शर्त थी कि लाभ पात्र महात्मा गांधी ग्रामीण बस्ती योजना के तहत मिले 100 गज के प्लॉट पर पांच साल के भीतर मकान बनाएंगे? अन्यथा संबंधित जमीन को पंचायत अपने कब्जे में ले लेगी।
अब तो सात साल बीत चुके हैं। अधिकारियों की लाल फीताशाही के चलते पात्र पीड़ित बन गए हैं। सवाल उठता है कि अधिकारियों की वजह से शर्त पूरी न करने वाले पीड़ितों को मकान बनाने का अधिकार मिलेगा या नहीं? वीरवार को लगातार दूसरे दिन पीड़ितों ने बीडीपीओ कार्यालय का घेराव कर नारेबाजी की।
सुबह करीब दस बजे गांव डबवाली के पीड़ित परिवार बीडीपीओ कार्यालय में पहुंचे। पीड़ितों ने हरियाणा सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। अधिकारियों को भ्रष्ट करार देते हुए जबरदस्त प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारी कार्यालय को जाते मार्ग के बीचो-बीच बैठ गए। शाम पांच बजे तक धरना जारी रहा। धरनारत जीतो ने बताया कि 22 जनवरी 2009 को उसे प्रमाण पत्र जारी हुआ था।
जिसमें यह शर्त साफ लिखी हुई है कि पांच साल के भीतर मकान बनाना अनिवार्य है। निहाल सिंह ने अपनी रजिस्टरी के कागजात दिखाते हुए कहा कि रजिस्टरी में बिंदु नं. 2 पर स्पष्ट रूप से लिखा है कि प्लाट का कब्जा दिला दिया गया है।
इससे स्पष्ट होता है कि इतने वर्षों तक अधिकारी उन्हें अंधेरे में रखते रहे। अधिकारियों ने उन्हें प्लाटों का कब्जा न दिलाने के साथ-साथ कानून की भी जमकर धज्जियां उड़ाईं।
अखिल भारतीय खेत मजदूर यूनियन के मनदीप सिंह, संत राम ने बताया कि गरीबों की भूमि पर दबंगों का कब्जा है। कुछ लोगों ने गेहूं की बिजाई कर रखी है।
सवाल खड़ा करते हुए मजदूर नेताओं ने कहा कि जब कानून पांच वर्ष में मकान बनाने के लिए पाबंद करता है, तो पीड़ितों को कब्जा क्यों नहीं दिलाया गया? मजदूर नेताओं ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की।
हरियाणा पंचायती राज विभाग ने महात्मा गांधी ग्रामीण बस्ती योजना के तहत विवादों के निपटारे के लिए सभी जिला उपायुक्तों को निर्देश जारी कर रखे हैं। इसके बावजूद निपटारा नहीं किया जा रहा।
इसके पीछे राजनीतिक कारण है? या फिर अधिकारी काम नहीं करना चाहते? यह बात स्पष्ट नहीं हो रही। यूनियन लगातार प्रदर्शन जारी रखेगी।
ग्राम सचिव तथा जेई को मौका पर भेजकर अस्थाई कब्जा हटाया जाएगा। स्थाई कब्जा हटाने के लिए केस बनाकर अदालत का दरवाजा खटखटाया जाएगा।
हां, यह सही है कि पांच साल के भीतर संबंधित व्यक्ति ने मकान का निर्माण करना था। प्लॉट का कब्जा एक बार दिला दिया गया था, तो उसे संभालने की जिम्मेदारी संबंधित व्यक्ति की थी। संबंधित प्लॉटों की रजिस्टरी 2011 में हुई थी। इसलिए कानून आड़े नहीं आएगा।
-सतिंद्र सिवाच, बीडीपीओ, डबवाली