- किसान परेशान, बोले-कटाई करवाएं या मंडी की लाइनों में लगें
- लास्टर लॉस के फेर में अटका पूरा सिस्टम, उठान भी बेहद धीमी, दो दिन से मंडी में खड़े ट्रक
- ओढ़ां में किसान नेताओं ने किया प्रदर्शन, अधिकारियों को बार-बार फोन कर दी चेतावनी
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। एक सप्ताह पहले तक किसानों को बारिश और ओलावृष्टि ने रुलाया था और किसान दुआ कर रहा था कि मौसम साफ हो। वहीं, अब मौसम साफ होने के बाद फसल मंडी में लेकर आने वाले किसानों के लिए सर्वर आफत बन गया है। गेट पास तक नहीं कट रहे हैं। तपती धूप में किसानों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
हाईवे से लेकर मंडियों के गेटों पर अन्नदाता ट्रैक्टर ट्राली लिए हुए खड़े हैं। ओढ़ां क्षेत्र में किसान नेताओं ने किसानों के साथ प्रदर्शन किया और सर्वर सिस्टम के खिलाफ नारेबाजी की। इसके बाद प्रशासन ने किसानों को समझया। अहम बात यह है कि पुलिस की टीमें यातायात व्यवस्था को संभालती हुई कहीं नजर नहीं आईं। ऐसे में डबवाली रोड से लेकर ओढ़ा हाईवे पर जाम की स्थिति देखने को मिली। डिंग मंडी में भी ऐसे ही हालात रहे। पुलिस प्रशासन के बड़े-बड़े दावे सोमवार को आवक बढ़ने के साथ ही फेल नजर आए।
कहीं 45 मिनट तो कहीं एक घंटा करना पड़ा इंतजार
तापमान में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। सोमवार को 36 डिग्री तापमान दर्ज किया गया है। गर्म हवा चल रही है। ऐसे में ट्रैक्टर ट्रॉली लेकर मंडियों के बाहर गेट पास के लिए 45 मिनट से लेकर एक घंटे तक किसान धूप में खड़े रहे। पीने के पानी से लेकर अन्य कोई सुविधा किसानों को गेट पास के क्षेत्र में नहीं करवाई गई है। किसानों के लिए सरकार के नए नियम सिरदर्द बन गए हैं। एक ओर जहां खेतों में कंबाइन से कटाई हो रही है, वहीं, दूसरी ओर किसान ट्रैक्टर ट्रॉली लेकर मंडी में फंस गया है। ऐसे में एक दिन में पांच से छह चक्कर लगाने वाला किसान दो चक्कर ही गेहूं के लिए मुश्किल से आ रहा पा रहा है। यही हालात रहे तो किसान सड़कों पर नजर आएंगे और प्रशासन के लिए व्यवस्था बनाना मुश्किल हो जाएगा।
उठान ठप, गेहूं से भरे ट्रक मंडी में अटके
बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन प्रणाली और अन्य नए नियम किसानों के साथ-साथ मार्केट कमेटी अधिकारियों और आढ़तियों के लिए भी मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं। सर्वर ठप होने का असर केवल किसानों तक सीमित नहीं रहा बल्कि उठान प्रक्रिया भी बुरी तरह प्रभावित हुई। ट्रक चालकों को गोदामों में गेहूं उतारने के लिए गेटपास नहीं मिल पाए। इससे ट्रकों की आवाजाही रुक गई। मंडी में ट्रक ही गेहूं से भरे लदे नजर आ रहे हैं। आढ़तियों और ठेकेदारों की मानें तो मौजूदा सिस्टम पर एक साथ अधिक दबाव पड़ने से साइट बार-बार क्रैश हो रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि उठान के लिए गेटपास जारी करने के लिए अलग से पोर्टल या साइट बनाई जाए ताकि अलग-अलग सिस्टम होने से तेजी से कामकाज सुचारु रूप से चल सके। वहीं, अधिकारियों के पास किसानों , किसान नेताओं आदि के बड़े स्तर पर फोन आ रहे हैं।
