अगस्त व सितंबर माह में जिले में उखेड़ा और सफेद मक्खी के प्रकोप से कपास व नरमे की फसल खराब हो गई। जिससे नरमा की खेती करने वाले किसानों को 307 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की गई है।
बता दें कि कुछ दिनों पहले उपायुक्त प्रदीप कुमार ने जिला राजस्व अधिकारियों की मीटिंग ली थी। इस मीटिंग में राजस्व विभाग ने नुकसान की अंतिम रिपोर्ट को तैयार करते हुए 1.61 लाख हेक्टेयर में सफेद मक्खी व उखेड़ा रोग का प्रकोप बताया। इस रिपोर्ट के मुताबिक जिले में कपास की फसल को 30 से 70 प्रतिशत तक नुकसान हुआ।
पैदावर 10 से 15 मन प्रति एकड़ रह गई पैदावार
जिले में करीब दो लाख दस हजार हेक्टेयर में कपास व नरमे की खेती की जाती है। अगस्त व सितंबर 2020 में उखेड़ा और सफेद मक्खी के प्रकोप के कारण नरमा व कपास के पौधे सूख गए थे। जब नरमा व कपास की चुगाई की गई तो पैदावार दस से 15 मन प्रति एकड़ ही रह गई। जबकि औसतन 25 से 30 मन प्रति एकड़ उत्पादन होता है।
नुकसान का अंदाजा अलग-अलग
सफेद मक्खी व उखेड़ा रोग के प्रकोप के बाद सरकार ने उपायुक्त को नुकसान का जायजा लेने के लिए कहा था। कृषि वैज्ञानिकों ने भी सिरसा, ऐलनाबाद, चोपटा, ओढां, कालांवाली व डबवाली क्षेत्रों का दौरा किया था। राजस्व व कृषि विभाग ने नुकसान की अलग-अलग रिपोर्ट तैयार की थी। दोनों विभागों की रिपोर्ट में काफी अंतर था। ऐसे में तत्कालीन उपायुक्त रमेश चंद्र बिढान ने दोनों विभागों को दोबारा से रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए थे।
करीब 300 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग को लेकर सरकार को रिपोर्ट तैयार करके भेज दी गई है। यह रिपोर्ट उपायुक्त के माध्यम से हिसार आयुक्त और सरकार के पास जा चुकी है।
-वीरेंद्र भारद्वाज, जिला राजस्व अधिकारी, सिरसा।