तीन कृषि कानूनों के विरोध में किसानों की 26 नवंबर को दिल्ली कूच करने की घोषणा के चलते सोमवार रात पुलिस ने सिरसा व खुईयां मलकाना टोल प्लाजा से कुल चार किसान नेताओं को शांति भंग करने के आरोप में हिरासत में ले लिया। पुलिस ने रात को ही चारों किसान नेताओं को कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने उन्हें एक दिसंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। दोनों जगहों पर रात 11 बजे के बाद कार्रवाई की गई और किसानों ने पुलिस की कार्रवाई का विरोध किया। वहीं मंगलवार को सिरसा में किसान नेताओं ने बाबा भूमणशाह चौक पर पुतला फूंका और खुईयां मलकाना टोल प्लाजा पर जाम लगा दिया।
जानकारी के अनुसार सिरसा के शहीद भगत सिंह स्टेडियम में चल रहे किसानों के पक्का मोर्चा धरने से हुडा चौकी पुलिस ने रात 11 बजे किसान नेता प्रह्लाद सिंह भारूखेड़ा को उठा लिया। भारूखेड़ा को पुलिस ने शांति भंग करने के मामले में गिरफ्तार किया। वहीं दूसरी ओर पुलिस ने गांव खुईयां मलकाना में टोल प्लाजा के निकट धरने पर बैठे तीन किसान नेताओं को हिरासत में ले लिया। इस दौरान किसानों व पुलिस के बीच काफी देर तक हंगामा भी हुआ। किसान नेताओं को हिरासत में लिए जाने के बाद गुस्साए किसान धरना छोड़कर हाईवे के बीचों-बीच बैठ गए और रोड जाम कर दिया। किसानों ने डबवाली पुलिस पर धक्काशाही का आरोप लगाते हुए सिटी एसएचओ को बर्खास्त करने की मांग की है। उधर किसान नेता गुरदास सिंह लक्कड़ांवाली के घर भी दबिश दी लेकिन पुलिस को वहां से खाली हाथ लौटना पड़ा।
आधी रात को तीन गाड़ियों में पहुंची पुलिस
खुईयां मलकाना टोल प्लाजा के निकट धरने पर बैठे किसान धरने पर बैठे हुए थे। खुईयां टोल प्लाजा पर सोमवार रात्रि करीब साढ़े 11 बजे पुलिस तीन गाड़ियों में पहुंची। पुलिस ने इस कार्रवाई को योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया था। रात्रि के समय धरने पर 20-25 किसान ही मौजूद थे। किसान नेता एसपी सिंह धरने पर फोन पर बात कर रहे थे, जिसे पुलिस ने धरने से दूर ही हिरासत मेें ले लिया। वहीं हेबूआना निवासी खुशपिंद्र सिंह व देसूजोधा निवासी गुरप्रेम सिंह को टेंट से बाहर बुलाकर हिरासत में लिया गया। इस दौरान शोर मचाए जाने के बाद अन्य किसानों ने पुलिस की इस कार्रवाई का विरोध करते हुए हंगामा किया तथा पुलिस कार्रवाई की वीडियो बनानी शुरू कर दी। पुलिस ने किसानों के मोबाइल छीनने का प्रयास किया। पुलिस तीनों किसान नेताओं को लेकर निकल गई। जिसके बाद किसानों ने फोन कर अन्य किसानों को मौके पर बुला लिया और अलसुबह करीब साढ़े तीन बजे धरनास्थल छोड़कर हाईवे के बीचों-बीच जाम लगा दिया।
अन्य मार्गों से गुजारे वाहन
किसानों द्वारा रोड जाम किए जाने के बाद प्रशासन ने वाहनों को अन्य मार्गों से जैसे-तैसे कर गुजारा। ओढां में कालांवाली टी प्वाइंट पर नाकाबंदी कर सिरसा की तरफ से आने वाले वाहनों को वाया कालांवाली होकर भेजा गया तो वहीं डबवाली की तरफ से आने वाले वाहनों को सांवतखेड़ा से पहले ही वाया मांगेआना से होकर गुजारा गया।
मलकीत सिंह बोले- पुलिस ने हमारे साथ धक्काशाही की
किसान नेता मलकीत सिंह पन्नीवाला मोरिकां ने इस कार्रवाई को पुलिस की सरेआम धक्काशाही बताते हुए निंदा की। उन्होंने कहा कि सरकार ने अपनी नाकामी छुपाने के लिए रात के अंधेरे में पुलिस भेजकर किसानों को हिरासत में ले लिया। लेकिन किसान ऐसी हरकतों से घबराने वाले नहीं है। उन्होंने कहा कि डबवाली सिटी थाना प्रभारी ईश्वर सिंह किसानों के साथ सरेआम बेइंसाफी करने पर उतारू है। किसानों ने उक्त एसएचओ को बर्खास्त करने की मांग की है। किसान नेता ने कहा कि जब उपायुक्त व एसपी ने किसानों को शांतिमय ढंग से प्रदर्शन करने की अनुमति दी थी। रोड जाम कर बैठे किसानों ने कहा कि जब तक तीनों किसान नेताओं को रिहा नहीं किया जाता तब तक वे जाम नहीं हटाएंगे।
