पत्र में लिखा माली का खर्च नहीं निकलता, नगर परिषद में 10 संस्थाओं ने दिया आवेदन
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। शहर में पार्कों को स्वच्छ व सुंदर बनाने के लिए नगर परिषद ने बोली के माध्यम से पार्क दिए थे। इन पार्कों की देखरेख करने के बजाय संस्थाओं ने हाथ खड़े करने शुरू कर दिए हैं। कई संस्थाओं को नगर परिषद से मिले पार्क घाटे का सौदा लगने लगे हैं। इसको लेकर 10 संस्थाओं ने पार्क नगर परिषद को लौटाने के लिए आवेदन पत्र दिए हैं। पत्रों में उन्होंने लिखा कि संस्थाएं माली का खर्च तक नहीं निकाल पा रही हैं।
ऐसे में अब नगर परिषद को अपने स्तर पर तय करना है कि इन संस्थाओं के दिए आवेदनों को स्वीकृत किया जाए या रिजेक्ट किया जाए। साथ ही अधिकारी ये निर्णय भी लेंगे कि इन संस्था को ब्लैक लिस्ट किया जाए या नहीं।
कारण यह कि नगर परिषद ने कमाई के लिए संस्थाओं को पार्क गोद नहीं दिए थे। ये पार्क संस्थाओं ने अपनी मर्जी से पूर्ण सहमति से लिए थे। बोली में छोटे पार्क मिलने पर काम नहीं करना चौंकाने वाला होने वाला है।
बड़े पार्क लेने वाली संस्थाएं भी छोड़ती हैं छोटे पार्क तो होगी कार्रवाई
अधिकारियों ने बताया कि पार्क को लेकर पिक एंड चूज नहीं किया जा सकता है। आप बड़े पार्क अपने पास रखे लेंगे ताकि मालिक व आपके खर्च निकलते रहें और छोटे पार्क लौटा देंगे। ऐसा संभव नहीं है। छोटे पार्क भी उतनी ही अहमियत रखते है जितने बड़े पार्क रखते हैं। सामाजिक संस्थाओं ने अपने शपथ पत्रों में सामाजिक विकास के दायरे में इन पार्कों को रखा है न की कमाई के उद्देश्य से।
बड़े पार्कों के भी बदतर हालात
शहर में संस्थाओं को पार्क दिए हुए एक माह का वक्त गुजर गया है लेकिन कोई खास बदलाव देखने को नहीं मिल रहा है। डीसी जैन पार्क के हालात दिन-ब-दिन खराब होते जा रहे हैं। शौचालय का गंदा पानी बह रहा है। पार्क में गंदगी का आलम है। इतना ही नहीं, नगर परिषद कर्मचारी ही पार्क अंदर कचरा डालते हैं। वहीं, भादरा पार्क के हालात भी बेहतर नहीं हैं। संस्थाओं की ओर से पेड़-पौधों के पक्के और कचरे का निस्तारण करने के बजाय पार्क में जलाया जाता है। वहीं, पार्क में दीवारें जगह-जगह से टूटी पड़ी हैं। इसी प्रकार के हालात शहर के अन्य पार्कों के हैं।
जेजे कॉलोनी चौकी के सामने पार्क में बना दिया गया पार्किंग शेड
नगर परिषद के कारनामे गजब हैं। डी प्लान से नगर परिषद ने जेजे कॉलोनी पुलिस चौकी के सामने बने पार्क में पार्किंग शेड बना दिया है। अधिकारियों ने एनजीटी की गाइडलाइन की परवाह किए बिना डी प्लान के पैसे को पार्किंग में शेड में लगा दिया है। पार्क में कोई पार्किंग शेड बनाया नहीं जा सकता है। इतना ही नहीं, जिस ठेकेदार ने इस पार्किंग शेड को लगाया था, अधिकारियों ने स्वयं पर कार्रवाई के डर से आज तक उस ठेकेदार का 4 लाख 5 हजार रुपये का भुगतान तक जारी नहीं किया है। तत्कालीन अधिकारियों ने बताया कि राजनीतिक दबाव में पार्किंग शेड उन्होंने बना दिया था। यह उनकी मजबूरी थी।
पार्क की देखरेख के ये हैं नियम और खर्च
- पार्क की देखरेख को लेकर 4.40 पैसे प्रति स्क्वॉयर मीटर के हिसाब से पैसा दिया जाता है।
- संस्था स्वयं अपने स्तर पर काम करें या माली रखें। यह संस्था पर निर्भर है।
- पार्क में नये पौधे लगाने व पार्क में ट्री और घास की कटिंग करना संस्था का काम है।
- पार्क की कटिंग की घास और पत्तों को नगर परिषद के कर्मचारी नहीं उठाएंगे। उसके लिए कंपोस्ट पिट संस्था को बनाना होगा।
- पार्क में झाड़ू लगाकर सफाई करने का काम संस्था का होता है। नगर परिषद मरम्मत कार्य करेगा।
कोट्स
कुछ संस्थाओं ने नगर परिषद को लिखित में छोटे पार्क वापस देने को लेकर पत्र दिया है। इन संस्थाओं को बोली पर पार्क दिए थे। अब वापस लेने का निर्णय उच्चाधिकारी करेंगे। पार्क में बचत की जगह खर्च ज्यादा होने पर संस्थाएं पार्क वापस देने का तर्क दे रही हैं। नियमानुसार पार्क वापस लेने के साथ-साथ संस्था को ब्लैक लिस्ट भी किया जा सकता है।
-नरेश कुमार, जेई, नगर परिषद