वाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। जिले में कई गांवों में कपास की फसल के गुलाबी सुंडी का प्रकोप देखने को मिल रहा है। कुछ क्षेत्र से वीडियो भी कपास अनुसंधान केंद्र को मिले हैं। इन्हीं वीडियो व किसानों से प्राप्त सूचना के आधार पर कपास अनुसंधान केंद्र ने सर्वे का कार्य शुरू किया है। सर्वे के उपरांत ही गुलाबी सुंडी के सही आंकड़े सामने आ पाएंगे।
शनिवार को एसडीओ डबवाली ने अपनी टीम के साथ गांव गोदिका के खेतों में जाकर गुलाबी सुंडी का सर्वे किया।
बता दें कि मौजूदा समय में सिरसा में ग्वार, बाजार, बीटी कपास व देसी कपास का कुल रकबा तीन लाख 62 हजार हैक्टेयर है। इसमें देसी कपास का रकबा 25671 हैक्टेयर व बीटी कपास का रकबा 1 लाख 99 हजार 283 हैक्टेयर है। ग्वार और बाजरे की फसल पर पानी की कमी का असर देखने को मिल रहा है। एक या दो गांवों के सरपंचों ने इस बाबत अधिकारियों से बातचीत की थी। अधिकारियों ने बताया कि क्षेत्र में इस बार बारिश सामान्य से कम हुई है। इसका असर ग्वार व बाजरे की फसल पर देखने को मिल रहा है। सही आंकड़े सर्वे के उपरांत ही सामने आएंगे कि सूखे के कारण कितनी फसल को नुकसान हुआ है।
कृषि वैज्ञानिक किसानों को कर रहे जागरूक
कपास अनुसंधान केंद्र, कृषि विभाग और एचएयू के केवीके के वैज्ञानिक जागरूक कर रहे हैं और गुलाबी सुंडी से बचाव के लिए दवाओं के बारे में बता रहे हैं। कीट पतंगाे के बारे में किसानों को जानकारी दी जा रही है।
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इन एरिया में गुलाबी सुंडी का असर
रानियां क्षेत्र के गांव बचेर, कालुआना, मम्मड़, केहरवाला सहित कई गांवों में जाकर नरमे की फसल में गुलाबी सुंडी का असर देखने को मिल रहा है। खेड़ी के आस पास के एरिया में ग्वार व बाजारे की फसल में पानी की कमी का असर देखने को मिल रहा है।
कोट्स
गुलाबी सुंडी को लेकर कई गांवों से किसानों से सूचना मिल रही है। गांव कालूआना से वीडियो भी जारी हुआ था। ऐसे में गुलाबी सुंडी का सर्वे करने को एडीओ की ड्यूटी लगाई गई है। रिपोर्ट के बाद ही सही गुलाबी सुंडी के सही आंकड़े सामने आएंगे। शनिवार को एसडीओ और उनकी टीम ने गुलाबी सुंडी को लेकर गांवों का सर्वे किया है। - डॉ. जोगिंद्र राणा, तकनीकी सहायक, कंपास अनुसंधान केंद्र