सिरसा। सिख इतिहास के साथ छेड़छाड़ मामले में सिख जत्थेबंदियों की ओर से मोहाली में पंजाब शिक्षा बोर्ड के समक्ष चल रहे धरने प्रदर्शन से आने वाली 15 मार्च तक का बोर्ड को अल्टीमेटम दिया गया। इसके अलावा धरना निरंतर चलता रहेगा। इसमें सिरसा से बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया।
भारतीय किसान एकता के मीडिया प्रभारी गुरलाल भंगू ने बताया कि प्रधान लखविंद्र सिंह औलख की अगुवाई में सोमवार को भारतीय किसान एकता की टीम मोहाली में चल रहे सिख जत्थेबंदियों के धरने का समर्थन करने पहुंची। बीकेई प्रधान लखविंद्र सिंह ने कहा कि मोहाली में 7 फरवरी से लेकर किसान नेता बलदेव सिंह सिरसा की अगुवाई में पंजाब शिक्षा बोर्ड के समक्ष सिख जत्थेबंदियों का लगातार धरना प्रदर्शन चल रहा है। जिसमें कई किसान जत्थेबंदियों ने भी अपना समर्थन दिया है। कई साल पहले पंजाब शिक्षा बोर्ड ने 12वीं कक्षा के इतिहास के सिलेबस के लिए कुछ किताबें प्रकाशित की गई थी। जिसमें सिख धर्म के गुरुओं भक्तों और सिख योद्धाओं के लिए बहुत ही आपत्तिजनक बातें लिखी गई थी। सिख इतिहास के विपरीत इतिहास को मिथिहास बनाने की कोशिश थी। जिस पर बलदेब सिंह सिरसा ने आपत्ति जताते हुए कई साल पहले कोर्ट में शिक्षा बोर्ड के खिलाफ केस कर दिया था। कोर्ट में केस हारने के बाद और सिख संगत के विरोध के चलते शिक्षा बोर्ड ने इन किताबों को सिलेबस में तो लागू नहीं किया और न ही सार्वजनिक किया। सिख संगत में अभी तक पंजाब शिक्षा बोर्ड के प्रति रोष है, क्योंकि जिन लोगों ने इन किताबों को लिखा और प्रकाशित किया था उन पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। 7 फरवरी से मोहाली शिक्षा बोर्ड के समक्ष सिख संगत के साथ धरने पर बैठे बलदेव सिंह सिरसा ने 28 फरवरी को सभी सिख जत्थेबंदियों को इकट्ठा होने का संदेश दिया गया था, जिसमें देश भर की कई सिख व किसान जत्थेबंदियों ने हाजिरी लगवाई। 28 फरवरी दिन सोमवार को समूह साध संगत से मीटिंग करके 15 मार्च तक का शिक्षा बोर्ड को अल्टीमेटम दिया गया है। बलदेव सिंह सिरसा ने पंजाब शिक्षा बोर्ड को चेतावनी देते हुए कहा कि 14 मार्च तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो 15 मार्च को पंजाब शिक्षा बोर्ड मोहाली के गेट को ताला लगाकर आंदोलन को तेज किया जायेगा। इस दौरान बाबा बेयंत सिंह सहावा साहिब वाले, जगजीत सिंह डल्लेवाल, लक्खा सिधाना, अभिमन्यु कोहाड़, दलजीत चहल, अंग्रेज कोटली, अरविंद भाऊ रोड़ी, हरचरण कंवर आदि मौजूद रहे।