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सिरसा: सीडीएलयू में पुनर्मूल्यांकन के बहाने बढ़वाते थे विद्यार्थियों के नंबर, पकड़ में आया मामला

Fri, 04 Mar 2022 02:45 AM IST
भूपेंद्र सिंह भूपेंद्र पंवार, संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा (हरियाणा)

सार

तीन विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिका से पेज गायब मिले। वीसी ने मामले में जांच के आदेश दिए हैं।  विद्यार्थियों की भी यूएमसी बनाई गई है। शुरुआती जांच के बाद दो कर्मचारियों का तबादला भी किया गया है।
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सीडीएलयू - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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हरियाणा के सिरसा में चौधरी देवीलाल यूनिवर्सिटी में एक ऐसे रैकेट का खुलासा हुआ है जो विद्यार्थियों से सेटिंग कर परीक्षा में नंबर बढ़वाता है। मामला सामने आने के बाद वीसी ने तुरंत प्रभाव से जांच के आदेश दिए। शुरुआती जांच में दो कर्मचारी संलिप्त पाए गए हैं। जांच पूरी होने तक दोनों कर्मचारियों का दूसरी ब्रांच में तबादला कर दिया गया है। साथ ही विद्यार्थियों की भी यूएमसी बना दी।

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पिछले वर्ष सीडीएलयू की परीक्षाएं हुईं। परीक्षा होने के बाद रिजल्ट भी आ गया, लेकिन रिजल्ट में तीन विद्यार्थी फेल हो गए। ऐसे में विद्यार्थियों ने पास होने के लिए सीडीएलयू के कर्मचारियों से सांठगांठ की। सीडीएलयू में ऐसे रैकेट का संचालन हो रहा है जो परीक्षार्थियों से सांठगांठ कर गुपचुप तरीके से नंबर बढ़ाकर पास करवा देता है। ऐसा ही इस बार भी हुआ, लेकिन इस रैकेट का भंडाफोड़ हो गया।

क्योंकि वीसी ने अलग-अलग ब्रांचों में अपने विश्वासपात्र कर्मचारियों को इस काम पर लगा रखा था ताकि ऐसे गलत काम करने वालों को रंगे हाथों पकड़ा जा सके। वीसी के संज्ञान में मामला आते ही उन्होंने जांच के आदेश दिए हैं। शुरुआती जांच में दो कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध नजर आई है। जांच पूरी होने तक दोनों कर्मचारियों का दूसरी ब्रांच में तबादला कर दिया है और अंतिम रिपोर्ट आने के बाद एक्शन भी होगा।
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ऐसे किया रैकेट ने काम, ऐसे आया पकड़ में
उत्तर पुस्तिका में करीब 36 पेज होते हैं। जब विद्यार्थी उत्तर पुस्तिका जमा करवाता है तो देखा जाता है कि विद्यार्थी ने कौन से पेज तक लिखा है। उदाहरण के तौर पर यदि 24 नंबर पेज तक लिखा है तो यहां सीडीएलयू की मोहर लगा दी जाती है, ताकि स्पष्ट हो जाए कि यहां से आगे विद्यार्थी ने कुछ नहीं लिखा। इसी के जरिये रैकेट ने काम किया।

परीक्षा परिणाम में फेल हुई शहर के ही एक कॉलेज की तीन छात्राओं ने नंबर बढ़वाने के लिए रैकेट से संपर्क किया। सूत्र बताते हैं कि इसके बाद तीनों छात्राओं ने रि-वैल्यूएशन का फार्म भर दिया। यहीं से खेल शुरू हुआ। दोबारा जांचने के लिए कॉपी सीक्रेसी से बाहर आई तो कर्मचारियों ने उत्तर पुस्तिका में विद्यार्थी की ओर से लिखे गए आखिरी पेज को फाड़ दिया जिस पर मोहर लगी होती है कि यहां से आगे नहीं लिखा गया है।

इसके बाद विद्यार्थियों से नये प्रश्न लिखवा दिए गए और सीडीएलयू की मोहर भी नकली बनवाकर लगा दी। जब ये उत्तर पुस्तिका जांचने के लिए प्राध्यापक के पास पहुंची तो उन्होंने गड़बड़झाला तुरंत पकड़ लिया। क्योंकि वीसी प्रो. अजमेर सिंह मलिक ने पहले ही सभी को कह रखा था कि कोई भी संदिग्ध मामला सामने आए तो जरूर संज्ञान लें। ताकि ऐसे रैकेट पर कार्रवाई की जा सके।

रंग लाए वीसी के प्रयास, अब पकड़ में आने लगे रैकेट
प्रो. अजमेर सिंह मलिक ने कुलपति पद ग्रहण करते ही दावा किया था कि परीक्षा व्यवस्था को सुधारना मकसद है। इसलिए उन्होंने फीडबैक लेना शुरू किया और अलग-अलग जगह अपने विश्वासपात्र कर्मचारियों-अधिकारियों को कहा कि मदद करें। ताकि ऐसे रैकेट को पकड़ कर कार्रवाई कर सकें। इसी का परिणाम है कि अब लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों की भूमिका सामने आने लगी है।

मामला सामने आया है, जांच के आदेश दे दिए हैं : वीसी

मुझे पता चला था कि ऐसा रैकेट काम कर रहा है। इसलिए मैंने विश्वासपात्र प्राध्यापकों और कर्मचारियों को इस काम पर लगाया था कि ऐसे रैकेट का पता करें। ताकि कार्रवाई की जा सके। इसी का परिणाम है कि ऐसा गोलमाल सामने आया है। मामले की जांच के आदेश दिए हैं। शुरुआती जांच के बाद दो कर्मचारियों की संदिग्ध भूमिका मिली है, इसलिए उन्हें दूसरी ब्रांच में भेज दिया है। फाइनल रिपोर्ट आने के बाद एक्शन लेंगे। छात्राओं के करिअर और भविष्य को ध्यान में रखते हुए ज्यादा कड़ा एक्शन लेने के बजाय यूएमसी बना दी गई है। - प्रो. अजमेर सिंह मलिक, वीसी, सीडीएलयू, सिरसा।

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