300 से 400 कॉल आ रहीं अधिकारियों के पास
बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और अन्य जरूरी प्रक्रियाएं ठप पड़ने से अधिकारियों के मोबाइल लगातार घनघनाते रहे। एक किसान की कॉल खत्म भी नहीं होती कि दूसरी लाइन पर इंतजार करती मिलती। सोमवार को सिरसा मार्केट कमेटी के सचिव वीरेंद्र मेहता के पास किसानों की कॉल्स की बाढ़ आ गई। किसान साइट न चलने की शिकायत करते हुए फसल उतरवाने की गुहार लगाते रहे। कई किसानों ने बिना गेटपास फसल उतारने की मांग की तो कुछ ने जाम लगाने तक की चेतावनी दे डाली। वहीं, अधिकारी भी खुद को असहाय बताते नजर आए। उनका कहना है कि सर्वर डाउन होना उनके नियंत्रण से बाहर है। वे लगातार उच्च अधिकारियों को स्थिति से अवगत करवा रहे हैं लेकिन फिलहाल समस्या का समाधान नजर नहीं आ रहा। ऐसे में उनके लिए दो सप्ताह तक इस व्यवस्था को कंट्रोल कर पाना मुश्किल होता जा रहा है।
डिजिटल कांटे के आदेश खानापूर्ति
मंडी में डिजिटल कांटे महज दिखाने के लिए नजर आ रहे हैं। आढ़ती ने डिजिटल कांटे के साथ फरसा कांटा रखा हुआ है। कोई आता है तो डिजिटल कांटा आगे कर दिया जाता है। अधिकारी जाने के बाद पुराने कांटे से तुलाई शुरू हो जाती है। सही मायने में तपती धूप और बढ़ते दबाव का फायदा आढ़ती बढ़े स्तर पर उठा रहे हैं। कपास मंडी और न्यू एडीशनल मंडी सभी जगह यही हालात हैं।
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चोपटा व ऐलनाबाद क्षेत्र में बिक रहा 2600 रुपये गेहूं, राजस्थान हो रही सप्लाई
राजस्थान से सटे ऐलनाबाद और चोपटा क्षेत्र में 30 से 40 प्रतिशत गेहूं की सीधी खरीद हो रही है। भादरा और नोहर मंडी में यह गेहूं जा रहा है। किसानों के खेतों और घरों से सीधे तौर पर व्यापारियों का गेहूं उठाया जा रहा है। वहीं, मंडी के अंदर बैठे कुछ आढ़ती भी यह काम कर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो 2600 से लेकर 2620 रुपये प्रति क्विंटल गेहूं की खरीद की जा रही है। ऐसे किसान मंडी में बायोमेट्रिक सिस्टम में फंसने के बजाय राजस्थान के व्यापारियों को नकद गेहूं बेच रहे हैं। इसकी चर्चा व जानकारी आढ़ती, किसान और मंडी के अधिकारियों तक है लेकिन कोई कुछ नहीं करता है। वहीं, गांव के कच्चे रास्तों के माध्यम से गेहूं भादरा व नोहर जाता है।
लास्टर लॉस के पत्र का इंतजार
सही मायने में मंडियों में खड़े ट्रक और गोदाम में ट्रकों से गेहूं उतारने की धीमी गति का कारण लास्टर लॉस यानी नमी से गेहूं के रंग में आए फर्क के पत्र का असर है। यह पत्र अभी तक जारी नहीं हुआ है कि कितने प्रतिशत तक लास्टर लास पर कटौती होती है और कितने प्रतिशत तक छूट है। इसी कारण गोदामों में जाने वाले वाहनों की गति धीमी है क्योंकि बाद में पत्र आने पर कटौती का नुकसान एजेंसी को उठाना पड़ेगा। इसलिए धीमी गति से काम चल रहा है।