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Sirsa News: महाविद्यालय की कक्षा में कुत्ते फरमा रहे रहे, कबूतर कर रहे गुटरगूं

Thu, 19 Feb 2026 11:39 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
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राजकीय नेशनल महाविद्यालयराजकीय नेशनल महाविद्यालय परिसर में प्राचार्य कक्ष के पास आराम फरमा रहे
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शहर का राजकीय नेशनल महाविद्यालय बदहाल, वाटर कूलर के ढक्कन खुले, छतों के प्लास्टर उखड़े
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ग्राउंड रिपोर्ट
फोटो : 4 से 12
- महाविद्यालय परिसर में फैला पड़ा है कचरा, वाटर कूलर के खुले पड़े ढक्कन
-परिसर में खुले पड़े बिजली के तार, खेल स्टेडियम के हालात भी बदहाल
-महाविद्यालय के खस्ताहाल देख कर विद्यार्थियों का मोह हो रहा भंग
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। शहर का राजकीय नेशनल महाविद्यालय बदहाल है। शिक्षा के घर में कुत्तों और कबूतरों का बसेरा है। वहीं, विद्यार्थियों के लिए पानी, शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी है। महाविद्यालय के विज्ञान संकाय विभाग में कमरों की छतों से प्लास्टर उखड़ कर गिर रहे हैं। बिजली के खुले पड़े तार विद्यार्थियों के लिए खतरा बने हुए हैं। पीने के पानी के लिए लगाए गए वाटर कूलरों के ढक्कन खुले पड़े हैं।
वीरवार को संवाददाता ने शहर के राजकीय नेशनल महाविद्यालय का निरीक्षण किया। महाविद्यालय में प्रवेश कर विज्ञान संकाय में पहुंचने पर महाविद्यालय की सुंदरता पर ग्रहण लगा रही बदहाली की तस्वीर साफ हो जाती है। परिसर में कूड़े-कचरे के ढेर लगे थे। विज्ञान विभाग से लेकर प्राचार्य कार्यालय तक कुत्तों व कबूतरों का डेरा दिखा। कक्षाओं के बाहर कुत्ते आराम फरमाते मिले। पीने के पानी के लिए लगाए गए वाटर कूलर बंद पड़े हैं। जो वाटर कूलर चालू हैं, उनमें ढक्कन नहीं है।
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खेल परिसर भी खस्ताहाल हैं। ओपन जिम का सामान सहित स्टेडियम की चहारदीवारी टूटी हुई है। स्टेडियम की सुंदरता बढ़ाने के लिए लगाई गई हरी घास गायब है। पूरे खेल परिसर में जगह-जगह कचरा फैला हुआ है। पुस्तकालय के पास खंडहर पड़े शौचालयों को पत्थर लगा कर पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। पुस्तकालय के अंदर बने शौचालयों में सफाई व्यवस्था चरमराई हुई है।
इस दौरान संवाददाता ने महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं से बातचीत की। उन्होंने बताया कि लंबे समय से महाविद्यालय का बुरा हाल है। किसी समय में यहां दाखिला लेने के लिए विद्यार्थियों को मेहनत करनी पड़ती थी। अब विद्यार्थियों का मन यहां के हालात देख कर टूटता जा रहा है। कुछ विद्यार्थी माहौल को देखते हुए बीच में ही पढ़ाई छोड़कर किसी अन्य जगह दाखिला ले लेते हैं। विद्यार्थियों ने बताया कि कई बार इन मुद्दों को लेकर महाविद्यालय प्रशासन से बात कर चुके हैं लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।

महाविद्यालय में यह है विद्यार्थियों की स्थिति
राजकीय नेशनल महाविद्यालय में किसी समय में 8 हजार विद्यार्थी पढ़ाई करते थे। समय के साथ विद्यार्थियों की संख्या कम हो रही है। फिलहाल, महाविद्यालय में 2872 विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। इसमें से 1602 लड़के व 1270 लड़कियां हैं। लेकिन छात्र-छात्राएं मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।
सात कर्मचारी संभाल रहे महाविद्यालय की सफाई व्यवस्था
राजकीय नेशनल महाविद्यालय में फिलहाल सात कर्मचारी सफाई व्यवस्था संभाले हुए हैं। इसमें से छह कर्मचारी एचकेआरएन व एक कर्मचारी डीसी रेट के तहत लगा हुआ है। लेकिन इसके बावजूद भी महाविद्यालय की सफाई व्यवस्था का बुरा हाल है। सबसे ज्यादा बुरा हाल विज्ञान संकाय का है। जहां जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हुए हैं।

फोटो : 13
महाविद्यालय में पीने के पानी की समस्या है। वाटर कूलर का ढक्कन खुला पड़ा है। अब खुले पड़े वाटर कूलर में कुछ कीट-पतंग पड़ जाएं तो दूषित पानी कैसे पीएं। महाविद्यालय प्रशासन को कुछ सोचना चाहिए। विद्यार्थियों के लिए मूलभूत सुविधाएं तो होनी चाहिए ताकि पढ़ाई का वातावरण बन सके।
-जसनदीप सिंह, बीए फाइनल वर्ष छात्र।
फोटो : 17
महाविद्यालय में कूड़ा-कचरा फैला हुआ है। खेल परिसर के हालात बुरे हैं। वाटर कूलर के ढक्कन खुले पड़े हैं। शौचालयों का बुरा हाल है। महाविद्यालय के गलियारों में कुत्तों व कबूतरों ने घर बना रखे हैं। प्रशासन को समस्या का समाधान करना चाहिए ताकि पढ़ाई का माहौल बन सके।
-नरेंद्र सिंह, बीए फाइनल वर्ष छात्र।
फोटो : 14
पूरे विज्ञान संकाय विभाग में कचरा पड़ा हुआ है। छतों से प्लास्टर उखड़ कर गिर रहा है। पीने के लिए दूषित पानी है। बिजली के तार खुले पड़े हुए हैं। किसी भी समय करंट लगने से हादसा हो सकता है। कबूतरों व कुत्तों ने घर बनाया हुआ है।
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-हर्षदीप सिंह, बीएससी प्रथम वर्ष छात्र।
वर्सन :
महाविद्यालय में सात कर्मचारी सफाई व्यवस्था को देख रहे हैं। विज्ञान संकाय विभाग में सफाई करवा कर जल्दी ही कचरे की उठान करवा दी जाएगी। कुत्तों को पकड़ने के लिए नगर परिषद को पत्र लिख चुके हैं। शौचालय निर्माण व बिजली के तारों का समाधान करने के लिए एस्टीमेट बना कर भेजा जा चुका है। बिजली के तार खुले होने के कारण कबूतरों ने वहां घर बना लिए हैं। अब कबूतर सफाई व्यवस्था को भी खराब कर रहे हैं। पीने के पानी के लिए वाटर कूलर को जल्दी ही ठीक करवा दिया जाएगा।
-डॉ. अनीता मड़िया कार्यकारी प्राचार्य।
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