रविवार के बाद सोमवार को भी जिले में बदरा बरसे। अब शहर के अलावा खेतों में भी पानी भर गया है। कई क्षेत्रों में जलभराव से फसलों के नुकसान हुआ है। दिन भर आसमान में बादल छाये रहे। रुक-रुक कर बूंदाबांदी होती रही। शहर की अनेक हिस्सों में पानी भर गया जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। आज सिरसा में 25 एमएम, ओटू में 08 एमएम, पंजुआना में 10 एमएम, रोडी में 10 एमएम, कालांवाली में 30 एमएम, खुईयां नेपालपुरा में 20 एमएम, अबूबशहर में 22 एमएम व गोलेवाला में 30 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई। यह बारिश कहीं आफत बनकर बरसी तो कहीं पर राहत लेकर आई।
राजकीय प्राथमिक पाठशाला में भरा बरसाती पानी
ऐलनाबाद (ब्यूरो)। शहर की डबवाली रोड पर वार्ड नंबर छह स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला पिछले पांच दिनों से लगातार हो रही बरसात के कारण तालाब का रूप लिए हुए है। जिससे स्कूल आने वाले नन्हें मुन्नें बच्चों के साथ स्टाफ को भी भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। बता दें कि वर्ष 1997 में निमत्त इस स्कूल भवन का लेवल अब सड़क से काफी नीचा हो गया है। अभी एक माह पूर्व ही इस स्कूल के आगे से गुजरने वाली मुख्य सड़क का लेवल करीब दो फुट ऊंचा उठा दिया गया है। जिससे स्कूल में भरा पानी बाहर नहीं निकल पा रहा है। वहीं स्कूल में पानी भर जाने के कारण स्कूल की चार दिवारी भी खस्ता हालात में पहुंच गई है। प्राथमिक विद्यालय होने के कारण इस विद्यालय में पांच से दस वर्ष की आयु के बच्चे ही शिक्षा ग्रहण करने आते है लेकिन स्कूल में डेढ़ से दो फुट तक पानी भर जाने के कारण इन बच्चों का स्कूल आना खतरे से खाली नहीं है। खंड मौलिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय के कनिष्ठ अभियंता विनोद कुमार बताया कि इस स्कूल की चार दिवारी एवं स्कूल के रैन वाटर रिचार्ज सिस्टम का एस्टीमेट डी प्लानिंग के तहत अतिरिक्त उपायुक्त सिरसा के कार्यालय मे भेज रखा है इसके बाद ही इस समस्या से निजात मिल सकती है।
कच्चे मकानों के लिए आफत
ओढां (ब्यूरो)। पिछले करीब एक सप्ताह से रुक-रुककर लगातार हो रही बरसात ने जन जीवन अस्त व्यस्त कर दिया है। इस बरसात के कारण जहां खेतों में नरमा कपास की फसल प्रभावित हो रही है तो वहीं कच्चे मकानों को खतरा उत्पन्न हो गया है। रविवार सांय व सोमवार सुबह से लेकर बाद दोपहर तक लगातार हुई बरसात के कारण निचले क्षेत्रों में जल भराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है तो वहीं ओढां व नुहियांवाली में मकान गिरने के भी समाचार हैं।
नुहियांवाली निवासी रोहताश कुमार ने बताया कि इस बरसात के कारण उसके एक मकान की छत गिर गई तो वहीं दूसरी छत में दरार आने के कारण गिरने की नौबत आ गई है। इस घटना में रोहताश की पत्नी रीना बाल-बाल बच गई जो आंगन में चाय बना रही थी। उधर गांव ओढां में स्थित गौशाला की दीवार भी तेज बरसात के कारण धंस गई। पिछले दो दिनों से गांव ओढां, ढाबां, बड़ागुढा के अलावा सुकेराखेड़ा आदि क्षेत्र में भारी बरसात हुई है जिस कारण लोगों का गलियों से गुजरना भी मुहाल हो गया है।
कहीं-कहीं तो स्थिति ये है कि गांव के झोहड़ पानी से भर कर ओवरफ्लो होकर पानी सड़कों पर आ गया है। क्षेत्र के किसानों गुरनाम सिंह, बिंदर सिंह, हरप्रीत सिंह, गुरमेल सिंह, मलकीत सिंह, गुरदीप सिंह आदि ने बताया कि इस बार नरमे की फसल में मक्खी का प्रकोप भी कम था और नरमे की फसल की ऊंचाई लगभग चार फुट से लेकर ज्यादातर 6-7 फुट तक थी और नरमे के टिंड़े भी तैयार हो चुके थे। नरमें की फसल बढ़िया खड़ी होने के कारण इस बार अच्छा मुनाफा होने की उम्मीद थी। उन्होने बताया कि लगातार दो दिन हुई बरसात व तेज हवाओं से नरमें की फसल काफी बिछ गई हैं और फसलों में पानी जमा हो गया जिसके किसानों को काफी नुकसान हुआ हैं।
