डबवाली में 23 दिसंबर 1995 को हुए अग्निकांड में प्यारे लाल ग्रोवर का बेटा संजय पंडाल में लगी आग से बाहर निकल आया, लेकिन आग की लपटों में घिरे सैकड़ों मासूम बच्चों की चीख-पुकार सुनकर वापस आग में कूद गया। 25 मासूमों को जिंदगी बचाने वाले संजय समेत कुल 442 मृतकों को बुधवार का श्रद्धांजलि दी जाएगी।
बड़े भाई सतभूषण ग्रोवर के अनुसार संजय की आंखें और शरीर बुरी तरह झुलस चुका था, जोकि दान नहीं किए जा सकते थे। इसके चलते संजय के शव का डीएमसी में पोस्टमार्टम करवाने के बाद उन्होंने डबवाली के रामबाग में उसे पंचतत्व में विलीन कर दिया। उस समय संजय के बड़े बेटे पारूल की उम्र महज सवा छह साल और छोटे बेटे नवनीत की उम्र सवा साल ही थी। संजय की मौत के बाद मानव संसाधन विकास मंत्रालय भारत सरकार ने उसके परिजनों को राष्ट्रीय युवा पुरस्कार और 1997 में रेड ऐंड व्हाइट कंपनी ने बहादुरी पुरस्कार दिए थे।
स्मारक को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग
डबवाली अग्निकांड में 442 मृतकों की याद में बुधवार को स्मारक स्थल पर सर्वधर्म प्रार्थना सभा की ओर से श्रद्धांजलि सभा आयोजित की जाएगी। कार्यक्रम सुबह दस बजे स्मारक स्थल पर होगा। वहीं, अग्निकांड पीड़ित संघ के प्रधान विनोद बंसल ने स्मारक स्थल को राष्ट्रीय स्मारक स्थल घोषित किया जाए।
मैंने विधानसभा में पहले भी राष्ट्रीय स्मारक स्थल बनाने का मुद्दा उठाया था, लेकिन स्थानीय प्रशासन की ओर से कोई आवेदन नहीं किया गया। इस मामले को दोबारा विधानसभा में उठाएंगे।
- अमित सिहाग, विधायक, डबवाली