बेघर होने की कगार पर पहुंच चुके थेहड़वासियों का सब्र का बांध लगातार मिल रहे नोटिसों के चलते सोमवार रात को फूट पड़ा। बेघर करने के नोटिस से गुस्साए थेहड़ वासियों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए घंटाघर चौक पर जाम लगा दिया। प्रदर्शनकारियों ने भाजपा सरकार को सड़क पर लेट कर जमकर कोसा। जाम की सूचना मिलते ही शहर थाना प्रभारी सुभाष बिश्नोई पुलिस फोर्स लेकर मौके पर पहुंच गए।
थेहड़ संघर्ष समिति की अध्यक्ष एडवोकेट संजूबाला ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा सरकार वर्षों से थेहड़ पर रह रहे गरीब लोगों को उजाडना चाहती है। सरकार ने हाईकोर्ट में हलफनामा दायर करके कहा है कि मई माह में थेहड़ को खाली करवा दिया जाएगा। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से कहा कि जिला प्रशासन ने अभी तक दो हजार परिवारों का नोटिस जारी करके अपने घर खाली करने को कहा है।
नोटिस को देखकर क्रोध आना सामान्य सी बात है लेकिन शांति नोटिस का जवाब देने के लिए कानूनी विकल्प तलाशना होगा। हिंसा किसी भी समस्या का हल नहीं है। मंगलवार को थेहड़ मेें रहने वाले हजारों लोग उपायुक्त कार्यालय पहुंचर मुख्यमंत्री के नाम उपायुक्त को ज्ञापन सौंपेंगे। थेहड़ में रहने वाले 3040 परिजनों को अनाधिकृत निर्माण बताकर मकान खाली करने का नोटिस जारी किया गया है। एडवोकेट संजूबाला ने सभी परिवारों से कहा कि हर एक परिवार से दो लोग मंगलवार सुबह गोशाला रोड आए। सात हजार लोग सड़कों पर प्रदर्शन करते हुए शहर में निकलेंगे और उपायुक्त कार्यालय को ज्ञापन सौंपेंगे।
गौरतलब है कि भारत सरकार ने सिरसा के थेहड़ को प्राचीन ऐतिहासिक धरोहर घोषित किया हुआ है। पुरातत्व विभाग थेहड़ पर अपना अधिकार जताते हुए थेहड़वासियों को नोटिस जारी करके इसे खाली करने को कहा था। इसके बाद पुरातत्व विभाग उच्च न्यायालय का द्वार खटखटाया और न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए सिरसा जिला प्रशासन को आदेश दिया कि वे थेहड़ से सारा अनाधिकृत निर्माण खाली करवाएं। प्रदेश सरकार ने उच्च न्यायालय में जवाब दाखिल किया कि मई 2016 तक थेहड़ से अनाधिकृत निर्माण हटा दिया जाएगा। थेहड़ वासियों का कहना है कि थेहड़वासियों को सारी सरकारी सुविधाएं मिली हुई हैं और वे हाउस टैक्स तक भरते हैं। थेहड़ में 25 हजार लोग रहते हैं ऐसे में वे किसी भी सूरत में थेहड़ खाली नहीं करना चाहते। इसी कारण थेहड़वासियों व प्रशासन के बीच लगातार टकराव की स्थिति बनती जा रही है।