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सहायक प्रोफेसर की नौकरी छोड़ योग में बनाया कॅरिअर, 25 से ज्यादा महिलाओं को दिलाई मोटापे से मुक्ति

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सिरसा। आम धारणा है कि महिलाएं कमजोर होती हैं और जरा सी भी दिक्कत आने पर हौसला खो देती हैं, लेकिन ये केवल मिथ्या है। यदि दिल में कुछ करने का जज्बा और जुनून हो तो कुछ भी असंभव नहीं है। एक महिला ऐसी भी है जो इस प्रकार की विपरीत परिस्थितियों में भी मन को मजबूत और सकारात्मक रखा। सहायक प्रोफेसर की नौकरी छोड़कर कॅरिअर की लाइन ही बदल डाली और योग-आयुर्वेद की ओर कदम बढ़ा दिए। अब परिणाम ये है कि चार राज्यों की 25 से ज्यादा महिलाओं को गंभीर मोटापा बीमारी से ही मुक्ति दिला दी। नतीजा ये है कि अब देश के अन्य राज्यों से भी डिमांड आ रही है और बड़ी-बड़ी कंपनियां अपने प्रोडक्ट के विज्ञापन अनुबंध करने के लिए आगे आ रही हैं।
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हम बात कर रहे हैं सिरसा निवासी कृतिका की जिन्होंने इंजीनियरिंग कॉलेज में सहायक प्रोफेसर की लंबे समय तक नौकरी की। पन्नीवाला मोटा स्थित कॉलेज में इलेक्ट्रिकल इंजीनियर विषय की सहायक प्रोफेसर ने चार महीने पहले ही नौकरी छोड़कर अब योग और आयुर्वेद के क्षेत्र में कॅरिअर बनाया है। बचपन से कत्थक का शौक था, जो काम आया और योग में जाने का मौका मिला। इसके परिणाम भी बेहतर सामने आए। ऑनलाइन तरीके से योग का प्रशिक्षण देने और डाइट प्लान तैयार करने का काम कृतिका अब बखूबी कर रही है। महिलाओं में मुख्य रूप से फैलने वाली मोटापा बीमारी (पीसीओडी) से ग्रसित रही कृतिका ने पहले योग और आयुर्वेद के माध्यम से स्वयं इस बीमारी पर नियंत्रण किया और लॉकडाउन के दौरान 80 किलो से अपना वजन 54 किलो पर ले आई। अब दूसरी महिलाओं को भी इस बीमारी से मुक्ति के लिए काम कर रही हैं। अभी तक हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और कोलकाता की 25 से ज्यादा महिलाओं को मोटापा बीमारी से सफलतापूर्वक छुटकारा दिला चुकी हैं। इसी का नतीजा है कि अब ब्यूटी, हेल्थ प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनियां कृतिका को अपने विज्ञापन में शामिल करना चाहती हैं और अनुबंध के लिए कॉल आ रही हैं। इन्हीं उपलब्धियों को देखते हुए कृतिका को इस बार महिला दिवस पर सावित्री बाई फूले अवॉर्ड और हेल्थ इंफ्लेंसर अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा। एक अवॉर्ड रोहतक तो दूसरा अवॉर्ड सिरसा में आयोजित कार्यक्रम में मिलेगा।
कत्थक के शौक ने दिखाया योगा का रास्ता, बना लिया कॅरिअर
कोरोना महामारी के दौरान कॉलेज बंद हो गया। वर्कलोड खत्म हुआ तो सहायक प्रोफेसर के पद से भी कॉलेज ने अस्थायी तौर पर हटा दिया। इससे समझ में आया कि आगे भविष्य का क्या होगा। साथ ही एक समस्या और थी। टीचर की नौकरी ज्वाइन करने के बाद कृतिका को मोटापा बीमारी यानी पीसीओडी ने घेर लिया। 80 किलो तक वजन बढ़ गया गया तो सेहत की तरफ भी ध्यान देना था। कत्थक विशारद थी, इसलिए योग की ओर बढ़ी। अपना मोटापा नियंत्रण में किया और 80 किलो से वजन कम करके 54 किलो पर ले आईं। हालांकि लॉकडाउन के बाद नौकरी दोबारा मिल गई लेकिन तब तक कॅरिअर बदलने का मन बदल चुका था। लॉकडाउन के दौरान ही ऑनलाइन योग टीचर ट्रेनिंग कोर्स भी पूरा कर लिया। अब नौकरी छोड़कर अब प्रमाणिक तौर पर योगा इंस्ट्रक्टर और न्यूट्रीओनिस्ट के तौर पर काम कर रही हैं।
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शिक्षण संस्थानों से भी अनुबंध के लिए आ रहे ऑफर
कृतिका बताती है उन्होंने लॉकडाउन के बाद से योग में कदम बढ़ाया और ऑनलाइन कोर्स भी पूरा कर लिया। इसके साथ ही आयुर्वेद को भी पढ़ा। इसका फायदा मिला है। महिलाओं में पीसीओडी की बीमारी का एलोपैथी का स्थायी इलाज नहीं है। लेकिन योग और आयुर्वेद में संभव है। इसी का परिणाम है कि अब शिक्षण संस्थान भी उनसे अनुबंध करना चाहते हैं। हिसार के हरियाणा एग्रीकल्चर विश्वविद्यालय ने उन्हें 7 मार्च को योग की ट्रेनिंग देने के लिए आमंत्रित किया है। इसके अलावा चंडीगढ़, गुरुग्राम सहित अन्य शिक्षण संस्थानों से भी अनुबंध के लिए ऑफर आने लगे हैं।

घर की छत पर इस तरह किया योगा और कत्थक का अभ्यास।- फोटो : Sirsa

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