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मानसून पास, सफाई की अब भी आस

Fri, 17 Jun 2016 01:12 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
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सीवर - फोटो : Bureau
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मानसून के दिनों में शहर जलमग्न न हो इसके लिए जन स्वास्थ्य विभाग ने कमर कस ली है। सीवरों की सफाई के कार्य में तेजी कर दी गई है। इसके अलावा डीजल इंजनों की भी व्यवस्था की गई है। हालांकि पिछले एक साल में शहर के सीवरों की व्यवस्था सुधरी है पर विभाग बरसाती सीजन के लिए अतिरिक्त व्यवस्था करना उचित समझ रहा है।
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बरसाती सीजन में शहर में जगह-जगह पर पानी भर जाता है जिससे लोगों को भारी मुश्किल का सामना करना पड़ता है। इस बार ऐसा न हो इसके लिए विभाग ने पहले से ही तैयारियां शुरू कर दी थी। विभाग का दावा है कि जल निकासी के पूरे प्रबंध हैं। अब बरसात के दिनों में ही पता लग पाएगा कि विभाग का दावा सही साबित होता है या नहीं। 10 एमएम बरसात से ही शहर में जगह-जगह पानी भर जाता है।

अधिक बरसात होने पर तो हालात बाढ़ जैसे हो जाते हैं। सीवर पानी निकालने की बजाय बैक मारने लगते हैं। अब तक शासन और प्रशासन की ओर से जल निकासी के स्थायी प्रबंधों पर ध्यान नहीं दिया गया है। सीवर ओवरफ्लो होने की समस्या के कारण आए दिन धरने-प्रदर्शन होते रहे हैं। खासकर बरसात के दिनों में लोगों के घरों में पानी भर जाता रहा है। हालांकि इससे पूर्व भी मानसून के दिनों से पूर्व सीवरों की सफाई होती रही है पर कार्य ढंग से न होने के कारण बरसात आते ही सीवर जवाब दे जाते हैं। इस बार कई दिनों से विभाग की टीमों के अलावा कुछ स्थानों का कार्य ठेके पर दिया गया है।
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जन स्वास्थ्य विभाग के कार्यकारी अधिकारी प्रदीप पुनियां ने बताया कि नटार, केलनिया, खैरपुर व बाल भवन में डिस्पोजल हैं जिनसे शहर के पानी की निकासी की जा सकेगी। उन्होंने बताया कि पूरे शहर में लगातार सीवरों की सफाई का कार्य जारी है। एक सेट मशीन है जिससे सीवर खोले जाते हैं। डीजल इंजन की व्यवस्था की गई है ताकि कहीं पर बरसात के दिनों में पानी भर जाए तो निकाला जा सके। विभाग के 30 से 35 आदमी कई महीनों से सीवर व्यवस्था को सुधारने में जुटे हुए हैं। पूरे शहर के सीवरों की सफाई करवाई गई है ताकि बरसात के दिनों में जल निकासी बेहतर हो सके। इसके अलावा ऐसे स्थानों को ढूंढते रहते हैं जहां पर सीवर की समस्या हो। यही कारण है कि सीवर समस्या को लेकर आने वाली शिकायतों में बहुत कमी आ गई है। उन्होंने कहा कि हमें पूरी उम्मीद है कि इस बार जल भराव की समस्या नहीं आएगी।

बरसाती नाला बना सफेद हाथी
शहर से बरसाती पानी की निकासी के लिए हुडा चौक से एयर फोर्स स्टेशन तक रोड के दोनों ओर करीब 14 साल पहले नाला बनाया गया था। इस पर पांच करोड़ से अधिक राशि खर्च हुई थी। विडंबना कि नाला बनने के बाद किसी भी विभाग ने इसकी सफाई नहीं करवाई जिस कारण पूरा नाला कचरे से भर गया। अब इस नाले का कोई प्रयोग नहीं हो रहा है। या यूं कहें कि आसपास के दुकानदारों के लिए ये नाला आफत बना हुआ है। करोड़ों रुपये बर्बाद हो गए पर किसी विभाग ने इसकी सफाई करवाने की जहमत नहीं उठाई। इस नाले की बरसाती सीवन से पूर्व सफाई करवाई जाए तो काफी हद तक जल निकासी इस नाले से हो सकती है।

पुराने नाले दब गए गलियों के नीचे
80 के दशक से पूर्व शहर से बरसाती पानी की निकासी के लिए कई कॉलोनियों में नाले बनाए गए थे। अब इन नालों को कोई अस्तित्व नहीं रहा है। कहीं पर लोगों ने नालों को भर कर निर्माण कर लिया तो कहीं पर बार-बार बनाई गई गलियों के नीचे दबकर रह गए हैं ये नाले।

अलग लाइन डलेगी बरसाती पानी की निकासी के लिए
हालांकि अभी तक प्रस्ताव को हरी झंडी नहीं मिली है पर आने वाले समय में शहर से बरसाती पानी की निकासी सीवरों पर निर्भर नहीं रहेगी। इसके लिए अलग से पाइन लाइन डलेगी। इस लाइन के डलने के बाद सीवरों से केवल घरों का पानी ही निकाला जाएगा। विभाग ने इस पर काम किया है पर अभी तक प्रस्ताव पाइप लाइन में ही है। बताया जा रहा है कि इस पायलेट प्रोजेक्ट को प्रथम चरण में कुछ शहरों में अजमाया जाएगा उसके बाद सभी शहरों में ऐसी व्यवस्था हो सकती है।
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