल आर्थिक कगार से काफी कम (6-8 प्रौढ़ प्रति पत्ता) है। सर्वेक्षण में सरसौद गांव के एक खेत, जिसमें कपास के साथ खीरा की फसल भी उगाई गई है, में खीरा पर और शिवादा गांव में मूंग पर सफेद मक्खी के प्रौढ़ पाए गए हैं। सर्वे में उपरोक्त गांवों में 59 प्रतिशत खेतों में लीफ हॉपर कीट की भी उपस्थिति दर्ज की गई है, लेकिन इस कीट की संख्या आर्थिक कगार से बहुत कम (2 प्रौढ़ और निंफ प्रति पत्ता) है। इसके अतिरिक्त थ्रिप्स की न के समान उपस्थिति दर्ज की गई है, जबकि मिलीबग का प्रकोप किसी भी खेत में देखने को नहीं मिला।

किसान ऐसे करें बचाव
विश्वविद्यालय के अनुसंधान निदेशक डॉ. एसएस सिवाच ने कपास में सफेद मक्खी की उपस्थिति के दृष्टिगत किसानों को इस कीट के प्रबंधन हेतु उचित उपाय करने को कहा है। उन्होंने कपास के बीच खीरा और बैंगन के उपेक्षित खड़े पौधों को उखाड़ फेंकने की सलाह दी है। उन्होंने कहा किसानों को सफेद मक्खी पर नजर रखने के लिए सप्ताह में एक बार उपरोक्त फसलों का मुआयना अवश्य करना चाहिए और इनकी रोकथाम के उपाय अपनाने चाहिए। डॉ. सिवाच ने सफेद मक्खी की रोकथाम के लिए निंबेसिडीन 300 पीपीएम एक लीटर दवा का 200 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति एकड़ पांच दिन के अंतराल पर दो बार छिड़काव करने की सलाह दी है।
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