केंद्र सरकार की ओर से दवा विक्रेताओं पर ई-पोर्टल और ऑनलाइन फार्मेसी लागू करने के खिलाफ ऑल इंडिया आर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट्स के आह्वान पर डिस्ट्रिक्ट केमिस्ट एसोसिएशन के बैनर तले मंगलवार सुबह दवा विक्रेताओं ने जिले की 1250 दवाइयों की दुकानें बंद रखकर केंद्र सरकार के खिलाफ रोष व्यक्त किया।
एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष मदन बजाज, सचिव संदीप सिड़ाना, सहसचिव चंद्रशेखर जैसवाल और नरेंद्र मेहता, ऑडिटर विकास बाठला, कोषाध्यक्ष नरेश सेठी, अंशुल बजाज, अमित तनेजा और संदीप ने बताया कि दवा विक्रेता सरकार को नियमानुसार अदायगी कर दवा बेचते हैं, लेकिन केंद्र सरकार अब ई-पोर्टल के नाम से कानून दवा विक्रेताओं पर थोपना चाहती है, जिससे नकली और नशीली दवाओं का कारोबार बढ़ेगा, जोकि जनहित में उचित नहीं है। इसके अतिरिक्त दवा विक्रेताओं को इंटरनेट, कंप्यूटर और प्रिंटर-स्कैनर आदि उपकरणों की व्यवस्था करनी होगी, जिससे न केवल उन पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा, बल्कि वह सारा दिन कागजी कार्यों में उलझकर रह जाएंगे।
उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि अगर इस मामले में केंद्र सरकार ने ई-पोर्टल कानून लागू करने की कोशिश की, तो दवा विक्रेताओं को मजबूरन देशभर में दुकानें बंद कर संघर्ष की राह पकड़नी होगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने फार्मेसी संचालकों को ऑनलाइन फार्मेसी चलाने की इजाजत देकर भी दवा विक्रेताओं के साथ भद्दा मजाक किया है, क्योंकि ऑनलाइन फार्मेसी में संचालकों को किसी भी प्रकार की सरकारी शर्त पूरी नहीं करनी पड़ती, जबकि दवा विक्रेता सरकार की सभी शर्तों एवं नियमों का पालन करते हैं। सरकार को चाहिए कि इन पर भी अंकुश लगाए, ताकि देश में नकली व नशीली दवाइयों का व्यापार बंद हो। मेडिकल दवाओं की आज पूरे जिले में 1250 दुकानें बंद रहीं। इस रोष में रानियां प्रधान लालचंद वर्मा, कालांवाली प्रधान वेद प्रकाश, डबवाली प्रधान दर्शनलाल, ऐलनाबाद प्रधान अरविंद मेहता ने भी इस रोष को अपना समर्थन देते हुए दुकानें बंद रखीं।
मार डालेगा नया कानून
एसोसिएशन के प्रधान मदन बजाज ने कहा कि ई-पोर्टल कानून से मेडिकल स्टोर सचालकों को अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ेगा। उन्हें अपनी दुकानों पर एलईडी, प्रिंटर, स्कैनर, कंप्यूटर और वाईफाई का प्रबंध करना पड़ेगा। इतना ही नहीं एमबीबीएस से कम उपाधिधारक की पर्ची पर दवाई भी नहीं दी जा सकेगी। बीएएमएस और जीएएमएस चिकित्सकों की पर्ची पर भी दवाई नहीं मिलेगी। सिरदर्द की गोली खरीदने पर भी बिल और रसीद देनी पड़ेगी। मेडिकल स्टोर संचालकों पर कागजी कार्रवाई का अतिरिक्त बोझ डाल दिया गया है।
प्राइवेट अस्पतालों में खुली दुकानें
एक ओर जहां एसोसिएशन ने पूरे जिले में केंद्र सरकार के खिलाफ दवा की दुकानें बंद रख विरोध जताया, वहीं आमजन के लिए निजी अस्पतालों में मेडिकल दुकानें खुली रखी। एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष मदनलाल बजाज ने बताया कि उनकी यह लड़ाई केंद्र सरकार के खिलाफ है और तब तक रहेगी जब तक केंद्र सरकार अपने निर्णय को वापस नहीं ले लेती। आमजन को कोई दिक्कत न आए, इस संबंध में एसोसिएशन ने पूरे इंतजाम किए हैं।
पूरे दिन बंद रहे मेडिकल स्टोर, मरीज परेशान
ऐलनाबाद। केंद्रीय ई पोर्टल नीति, ऑनलाइन फार्मेसी के विरोध में ऑल इंडिया ऑर्गेनाईजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स के आह्वान पर मंगलवार को दवा विक्रेताओं के देशव्यापी बंद को स्थानीय दवा विक्रेता संघ ने समर्थन देते हुए अपनी मेडिकल शॉप बंद रखी जिससे दिन भर मरीज हाथ में पर्ची लिए इधर-उधर भटकते रहे। हरियाणा स्टेट केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन के मंजीत शर्मा तथा ऐलनाबाद इकाई के प्रधान अरविंद तलेजा ने बताया कि ऑनलाइन फार्मेसी केमिस्टों को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं। उन्होेंने सरकार से यह मांग की है कि वह 16 मार्च 2016 को दिए गए सार्वजनिक नोटिस से प्रस्तावित ई-पोर्टल के कार्यान्वयन को इस आपत्तियों के आधार पर खारिज करें।
दुकानें बंद रख दवा विक्रेताओं ने जताया रोष
डबवाली। ऑल इंडिया केमिस्ट्स एसोसिएशन द्वारा दवा विक्रेताओं की मांगों को लेकर 30 मई की आहूत राष्ट्रव्यापी हड़ताल का डबवाली में व्यापक असर रहा। शहर के सभी दवा विक्रेताओं ने मंगलवार को अपनी दुकानें बंद रखी। इससे पूर्व सोमवार को दवा विक्रेता संघ डबवाली के बैनर तले दवा विक्रेताओं ने एसडीएम को अपनी मांगों से संबंधित एक ज्ञापन भी सौंपा था। डबवाली दवा विक्रेता संघ के प्रधान दर्शन सोनी ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर केमिस्ट्स एसोसिएशन ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के उस प्रस्ताव को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। जिसमें दवाओं की बिक्री के नियंत्रण के लिए ई-पोर्टल बनाने की बात कही गई है। अधिकतर दवा विक्रेताओं के लिए ई-पोर्टल पर अपलोड करना मुश्किल और परेशान करने वाला साबित होगा। दवा विक्रेता सरकार से इस नियम को वापिस लेने की मांग कर रहे हैं। सोनी ने बताया कि डबवाली में 74 दवा विक्रेता हैं। इस नियम के विरोध में मंगलवार को सभी ने अपनी दुकानें बंद रख कर रोष जाहिर किया।