लक्कड़ांवाली में किसान नेता के घर दबिश
26 नवंबर के दिल्ली कूच के ऐलान को विफल करने के लिए प्रशासन ने दो दिन पहले ही रणनीति तैयार कर ली। जिसके तहत किसान नेताओं को 23 नवंबर की रात्रि को ही हिरासत में लेना शुरू कर दिया। बडागुढ़ा पुलिस ने गांव लक्कड़ांवाली में किसान नेता गुरदास सिंह के यहां मध्य रात्रि दबिश दी। जिसके बाद स्पीकर के माध्यम से जब मुनादी हुई तो पुलिस को आनन-फानन में वहां से निकलना पड़ा। गुरदास सिंह ने बताया कि बडागुढ़ा थाना प्रभारी पुलिस टीम के साथ रात्रि करीब साढ़े 11 बजे गांव में पहुंचे और उसका गेट खुलवाने की कोशिश की।
किसानों ने पीएम का पुतला फूूंका, तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन
कृषि कानून के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन पुलिस द्वारा किसान नेताओं को जबरदस्ती उठाकर लेने के विरोध में मंगलवार को किसानों ने प्रधानमंत्री का पुतला फूंका और तहसीलदार श्रीनिवास को किसानों की रिहाई की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा। किसान गुरप्रीत सिंह ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि पुलिस प्रशासन द्वारा बिना किसी कारण के क्रांतिकारी सोच के किसानों को हिरासत में लिया जा रहा है ताकि दिल्ली जाने से किसान संगठनों को रोक जा सके। प्रशासन बिना किसी कारण के किसान नेताओं के घरों पर छापा मारी कर हिरासत में ले रही है, जबकि किसान नेताओं के ऊपर कोई आरोप तक नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने जिस तरह से किसान नेताओं को उठाया है ऐसा लग रहा है कि वह किसानों के हौसले तोड़ना चाहती है लेकिन ऐसा कभी नहीं होगा। किसानों ने करीब पांच मिनट तक रोड को जाम कर पुतला फूंका और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। जिसके बाद किसानों ने बीते सोमवार को धरना स्थल से पुलिस प्रशासन द्वारा हिरासत में लिए गए किसानों की रिहाई की मांग के लिए तहसीलदार श्रीनिवास को मांग पत्र सौंपा।
एसपी ने अधिकारियों के साथ की बैठक
किसान आंदोलन को लेकर जल्द ही किसानों को रोकने के लिए 26 नवंबर को जिले में कई जगहों पर नाकाबंदी की जा सकती है। ताकि किसान जिले से बाहर न निकल सकें। इसी रणनीति के तहत एसपी भूपेंद्र सिंह ने अपने कार्यालय में जिले के सभी थाना प्रभारियों व डीएसपी की मीटिंग ली। एसपी ने 26 नवंबर को हड़ताल व किसानों के दिल्ली कूच करने को लेकर कानून व्यवस्था बनाए रखने के आदेश दिए। साथ ही शरारती तत्वों से सख्ती से निपटने की बात कही।
पंजाब से लगती सीमाएं सील
एसपी सिरसा, भूपेंद्र सिंह ने बताया कि सिरसा पुलिस ने देर शाम को सिरसा की पंजाब के मानसा, बठिंडा और श्री मुक्तसर साहिब जिले से लगती सीमाओं को सील कर दिया है। एसपी भूपेंद्र सिंह ने बताया कि पंजाब से लगती सीमाएं सील कर दी गई है। थाना प्रभारियों को कानून व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। किसी को भी कानून व्यवस्था भंग करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
कोट्स
किसान नेता प्रहलाद सिंह भारूखेड़ा को शांति भंग करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। अदालत ने उन्हें एक दिसंबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा है।
-प्रदीप कुमार, हुडा चौकी इंचार्ज, सिरसा।
किसान नेताओं को हिरासत में लेने के विरोध में रोड जाम कर बैठे किसान।- फोटो : Sirsa