जगह-जगह जलभराव
कालांवाली। सोमवार को दूसरे दिन फिर हुई बरसात से क्षेत्र के लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। बारिश के चलते लोगों के घरों में पानी घुस गया और मंडी में जगह जगह जलभराव हो गया। वहीं बरसात से किसानों की नरमा आदि फसलों को काफी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। बरसात होने से दादू रोड, वाटर वर्क्स रोड, डॉक्टर मार्केट, पंज रत्न सिनेमा रोड, पुराना थाना रोड, पीएनबी के सामने,आरा रोड, अनाज मंडी, पंजाब बस अड्डा आदि क्षेत्रों में जलभराव होने से लोगों को पैदल चलने में भी दिक्कत पेश आई। भारी बरसात के कारण बस अड्डा परिसर और रेलवे स्टेशन के बाहर रोड पर बरसाती पानी जमा होने से यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पडा और उन्हें पानी से होकर गुजरना पड़ा। इसके अलावा बरसात के साथ आई तेज आंधी के कारण कई मुख्य सड़कों पर पेड़ टूटकर गिर गए। जिससे वाहन चालकों व यात्रियों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। तेज बरसात और हवाओं के बीच वाहनों आदि के फंसने के कारण कई घंटों तक जाम की स्थिति सहनीं पड़ी। इसकी सूचना मिलते ही आस पास के किसानों ने मौके पर पहुंचकर टहनियों को काटकर ट्रैक्टर आदि की सहायता से पेड़ को रास्ते से हटाकर यातायात को सुचारू बनाया।
चोपटा क्षेत्र में बारिश होने फसलों को मिली राहत
चोपटा (ब्यूरो)। पैंतालिसा क्षेत्र में देरी से ही सही सोमवार को हुई बारिश से मौसम खुशगवार हो गया। जिससे किसानों के चेेहरों पर रौनक लौट आई है। पूरा सावन का महीना सूखा बीत जाने के बाद सावनी की फसल पर सूखे का खतरा मंडराने लगा था। अब भादों मास में हुई बारिश से सूखे का खतरा टल गया है। पिछले दो दिन से ठंडी हवा चलती रही, तथा बादलवाही रही जिससे गर्मी से राहत मिली। सोमवार को हुई बारिश कपास व बीटी नरमे, ग्वार और बाजरे की फसल के लिए संजीवनी साबित होगी। किसानों का कहना है कि बिरानी ग्वार और बाजरे की फसल पानी के अभाव में झुलस रही थी वह अब खराब होने से बच जाएगी। गांवों में पशुओं के पीने के पानी के जोहड़ तालाब बरसाती पानी से लबालब हो गए। नाथूसरी चोपटा कृषि खंड में करीब 25000 हेक्टेयर में कपास व नरमे की व करीब 3000 हेक्टेयर में मक्का, मूगंफली व अन्य फसलों की बिजाई हुई है। इसके अलावा करीब 37000 हजार हेक्टेयर में ग्वार व बाजरे की बिजाई की गई है। इस फसल पर मंडरा रहा सूखे का खतरा टल गया है।
राजस्थान कि सीमा से सटे पैंतालिसा क्षेत्र के कागदाना, कुुम्हारिया, खेड़ी, जसानियां, चाहरवाला, जोगीवाला, रामपुरा नवाबाद, गिगोरानी, शाहपुरिया, जमाल और कुताना सहित सभी गांवों में बारिश होने से गर्मी से तो निजात मिली ही वहीं सावनी की फसल के लिए भी फायदेमंद साबित होगी। किसान राम कुमार व सुल्तान सिंह का कहना है कि यहां पर जमीन रेतीली होने के कारण कपास व नरमे के पौधे के साथ ग्वार व बाजरे के पौधे झुलस रहे थे वह अब बारिश से पौधे झुलसने से रूक जाएंगें। अकाल व सूखे का सामना नही करना पड़ेगा।इनका कहना है कि अब तो सरकार अगर फसलों का भाव अच्छा दे दे तो बात बने। किसान जगदीश बैनीवाल व सुभाष चंद्र का कहना है बिरानी जमीन में ग्वार व बाजरे की बिजाई की थी वह अब अच्छी तरह से हो जाएगी। कपास व बीटी नरमे की फसल के लिए लिए काफी फायदेमंद साबित होगी। अब ट्यूबवेलों से सिंचाई नही करनी पड़ेगी जिससे डीजल का खर्च बच जाएगा।