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Sirsa News: संस्कृति और जीवन मूल्यों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से कार्यक्रम

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कार्यक्रम के दौरान संस्कृत के बारे में ज्ञान देते हुए संस्कृत शिक्षक सूर्य प्रकाश शास्त्री।
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चोपटा। संस्कृत भाषा, भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से गांव कुम्हारिया की महारानी सती दादी गोशाला में संस्कृत सप्ताह के अंतर्गत विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर श्रीमद्भागवत गीता के बारहवें अध्याय का सामूहिक पाठ हुआ और गीता के जीवन में महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई।
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कार्यक्रम संस्कृत भारती संस्था के जनपद सह-शिक्षण प्रमुख सूर्य प्रकाश शास्त्री के निर्देशन में संपन्न हुआ। यहां मुख्य अतिथि के रूप में गोभक्त रामतीर्थ शर्मा और उनके सहयोगी बलराम शास्त्री रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ रामतीर्थ शर्मा के वैदिक मंत्रोच्चारण से हुआ। इसके बाद बलराम शास्त्री ने देशभक्ति गीत प्रस्तुत किए। इस दौरान उपस्थित लोगों को अध्यात्म और देशप्रेम की भावना से भर दिया।

रामतीर्थ शर्मा ने कहा कि संस्कृत हमारी संस्कृति की आत्मा है और संस्कारों का आधार भी। उन्होंने बच्चों को माता-पिता और गुरुजनों का सम्मान करने तथा उनके बताए मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
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बलराम शास्त्री ने भी बच्चों को अच्छी संगति के महत्व के बारे में बताया और नशे व अन्य बुराइयों से दूर रहने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता और खुशहाली के लिए अच्छे विचार और सकारात्मक सोच जरूरी है। संस्कृत शिक्षक सूर्य प्रकाश शास्त्री ने बताया कि कुम्हारिया गांव के दो लोग संस्कृत में उच्च शिक्षा लेकर आज संस्कृत शिक्षक के रूप में गांव और अपने परिवार का नाम रोशन कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी समझाया कि संस्कृत पढ़ने से न केवल संस्कृत शिक्षक, योगा शिक्षक या आयुर्वेद विशेषज्ञ बना जा सकता है, बल्कि वैज्ञानिक, आईएएस, आईपीएस, आर्मी और पुलिस अधिकारी जैसे पद भी हासिल किए जा सकते हैं।
कार्यक्रम में गोशाला प्रधान पृथ्वीराज बेनीवाल, गो सेवक प्रहलाद डारा, जगदीश बेनीवाल, राजेश बेनीवाल, बिल्लू भगत, संदीप, सूरजभान, अमर सिंह बेरड़ सहित गांव के अनेक गणमान्य व्यक्ति, माताएं-बहनें और नन्हे-मुन्ने बच्चे मौजूद थे।
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