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Sirsa News: ''मनोहर'' वादे को नायब ने किया पूरा, गुरुद्वारा प्रबंधन के नाम जमीन करने के फैसले का स्वागत

Fri, 28 Jun 2024 01:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
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संवाद न्यूज एजेंसी
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सिरसा। गुरुद्वारा चिल्ला साहिब की 70 कनाल 7 मरला जमीन गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के नाम करने का कैबिनेट के फैसले का प्रबंधन समिति ने स्वागत किया है। प्रबंधन समिति ने बताया कि यह उनकी पुरानी मांग थी। वर्ष 2019 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने वादा किया था जिसे प्रदेश सरकार की ओर से अब जाकर पूरा किया जा सका है। यह अब तक भूमि रेवेन्यू विभाग के नाम थी।
पांच अगस्त 2019 को अनाजमंडी में गुरु नानक देव जी के प्रकाशोत्सव में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल शामिल हुए थे। इस दौरान गुरुद्वारा चिल्ला साहिब की प्रबंधन कमेटी ने मनोहर लाल को जमीन गुरुद्वारे के नाम करने को लेकर मांगपत्र सौंपा था। तब उन्होंने कहा था कि गुरु नानक देव महाराज ने गुरुद्वारा चिल्ला साहिब में चार महीने 13 दिन बिताए थे। गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी की मांग पर लगभग 70 कनाल नजूर भूमि को सरकार की नीति के अनुसार गुरुद्वारा के नाम किया जाएगा।
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इस संबंध में बाबा अजीत सिंह कुछ समय पहले उनसे मिले भी थे। इसके बाद जमीन गुरुद्वारा साहिब के नाम करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। इसके साथ ही तत्कालीन मुख्यमंत्री ने साथ लगती सरकारी भूमि पर सिख समाज के लिए एक एकड़ भूमि में धर्मशाला बनाने के निर्देश दिए थे।

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सरकार का फैसला सराहनीय, आसानी से बना पाएंगे व्यवस्थाएं : नरेद्र सिंह

गुरुद्वारा चिल्ला साहिब प्रबंधन कमेटी के उप प्रधान सरदार नरेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार का यह फैसला सराहनीय है। वर्ष 2019 में हमने तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल से यह मांग की थी। आज सरकार ने हमारी मांग को पूरा किया है। उन्होंने बताया कि गुरुद्वारे में श्रद्धालुओं के लिए नई व्यवस्था बनाने के लिए बार बार प्रशासन से अनुमति लेनी पड़ती थी, क्योंकि जमीन सरकार के नाम पर थी। अब श्रद्धालुओं के लिए नई व्यवस्था आसानी से बना पाएंगे। एक अस्पताल का निर्माण भी किया गया है, जिसका अब विस्तार किया जाएगा।
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यह है इतिहास

इतिहास के अनुसार दूसरी उदासी के समय बठिंडा, भटनेर (हनुमानगढ़), रानियां से होते हुए विक्रमी संवत 1567 को गुरुनानक देव अपने शिष्य मरदाना के साथ सिरसा पहुंचे थे। उस समय सिरसा में मुस्लिम फकीरों द्वारा मेले का आयोजन किया गया था। जिस समय गुरुजी सिरसा पहुंचे, उनका अनोखा पहनावा था। पांवों में खड़ाऊं, हाथ में आसा, सिर पर रस्सी बंधी थी और माथे पर तिलक लगा रखा था। इस दौरान पीर बहावल और ख्वाजा अब्दुल शकुर नामक फकीर खुद को करामाती बताते थे और धागे तबीज करते थे। उन दोनों ने गुरुनानक देव के साथ गोष्ठी की, जिसमें गुरुजी ने उनका अंहकार दूर किया। इस दौरान पीरों ने कहा कि तुम्हें परखना चाहते हैं। 40 दिन कोठरी में रहना होगा। रोजाना एक जौ का दाना और पानी पीना होगा। गुरुनानक देव के साथ तीन मुसलमान फकीर भी पानी लेकर बैठ गए, जबकि गुरुनानक देव बिना जौ व पानी के बैठे। कुछ दिनों बाद ही मुस्लिम फकीर बाहर आ गए और गुरुनानक के चरणों में गिर गए कि वाकई तुम खुदा के बंदे हो। गुरुनानक देव ने यहां चिल्ला काटा यानि चालीस दिनों की तपस्या की। गुरुनानक देव जी सिरसा में चार महीने और 13 दिन रहे। इस स्थान पर ही गुरुद्वारा चिल्ला साहिब का निर्माण किया गया है। यहां पर हरियाणा, पंजाब, राजस्थान व देश के अन्य राज्यों से श्रद्धालु आते हैं।
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