सिरसा। डेरा सच्चा सौदा और उसकी कॉलोनियों को विशेष रूप से पेयजल सुविधा के लिए सिरसा मेजर नहर से नहरी मोघा खोलने के विरोध में आठ गांवों के ग्रामीण पिछले चार माह से विरोध कर रहे हैं। वहीं सोमवार को सिरसा मेजर नहर से मोघे का काम शुरू करने के लिए ठेकेदार अपना काम शुरू करने के लिए पहुंचा। ठेकेदार के काम शुरू करने की सूचना मिलते ही ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और विरोध जता दिया। ऐसे में ठेकेदार को बिना काम शुरू किए हुए ही लौटना पड़ा।
ग्रामीणों ने विरोध करते हुए कहा कि कहा कि मोघा किसी हालात में लगने नहीं दिया जाएगा। इसके लिए सरकार के साथ आरपार की लड़ाई किसान लड़ेंगे। किसान संघर्ष समिति के प्रधान गुरदित्ता सिंह ने बताया कि सोमवार को जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के आदेशों पर सिरसा मेजर नहर से मंजूर किए गए मोघा नंबर 145100 एल के लिए जेसीबी लेकर पाइप लाइन दबाने के लिए पहुंचे ठेकेदार पहुंच गया। जैसे ही ग्रामीणों ने ठेकेदार को देखा तो उन्होंने उसे काम करने से रोक दिया। कई देर तक अधिकारियों से बातचीत करने के बाद दोपहर बाद ठेकेदार अपनी जेसीबी और कर्मचारी लेकर लौट गया। इस मौके पर रणजीत सिंह बराड़ बाजेकां, रामकुमार राड फूलकां, जगदीश खीचड़ फूलकां, भजनलाल बाजेकां, देवीलाल चोयल अलीमोहम्मद, रामकिशन फौजी वेदवाला, मा. रामचंद्र बाजेकां, देवीलाल भुकर, मनोज भुकर बाजेकां आदि मौजूद रहे।
पानी दिए जाने वाले एरिया की आबादी का अनुमानित आंकड़ा -
शाह सतनामपुर, उपकार कॉलोनी व अन्य कॉलोनियों में कुल मकान 5000 अनुमानित
शाह सतनामपुर और उपकार कॉलोनी में कुल आबादी - 13000 अनुमानित
डेरा सच्चा सौदा में रहने वाले नियमित लोग 1500 सेवादार
चार माह से किसानों का धरना है जारी
डेरा सच्चा सौदा और उसकी कॉलोनियों को पानी देने को लेकर विशेष मोघा दिए जाने का ग्रामीण चार माह से विरोध जता रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार डेरा व उसकी कॉलोनियों को पहले ही पानी दिया जा रहा है। ऐसे में अलग से मोघा दिया जाता है, तो ग्रामीणों को फसलों के लिए पूरा पानी नहीं मिल पाएगा। जिससे उनकी फसल खराब हो जाएगी और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
यह बनाई गई थी कमेटी
जिला उपायुक्त की ओर से 28 फरवरी को 8 सदस्यों की कमेटी का गठन किया गया था। जिसमें किसान रामकिशन फौजी, सरपंच राजेंद्र, मास्टर रामचंद्र व स्वर्ण सिंह विर्क, एसडीएम राजेंद्र सिंह, डीएसपी जगत सिंह, सिंचाई विभाग और जनस्वास्थ्य विभाग के एक्सईएन को शामिल किया गया था। इस कमेटी को 15 दिन के अंदर अपनी जांच रिपोर्ट उपायुक्त को सौंपनी थी। प्रधान ने कहा कि रिपोर्ट में क्या कहां गया है और क्या नहीं कहां गया। इसके बारे कुछ नहीं बताया गया है। प्रशासन को किसानों के साथ मिलकर रिपोर्ट बनानी थी। परंतु आज तक कोई अधिकारी रिपोर्ट बनाने के लिए उनके पास नहीं आया।