केंद्र सरकार द्वारा स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत आयुष्मान भारत के कार्ड बनाए जा रहे हैं। इस कार्ड के आधार पर लोगों को मुफ्त में इलाज किया जाता है। जिले में 55 हजार आयुष्मान कार्ड बने हुए हैं बने कार्ड में से 9900 कार्ड रद्द कर दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने मुख्यालय से जानकारी मांगी है कि रद्द होने का कारण क्या है। नोडल अधिकारी डॉ. प्रमोद ने बताया कि अगर उन परिवारों की सूची और कारण का पता चल जाता है तो उनका कार्ड दोबारा अपडेट करवा दिया जाएगा। वहीं सिविल अस्पताल सिरसा में दो मरीजों ने शिकायत दर्ज करवाई है कि निजी अस्पताल में इलाज के दौरान अस्पताल प्रशासन ने उनसे पैसे लिए हैं।
आयुष्मान कार्ड को लेकर स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय चंडीगढ़ से चिकित्सा अधिकारियों ने सिरसा के नोडल ऑफिसर डॉ. प्रमोद के साथ बीते दिन एक वीडियो कांफ्रेंसिंग की गई। वीडियो कान्फ्रेसिंग में बताया गया कि सिरसा जिले में 18 प्रतिशत कार्ड हैं जो रद्द रहे हैं। पूरे प्रदेश में रिजेक्शन की सबसे ज्यादा शिकायतें सिरसा जिले की है। किसी भी आयुष्मान कार्ड के रद्द होने का कारण व्यक्ति का नाम अथवा पता ठीक न होना और वहीं किसी लड़की की अगर शादी हो जाती है तो उसका पता भी बदल जाता है, जिस कारण से आयुष्मान कार्ड अपडेट नहीं हो पाता और मरीज को उसका फायदा नहीं मिलेगा।
सक्षम युवा और आशावर्कर करेंगी लोगों को जागरूक
स्वास्थ्य विभाग के पास अभी तक 35 सक्षम युवा हैं जो जिले में जाकर लोगों को आयुष्मान कार्ड बनाने के बारे में जागरूक कर रहे हैं। वहीं डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. प्रमोद ने बताया कि हमें करीब 100 से ज्यादा सक्षम युवाओं की जरूरत है। जिसको लेकर स्वास्थ्य विभाग ने अधिकारियों को लिखा है कि उन्हें 100 और सक्षम युवाओं की जरूरत है। सभी युवा जिले के गांव में जाकर लोगों को आयुष्मान कार्ड के बारे में जागृत करेंगे। वहीं गांव की आशावर्कर भी लोगों को जागरूक करने में लगी हुई हैं।
अस्पताल ने अगर मांगे पैसे तो मरीज को देने होंगे दोगुने
जिले के गांव लकड़ांवाली के गुरप्रीत ने बताया कि बीते दो माह पहले एक दुर्घटना में उसकी माता के चोट लग गई थी। उन्होंने अपनी माता को शहर के आस्था अस्पताल में भर्ती करवा दिया, जहां पर उससे पहले सात हजार रुपये जमा करवाए गए और उसके बाद उनके आयुष्मान कार्ड से भी पैसे निकलवाए गए। गुरप्रीत ने इसकी शिकायत सिविल अस्पताल में आयुष्मान के नोडल अधिकारी डॉ. प्रमोद को दी। वहीं डबवाली के रहने वाले बलदेव राज ने भी एक शिकायत में बताया कि उसकी माता वीरा देवी के शूगर की बीमारी थी, जिस पर जब उसने अपनी माता को बीती 30 अगस्त 2019 को शहर के आस्था अस्पताल में भर्ती करवाया तो इलाज के बाद उनसे 16 हजार रुपये भी ले लिए और उनके आयुष्मान कार्ड से भी अस्पताल ने पैसे निकलवा लिए। जब महिला के परिजनों को इस बारे में पता लगा तो बलदेव राज ने इसकी शिकायत नोडल अधिकारी को की। नोडल अधिकारी डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. प्रमोद शर्मा ने शुक्रवार को दोनों शिकायतकर्ताओं को अस्पताल में बुलाया। जहां अस्पताल के कर्मचारी बिना रिपोर्ट के पहुंचे। नोडल अधिकारी ने दोनों शिकायतकर्ताओं के साथ अस्पताल प्रशासन को सोमवार को दोबारा बुलाया है। अगर इसमें अस्पताल की गलती पाई जाती है तो अस्पताल प्रशासन ने मरीज से जो पैसे लिए हैं उसके उसे दोगुने पैसे मरीज को देने पड़ेंगे।
हमारे पास अभी कुल 35 सक्षम युवा है और हमने 100 युवाओं की और मांग की है। अगर शिकायत में अस्पताल की कोई गलती होती है तो अस्पताल प्रशासन मरीज को दोगुना पैसे देगा। 18 प्रतिशत कार्ड रद्द हो रहे हैं।
-डॉ. प्रमोद शर्मा, नोडल ऑफिसर आयुष्मान कार्ड।