संवाद न्यूज एजेंसी
कालांवाली। अधिकारियों के आश्वासन के बावजूद भी मजदूरों को अनाज मंडी में पूरी मजदूरी नहीं मिल रही। ऐसे में दो दिन बाद शनिवार को मजदूर फिर से धरने पर बैठ गए हैं।
शनिवार को मंडी व बाहरी मजदूरों ने एकत्रित होकर सरकार व प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए रोष व्यक्त किया। मजदूर यूनियन के प्रधान मुकेश कुमार, प्रधान केवल, सुखदेव डाबला, रमेश, सूरजभान, चन सिंह, सन्नी, सोमनाथ, चांदी राम व अन्यों ने बताया कि इस धान सीजन में मजदूर पूरी तरह से बेरोजगार हैं। सरकार की तरफ से मजदूरों के लिए सफाई, झराई, तुलाई, सिलाई मिलाकर लगभग 16-17 रुपये प्रति बैग मजदूरी का नियम निर्धारित है, जबकि मंडी में मजदूरों से 2 रुपये बैग में काम करवाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि वे अपनी मांगों को लेकर पहले भी चार दिन लगातार धरने पर थे। उस समय एसडीएम ने उन्हें पूरी मजदूरी दिलाने का आश्वासन दिया था। इसके बाद मजदूर काम पर लौटे थे। मजदूरों ने चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक मंडी मजदूरों को पूरी मजदूरी नहीं दी जाती, तब तक धरना जारी रहेगा। यदि सरकार व प्रशासन ने कोई सुनवाई नहीं की तो वे अपना संघर्ष ओर तेज करेंगे।
मिलीभगत कर बड़े स्तर पर की जा रही गड़बड़ी
मजदूरों ने आरोप लगाया कि कालांवाली में मार्केट कमेटी अधिकारियों, खरीद एजेंसियों, शेलर संचालकों और आढ़तियों की मिलीभगत से बडे़ स्तर पर गड़बड़ी करके धान की खरीद की जा रही है। मंडी में ऐसा प्रतीत हो रहा है कि मंडी में धान प्रशासन नहीं बल्कि शेलर संचालक अपनी नमी चैक मशीनों से धान खरीद रहे हंै और किसानों को नमी के नाम पर चूना लगा रहे है। मंडी में किसानों से सीधा धान खरीदकर शेलरों व अतिरिक्त अनाज मंडी में उतारा जा रहा है। मंडी में दिन में कम और रात को ज्यादा खाली भरी करके धान की खरीद की जा रही है। डबवाली रोड पर शाम को 5 बजे से लेकर रात को 12 बजे तक लगी ट्रैक्टर ट्रालियों की लगी लाइनें इस बात का प्रमाण है। मंडी में बिना सफाई, झराई के धान बैगों में भरा जा रहा है। लेकिन सरकार व प्रशासन कोई ध्यान नहीं दे रहा।