सिरसा। रोडवेज बसों में ई टिकट प्रणाली जल्द ही शुरू होने की उम्मीद है। इसके लिए रोडवेज की ओर से ई टिकटिंग के लिए 300 मशीनों की डिमांड मुख्यालय को भेजी गई है। मुख्यालय की ओर से ही यह मशीनें रोडवेज को प्राप्त करवाई जाएगी। जिसके बाद परिचालक इन मशीनों के माध्यम से ही यात्रियों की टिकट काट सकेंगे। इससे यहां परिचालक का समय बचेगा वहीं फ्राड होने के मामलों से भी राहत मिलेगी। वहीं विभाग की ओर से अब किराया और रोटेशन की सूची को भी तैयार किया जा रहा है।
ई टिकटिंग शुरू होने पर परिचालक को पहले से छपाई की गई टिकट रखने की आवश्यकता नहीं होगी। मशीन में स्टैंड अनुसार किराया पहले से ही दर्ज किया जाएगा। बस में सवार होने पर यात्री से उसके उतरने वाले स्टैंड की जानकारी लेकर परिचालक को इसमें स्टैंड नंबर दर्ज करना होगा। जिसके बाद तय किराये अनुसार ही मशीन से टिकट निकलेगी। ऐसे में परिचालक यात्री से अधिक किराया नहीं ले सकेगा। टिकट कटने के बाद यात्री उस पर दर्ज किराया देख कर रही राशि देगा। हालांकि इससे पहले टिकट गलत काटने, पुरानी टिकट देने और खुद की छपाई हुई टिकट देकर यात्रियों से रुपये लेने जैसे फ्रॉड के मामले भी सामने आ चुके है। जिसके कारण रोडवेज को इसका नुकसान उठाना पड़ता था।
मुख्यालय को भेजी 300 मशीनों की डिमांड
ई टिकट काटने की प्रक्रिया जल्द शुरू करने को लेकर मुख्यालय की ओर से सभी डिपो को पत्र भी जारी किया गया है। जिसके बाद रोडवेज महाप्रबंधक ने संबंधित ब्रांच अधिकारियों से बैठक कर उन्हें रोटेशन, किराया और अन्य हर प्रकार की लिस्टों को अपडेट रखने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए रोडवेज ने अब 300 मशीनों की डिमांड मुख्यालय को भेजी है। मशीनों के पहुंचने के बाद रोटेशन, किराया लिस्ट उसमें दर्ज किया जाएगा।
मशीन में ही रहेगा यात्रियों का रिकॉर्ड
ई टिकट के लिए प्रयोग में लाई जाने वाले मशीन में हर प्रकार की जानकारी दर्ज होगी। मशीन से कितनी टिकट कटी, कितनी किराया आया, कितने यात्री किस स्टैंड से बस में सवार हुए और अन्य हर प्रकार का डाटा मशीन में दर्ज होगा। इससे पहले परिचालक को रूट के अनुसार अलग-अलग टिकट काटना पड़ता था। इसके बाद कितने टिकट कटे, कितने टिकट शेष बचे इसका रिकॉर्ड भी बक्से में रखना पड़ता था। लेकिन ई टिकट मशीन आने से परिचालक को राहत मिलेगी।
मशीनों के पहुंचने के बाद ई टिकट प्रक्रिया शुरू हो पाएगी। इसके लिए मुख्यालय को 300 मशीनों की डिमांड भेजी गई है। मुख्यालय की ओर से ही मशीनों को प्राप्त करवाया जाएगा। मशीनों में रूटों का स्टैंड अनुसार किराया दर्ज किया जाएगा। इससे गबन जैसे मामलों से राहत मिल सकेंगी।
-आरएस पूनिया, महाप्रबंधक, डिपो सिरसा