जिलाध्यक्ष एडवोकेट यतिन्दर सिंह ओटू झील में मछलिया छोड़ते हुए।
सिरसा। जिला मत्स्य विभाग के तत्वावधान में सोमवार को मछली प्रजातियों के संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ओटू वियर पर रैंचिंग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिलाध्यक्ष भाजपा यतिंद्र सिंह एडवोकेट ने कहा कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मछली प्रजातियों के संरक्षण को बढ़ावा देना है।
रैंचिंग एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें व्यस्क मछलियों को प्राकृतिक जल स्रोतों जैसे नदियों या झीलों में छोड़ा जाता है, ताकि उनकी आबादी को बढ़ाया जा सके। सरकार की सोच है कि मत्स्य पालन के साथ-साथ मत्स्य संरक्षण किया जाए। इसके लिए रैंचिंग कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। एसडीएम पारस भगोरिया ने कहा कि मत्स्य पालन कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाला व्यवसाय है।
जिले में इसे लेकर किसानों की रुचि लगातार बढ़ रही है। सिरसा हरियाणा में मत्स्य पालन के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। जिला मत्स्य अधिकारी जगदीश चंद्र ने मत्स्य पालन की योजनाओं व मत्स्य पालन में संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि रैंचिंग जैसे कार्यक्रमों से जहां एक ओर पर्यावरण संतुलन कायम होता है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है।
यह कार्यक्रम न केवल मछली पालन को बढ़ावा देगा, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों के टिकाऊ उपयोग में भी सहायक सिद्ध होगा। उन्होंने बताया कि इंडियन मेजर कार्प जैसे राहु, कतला, निजल व अन्य मछलियां व कॉपर कार्प को छोड़ा जाता है। कार्यक्रम में पूर्व भाजपा जिला अध्यक्ष शीशपाल कंबोज भी मौजूद रहे। इस कार्यक्रम के तहत जिला सिरसा के विभिन्न क्षेत्र से आए हुए मत्स्य पालक व ठेकेदारों ने भाग लिया।
जुलाई-अगस्त मछलियों का होता है प्रजनन समय
जिला मत्स्य अधिकारी जगदीश चंद्र ने बताया कि ओटू झील को सालाना ठेके पर दिया जाता है। जुलाई और अगस्त दो महीने ऐसे होते हैं, जिस दौरान मछलियां का प्रजनन का समय होता है। मछलियों की संख्या इन दो महीनों में तेजी से फैलती है। इसलिए इन दो महीनों में मछलियां पकड़ना प्रतिबंधित रहता है, ताकि मछलियां की प्रजातियों को बढ़ावा दिया जा सके।