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Sirsa News: सिरसा में कॉलोनियों को नियमित करने की प्रक्रिया बनी आमजन के लिए परेशानी

Sat, 01 Aug 2026 10:54 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
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सिरसा। शहर की कॉलोनियों को नियमित करने की प्रक्रिया आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। नगर परिषद क्षेत्र में कई कॉलोनियां कागजों में वैध घोषित हो चुकी हैं। परंतु उनका पूरा क्षेत्र अब भी वैध नहीं माना गया है। नतीजतन, एक ही कॉलोनी का कुछ हिस्सा वैध है तो कुछ अवैध श्रेणी में दर्ज है।
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इस स्थिति के कारण संपत्ति मालिकों को सबसे अधिक दिक्कत झेलनी पड़ रही है। नगर परिषद क्षेत्र में करीब सात से आठ ऐसे इलाके हैं, जिनकी स्थिति स्पष्ट नहीं है। इनमें श्मशाबाद पट्टी और चतरगढ़पट्टी जैसे क्षेत्र शामिल हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की ग्रीवेंस में भी यह मामला उठा था। इसके बाद चतरगढ़पट्टी क्षेत्र की मैपिंग की गई और आंकड़े जमा किए गए।
पूर्व में सरकार ने नगर परिषद की 25 कॉलोनियां वैध की थीं। मगर, इनमें कुछ कॉलोनियों के केवल तीन से चार किला नंबर ही वैध हुए थे। प्रचार-प्रसार में कॉलोनी का नाम वैध श्रेणी में आ गया, जिससे आमजन कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। हाल ही में सात से आठ क्षेत्रों की विस्तृत रिपोर्ट शहरी स्थानीय निकाय विभाग के मुख्यालय को भेजी गई है। अंतिम निर्णय मुख्यालय स्तर पर लिया जाएगा।
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वर्षों पुरानी कॉलोनियों के रिकॉर्ड को लेकर सबसे बड़ी समस्या सामने आ रही है। कई कॉलोनियों की स्वीकृति से जुड़े दस्तावेज नगर परिषद के रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं हैं। समय के साथ पुराने अभिलेख गायब हो गए या सुरक्षित नहीं रखे जा सके। लोग नामांतरण, नक्शा पास कराने या भवन निर्माण अनुमति के लिए आवेदन करते हैं। संबंधित रिकॉर्ड न मिलने से उनकी फाइलें अटक जाती हैं। नागरिकों को नगर परिषद कार्यालय और तहसील के बीच बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
वर्ष 2004 से पहले का रिकॉर्ड नहीं
एक विभाग दूसरे विभाग से दस्तावेज लाने को कहता है जबकि दूसरे के पास भी पूरा रिकॉर्ड नहीं है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2004 से पहले के शहर की वैध कॉलोनियों का कोई रिकॉर्ड नहीं रखा गया। ऐसे में किला नंबर और खसरा नंबर अधिकारियों के पास उपलब्ध नहीं हैं। इस कारण तहसील में लोगों की रजिस्ट्री अटक रही हैं। उन्हें नगर परिषद की एनओसी या पत्र लाने के निर्देश मिलते हैं। रिकॉर्ड नहीं होने पर नगर परिषद उन्हें पत्र जारी नहीं करती, जिससे आम आदमी परेशान रहता है।
संकलित रिकॉर्ड और डिजिटलीकरण
अधिकारियों के अनुसार, जिन कॉलोनियों की स्थिति स्पष्ट नहीं है, उनका संकलित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। पुराने राजस्व अभिलेखों, नक्शों और अन्य दस्तावेज के आधार पर तथ्य जुटाए जा रहे हैं। इसके बाद विस्तृत रिपोर्ट विभागीय मुख्यालय को भेजी गई है। यह रिपोर्ट नियमानुसार अंतिम निर्णय लेने के लिए है। पूर्व की खामियों से सबक लेते हुए अब रिकॉर्ड को पूरी तरह डिजिटल किया गया है। इससे आमजन को भविष्य में कोई दिक्कत नहीं आएगी। सरकारी मांग के अनुरूप रिपोर्ट नियमित रूप से भेजी जा रही है।

पूर्व में 25 कॉलोनियां वैध हुए थे। उनका कुछ हिस्सा वैध नहीं दर्शाया गया था। इसके अलावा भी शहर के कुछ पॉकेट रहे गए थे। मुख्यालय से उन संबंध में जानकारी मांगी गई थी जो रिपोर्ट बनाकर भेज दी गई है। इस संबंध में निर्णय मुख्यालय स्तर पर होना है।
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-राहुल कुमार, जेई, नगर परिषद
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