सिरसा। गांव फग्गू में पराली जलाने के मामले में प्रशासन ने ग्राम स्तरीय व तहसील स्तरीय कमेटी सदस्यों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। ग्राम स्तर कमेटी में पटवारी, ग्राम सचिव, सरपंच, नम्बरदार, कृषि विभाग के सुपरवाइजर शामिल है, जबकि तहसील स्तर में तहसीलदार व नायब तहसीलदार शामिल हैं। इस संबंध में उपायुक्त पार्थ गुप्ता ने मंगलवार को मुख्य सचिव संजीव कौशल की वीडियो कॉन्फ्रेंस में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संबंधी किसान को भी 2500 का जुर्माना लगाया है।
कॉन्फ्रेंस के बाद उपायुक्त पार्थ गुप्ता ने पराली प्रबंधन को लेकर अधिकारियों के साथ बैठक की। उपायुक्त ने कहा कि प्रदेश सरकार पराली जलाने की घटनाओं पर पूर्ण अंकुश को लेकर पूरी तरह से कटिबद्ध है और इस दिशा में गंभीरता से कार्य किया जा रहा है। जिले में पराली जलाने की घटनाओं को शून्य तक ले जाने के लक्ष्य के साथ काम किया जाए। अधिकारी व कर्मचारी फील्ड में रहकर खेतों में पूरी निगरानी रखें। मुख्य सचिव ने जिला में पराली जलाने की घटनाओं पर पूर्ण अंकुश लगाने, पराली प्रबंधन को लेकर किसानों को जागरूक करने आदि विषयों पर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
उपायुक्त ने अधिकारियों से कहा कि वे पराली जलाने की घटनाओं को लेकर गंभीरता से कार्य करें। इस कार्य में कोई कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कोई अधिकारी या कर्मचारी जिसकी जिम्मेवारी लगाई गई है, यदि उसके क्षेत्र में कोई पराली जलाने की घटना होती है, तो वह भी उसका जिम्मेवार होगा। इसलिए जहां पर भी पराली जलाने की घटना हो उसकी सूचना तुरंत भेजें, ताकि संबंधित के खिलाफ कार्यवाही की जा सके। उन्होंने कहा कि जो गांव रेड व येलो जोन में है, उनमें जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जाए। उन्होंने कहा कि रेड जोन के जिन गांवों में जीरो बर्निंग होगी, उन्हें विकास कार्यों के लिए प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी।
नियमों की उल्लंघना पर करें कार्यवाही, पराली प्रबंधन के लिए करें जागरूक
डीसी ने कहा कि पराली जलाने वाले लोगों तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। अधिकारी किसान नेताओं के साथ जुड़ कर सरकार की योजनाओं के बारे में किसानों को जागरूक करें। इसके अलावा उन्होंने खेतों के दौरे के दौरान छोटे और सीमांत किसानों तक उपकरण पहुंचाने के महत्व पर जोर दिया, जिससे छोटे से छोटे किसानों के पास भी फसल अवशेषों को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने के लिए आवश्यक उपकरण पहुंच सकें।
पराली प्रबंधन के लिए मिलेगी एक हजार रुपये प्रति एकड़ राशि
उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार ने धान की फसल के अवशेषों के इन-सीटू/एक्स-सीटू प्रबंधन के लिए प्रति एकड़ 1000 रुपये किसानों को दिए जाते हैं। रेड जोन में शून्य-जलन लक्ष्य को सफलतापूर्वक हासिल करने वाली पंचायतों को एक लाख रुपये से पुरस्कृत किया जाएगा। येलो जोन के गांवों को प्रोत्साहन के रूप में 50,000 दिए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, गोशालाओं को सहायता के लिए गांठों हेतु परिवहन 500 रुपये प्रति एकड़ तथा अधिकतम सीमा 15,000 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है।
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