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शोध में खुलासा : अभी खत्म नहीं हुई गुलाबी सूंडी, अप्रैल से पहले नष्ट कर दें बची लकड़ियां और खराब हुए टिंडे

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गुलाबी सुंडी का पतंगा पकड़ने के लिए फेरोमोन ट्रैप दिखाते केंद्रीय कपास अनुसंधान संस्थान के सतपा - फोटो : Sirsa
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सिरसा। नरमे व कपास की फसलों में आए गुलाबी सूंडी के प्रकोप से प्रदेश भर में नुकसान हुआ। फसल का सीजन बदलने के बाद किसानों को लगता है कि अब सूंडी का प्रकोप खत्म हो चुका है। लेकिन केंद्रीय कपास अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने शोध किया और इसमें चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। वैज्ञानिकों की रिपोर्ट की मानें तो अभी गुलाबी सूंडी का कीड़ा पूरी तरह नहीं मरा है और फसली सीजन आने पर एक बार फिर कहर बरपा सकता है। इसलिए वैज्ञानिकों ने इससे निपटने के लिए भी उपाय सुझाए हैं।
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गुुलाबी सूंडी को लेकर सिरसा स्थित कपास अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने शोध किया है। वैज्ञानिकों ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि वर्ष 2018-19 के दौरान गुलाबी सूंडी का प्रकोप केवल कपास जीनिंग मील और बिनौले से तेल निकालने वाली मीलों के आसपास देखा गया है। लेकिन इस बार इन मीलों से दूर खासकर जिन किसानों ने पिछले साल की कपास की लकड़ियों का ढेर अपने खेत में लगा रखे हैं, वहां भी गुलाबी सूंडी का प्रकोप ज्यादा मिला। ऐसे में शोध में जो खुलासे हुए हैं, वह वैज्ञानिकों ने अब सार्वजनिक किए हैं।
लकड़ियों और खराब टिंडों में शांत होकर छिप जाता है कीड़ा, सीजन आने पर जागता है
शोध में पता चला है कि गुलाबी सूंडी का कीड़ा जल्दी से मरता नहीं है। जो फसल वे चट कर चुके हैं, उन्हें आमतौर पर किसान बचे खराब हुए टिंडों को फेंक देते हैं या लकड़ियों के खेत में ही ढेर लगा देते हैं। यही सबसे बड़ा कारण है, जब अगली फसल के लिए भी नुकसान होने का अंदेशा रहता है। बताया जा रहा है कि ये कीड़ा फसल की सूखी लकड़ी में भी छिप जाता है और खराब हुए टिंडों में भी लंबे समय तक जीवित रह सकता है। अभी ठंडा मौसम होने के कारण ये कीड़ा बाहर नहीं आ रहा है। ऐसे में जब दोबारा फसली सीजन आएगा तो एक बार फिर ये अंडे देगा और पतंगा उड़कर खेतों में फैलेगा। वैज्ञानिक बताते हैं कि गुलाबी सूंडी का कीड़ा 2 किलोमीटर तक उड़कर जा सकता है।
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किसान ये कर सकते हैं उपाय
-जिन किसानों पिछले सीजन की फसल की सूखी लकड़ी संभाल कर रखी है, उसे अप्रैल माह से पहले किसी भी तरीके से आग से नष्ट कर दें।
-पिछली बार सूंडी के कारण जो टिंडे खराब हो गए थे या अधपके टिंडे थे, उन्हें भी नष्ट कर दें।
-लकड़ियों के ढेर को मच्छरदानी जैसी जाली, तिरपाल से पूरी तरह ढक दें।
-ताकि सूंडी का पतंगा बाहर ना आ पाए और अंडे भी पनप ना सकें।
-जहां भी सूंडी का प्रकोप हो, वहां पर कपास की बिजाई के 90-120 दिन के बीच अंडा परजीवी ट्राइकोग्रामा बेक्टीरी के 6000 अंडे प्रति एकड़ के हिसाब से छोडे़ं
- खेत में बचे अधखुले, खराब टिंडों को नष्ट करने के लिए खेत में भेड़, बकरी आदि जानवरों को चरने दें
-सूंडी के प्रकोप वाले खेतों से लकड़ियों को नहीं ले जाना चाहिए और न ही कहीं एकत्र करें।
-संभव हो तो लकड़ियों को काट कर जमीन में मिला दें।
फेरोमोन ट्रैप लगाकर बचाव कर सकते हैं किसान
केंद्रीय कपास अनुसंधान केंद्र के अधिकारी सतपाल सिंह, ऋषि कुमार, दीपक और एसके वर्मा बताते हैं कि फेरोमोन ट्रैप साधारण सा उपकरण है। ये आसानी से 40 से 50 रुपये में किसानों के लिए बाजार में उपलब्ध है। इसे किसान खेतों में प्रयोग कर सकता है। इसके बीच में एक केमिकल भी डाला जाता है जिसकी खुशबू से नर पतंगा इसकी ओर आकर्षित होता है और फंस जाता है। इस केमिकल को कुछ दिन बाद बदलने की जरूरत पड़ती है। ये किसानों के लिए काफी लाभदायक सिद्ध हो सकता है।
जानिये...ऐसे किसान स्वयं कर सकते हैं गुलाबी सूंडी के होने की जांच
किसान खेत में लगाए गए फेरोमोन ट्रैप, रोजेट फूल (गुलाब की शक्ल) या हरे टिंडों को खोल कर देखें। यदि खेत में लगे फेरोमोन ट्रैप में 8 प्रौढ़ पतंगे प्रति फेरोमोन ट्रैप में लगातार कई दिन तक मिले या खेत में कपास के पौधे पर लगे हुए 100 में से 10 फूल गुलाब के फूल की तरह बंद नजर आए तो सावधान हो जाएं। इन फूलों को खोलने पर इनमें गुलाबी सूंडी और जाल दिखाई देता है। 20 हरे टिंडों (10-15 दिन पुराने बड़े आकार के टिंडे) को खोलने तक 2 टिंडों में गुलाबी या सफेद लारवा दिखाई दे, तो गुलाबी सूंडी को नियंत्रण करने की जरूरत है।
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गुलाबी सूंडी का जीवन चक्र
-4 से 5 दिन में गुलाबी सूंडी का अंडा तैयार होता है
-अगले 10 से 14 दिन में लारवा बनता है
-प्यूपा 8 से 13 दिन में तैयार हो जाता है
-15 से 20 दिन में सूंडी प्रौढ़ अवस्था में पहुंचती है
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