सिरसा। जिले में मंगलवार शाम अचानक मौसम ने करवट ले ली। दिनभर तेज धूप के बाद शाम होते-होते तेज हवाओं के साथ बारिश शुरू हो गई जिससे मौसम में ठंडा हो गया। इसके साथ ही कई क्षेत्रों में ओलावृष्टि भी हुई जिसने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। पहले ही इलाकों में ओलावृष्टि से भारी नुकसान हुआ है।
मंडी डिंग, रानियां, डबवाली और रोड़ी क्षेत्र में गिरे ओलों से गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचा है। दिन के समय अधिकतम तापमान करीब 31 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था, लेकिन बारिश और ओलावृष्टि के बाद इसमें लगभग तीन डिग्री की गिरावट आई। सुबह से शाम चार बजे तक तेज धूप रहने के कारण लोगों को गर्मी का सामना करना पड़ा, लेकिन मौसम बदलते ही ठंड का अहसास होने लगा। किसानों का कहना है कि ओलावृष्टि गेहूं की फसल के लिए सबसे ज्यादा नुकसानदायक होती है, क्योंकि इससे बालियां झड़ जाती हैं और उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है। इससे पहले रविवार को भी जिले के कई ग्रामीण इलाकों में ओलावृष्टि से भारी नुकसान हुआ था। मौसम विभाग के मुताबिक एक अप्रैल तक मौसम परिवर्तनशील बना रहेगा। इस दौरान आसमान में बादल छाए रहने, तेज हवाएं चलने और बारिश की संभावना जताई गई है।
रोड़ी के मत्तड़ में 10 मिनट की ओलावृष्टि ने बिछाई सफेद चादर
रोड़ी के गांव मत्तड़ में मंगलवार शाम करीब 6 बजे आए तेज आंधी और बारिश के साथ हुई ओलावृष्टि हुई। महज 10 मिनट तक चली ओलावृष्टि इतनी तेज थी कि गांव की गलियों और सड़कों पर सफेद चादर बिछ गई। ग्रामीणों के अनुसार, ओलों की मार इतनी तेज थी कि कुछ ही मिनटों में जमीन पूरी तरह से ओलों से ढक गई । किसानों ने कहा कि गेहूं की फसल लगभग पककर तैयार थी और कटाई के लिए कुछ ही दिन शेष थे। ऐसे समय में लगातार दो-तीन दिनों से चल रही धूलभरी आंधी और तेज बारिश ने पहले ही फसल को कमजोर कर दिया था, जबकि मंगलवार की ओलावृष्टि ने नुकसान को और बढ़ा दिया। किसानों का अनुमान है कि 50 प्रतिशत तक गेहूं को नुकसान हुआ है।
ओलावृष्टि ने हमारी मेहनत पर पानी फेर दिया। गेहूं की फसल पूरी तरह तैयार खड़ी थी, लेकिन तेज ओलों ने बालियां तोड़ दी है। पिछले कुछ दिनों से मौसम खराब चल रहा था। इसलिए ओलों का डर पहले से सता रहा था।
- युवा किसान गुरसेवक सिंह, मत्तड़।
हमने पूरे साल मेहनत करके फसल तैयार की थी, लेकिन 10 मिनट की ओलावृष्टि ने सब बर्बाद कर दिया। खेतों में पानी और ओलों की परत जम गई, जिससे फसल जमीन पर गिर गई। अब कटाई में भी दिक्कत आएगी। सरकार से उम्मीद है कि जल्द सर्वे कर उचित मुआवजा दिया जाए।
-युवा किसान गुरप्रीत सिंह, मत्तड़।
दो-तीन दिनों से आंधी और बारिश ने पहले ही फसल को कमजोर कर दिया था। मंगलवार को हुई ओलावृष्टि ने हालात और बिगाड़ दिए। करीब आधी फसल खराब हो चुकी है। इस बार अच्छी पैदावार की उम्मीद थी, लेकिन अब घाटा ही नजर आ रहा है। प्रशासन को तुरंत कदम उठाने चाहिए।
-किसान गुरविंदर सिंह, मत्तड़।
ओलावृष्टि इतनी तेज थी कि कुछ देर में खेत सफेद नजर आने लगे। मेरी 15 एकड़ गेहूं की फसल थी। गेहूं की बालियां टूटकर जमीन पर गिर गईं, जिससे भारी नुकसान हुआ है। परिवार की पूरी उम्मीद इसी फसल पर टिकी थी। अगर सरकार से समय पर सहायता नहीं मिली, तो आर्थिक संकट से उबरना मुश्किल हो जाएगा।
- किसान बब्बू सिंह, मत्तड़।
डिंग मंडी में बारिश के साथ हल्की ओलावृष्टि, गेहूं की फसल गिरी
डिंग मंडी क्षेत्र में मंगलवार शाम पांच बजे के आसपास मौसम ने बदला हुआ है। बारिश के साथ हल्की ओलावृष्टि हुई। करीब दो मिनट तक ओले गिरने से किसानों में चिंता का माहौल बन गया। किसान हनुमान बुगालिया ने बताया कि करीब दो मिनट तक ओले गिरे थे, फिलहाल ज्यादा नुकसान का अंदाजा नहीं है। धूप निकलने के बाद ही सरसों की फसल में वास्तविक नुकसान का पता चल पाएगा। वहीं, गेहूं की फसल बिछ गई है। दो दिन पहले भी बरूवाली प्रथम में ओलावृष्टि से गेहूं की फसल को बड़े स्तर पर नुकसान हुआ था।
तेज अंधड़ से खेतों में टूटे वृक्ष, गिरे ओले
रानियां क्षेत्र में शाम के समय मौसम में बदलाव हुआ। करीब एक दर्जन गांवों में बरसात के साथ ओलावृष्टि हुई। इस दौरान क्षेत्र में तेज आंधी से खेतों में बड़ी संख्या में वृक्षों के टूटने और ओलावृष्टि से सरसों व गेहूं फसलों को नुकसान हुआ है। किसानों ने बताया कि गांव खारियां, भुन्ना, चक्कां, घोड़ांवाली, गिंदड़ां, खाजा खेड़ा, मेहना खेड़ा, कुस्सर, सादेवाला, केहरवाला, ढुडियांवाली सहित अन्य गांव में तेज आंधी के साथ करीब 15 से 20 एमएम बरसात हुई है। जिससे गेहूं व जो की फसल जमीन पर बिछ गई और तेज ओलावृष्टि के कारण सरसों और गेहूं की फसल में नुकसान भी हुआ है।