संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। निकाय चुनाव के लिए मतदान प्रक्रिया संपन्न होने प्रत्याशियों की बेचैनी बढ़ गई है। कम मतदान ने उनकी चिंता बढ़ा दी है और सभी आंकड़ों का आकलन करने में जुटे हैं। मतगणना 12 मार्च को चौ. देवीलाल विश्वविद्यालय में होगी। इसके बाद साफ होगा कि नगर परिषद का प्रधान और वार्डों के पार्षद कौन होंगे।
मतदान के बाद सभी प्रत्याशी अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं। सिरसा नगर परिषद के अध्यक्ष पद के लिए सात प्रत्याशी मैदान में हैं, जबकि 32 वार्डों के लिए 122 उम्मीदवारों ने किस्मत आजमा रहे हैं। चुनाव को लेकर प्रत्याशियों और उनके समर्थकों में जबरदस्त उत्साह था। मतदान समाप्त होने के बाद उम्मीदवारों ने अपने-अपने समर्थकों के साथ बैठकें की और संभावित हार-जीत पर चर्चा की। सिरसा में इस बार मतदान प्रतिशत में भारी गिरावट देखी गई।
साल 2016 में हुए नगर निकाय चुनाव में 70.5 प्रतिशत मतदान हुआ था, जबकि इस बार यह घटकर 56.4 प्रतिशत पर आ गया। 160036 मतदाताओं में से 90241 मतदाताओं ने ही अपने मत का प्रयोग किया। कम मतदान के लिए राजनीतिक विशेषज्ञों और प्रत्याशियों में भी चिंता देखी जा रही है। सभी उम्मीदवार अपने-अपने आंकड़ों का आकलन कर रहे हैं और संभावित समीकरण बिठा रहे हैं। अब देखना होगा कि मतगणना के बाद किसका भाग्य चमकता है और कौन निराश होता है। परिणाम आने तक प्रत्याशियों और मतदाताओं में उत्सुकता बनी रहेगी। लोग अब चुनाव परिणाम को लेकर कयास लगाते दिखाई दे रहे हैं।
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कमजोर रहा चुनाव प्रचार-प्रसार
मतदान कम होने को लेकर विश्लेषकों का मानना है कि प्रशासन की ओर से इस चुनाव में जागरूकता अभियान नहीं चलाया गया, जैसा कि विधानसभा या लोकसभा चुनाव में किया जाता है। इस कारण आम जनता में चुनाव को लेकर वह उत्साह नहीं दिखा, जो आमतौर पर बड़े चुनाव में देखने को मिलता है। विपक्षी दलों की ओर से चुनाव प्रचार भी कमजोर रहा। आमतौर पर विपक्षी पार्टियां चुनाव प्रचार के जरिये मतदाताओं को जागरूक करने का काम करती हैं, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ।