शहर के लघु सचिवालय में अग्निशमन सिस्टम को दुरुस्त करने की बजाय अधिकारियों ने फायर सेफ्टी विभाग की रिपोर्ट को एक साल तक फाइलों में दबाए रखा। अपनी गलतियों को सुधारने की जगह लापरवाही पर पर्दा डालने की कोशिश की गई।
फायर सेफ्टी विभाग ने एक साल पहले दो बार पत्र लिखकर सिस्टम को दुुरुस्त करने की मांग की, लेकिन उसकी आवाज को अनसुना कर दिया गया है।
अब अमर उजाला में बृहस्पतिवार को खबर प्रकाशित होने के बाद उपायुक्त अंशज सिंह ने संज्ञान लेते हुए कहा कि मामले पर गंभीरता से संज्ञान लिया जाएगा। संबंधित पीडब्ल्यूडी और अग्निश्मन विभाग से पूर्ण जांच करवाई जाएगी। उसके बाद सामने आने वाली कमियों को जल्द दूर किया जाएगा।
अग्निशमन विभाग की ओर से पिछले वर्ष में दो बार पत्र लिखकर लघु सचिवालय में सामने आई कमियों के बारे में अधिकारियों को चेताया गया। पहला पत्र 30 अप्रैल 2013 को और दूसरा 16 जुलाई 2013 को लिखा गया था, लेकिन यह पत्र भी केवल फाइलों में गुम होकर रह गए।
पहले दस वर्ष बीत जाने के बाद भवन में लगाए गए अग्निशमन उपकरणों को चालू नहीं किया गया और फिर अग्निशमन विभाग के बार-बार सचेत करने पर भी उस ओर ध्यान न देना साफ तौर पर लापरवाही को उजागर करता है।
लघु सचिवालय भवन में पानी सप्लाई के लिए चाराें ओर लगाए गए हौज सिस्टम को कूड़ादान बना दिया गया है। इमारत के साथ ही स्थापित किए गए यह हौज इंतजार कर रहे हैं कि कब उन्हें चालू किया जाएगा। उधर, अलार्म कंट्रोलर भी पूरी तरह से कबाड़ बन चुका है।
दमकल विभाग द्वारा निरीक्षण के बाद लिखे गए पत्र में कई कमियों का खुलासा किया गया है। पत्र में साफ-साफ लिखा गया है कि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना या नुकसान से बचने के लिए इन उपकरणों को जल्द दुरुस्त करवाया जाए।
- भवन में लगे हाइड्रेंट, हौज सिस्टम चालू हालत में नहीं हैं।
- अग्निशमन यंत्र पुराने हो चुके हैं, इन्हें तुरंत ठीक करने की जरूरत है।
- कंट्रोल अलार्म, फायर अलार्म मैनवल कॉल प्वाइंट भी चालू नहीं ह्रैं।
- वाटर टैंक भी चालू नहीं किए गए हैं, पानी लेने के इंतजाम नहीं हैं।
- भवन में लगे अग्निशमन सिस्टम में किसी भी यंत्र के पार्ट्स पूरे नहीं हैं।
लघु सचिवालय के नाजर विभाग ने बताया कि हमें इस फायर सिस्टम के बारे में किसी प्रकार की जानकारी नहीं है। फायर सेफ्टी डिपार्टमेंट से भवन में अग्निशमन की कमियों को लेकर आए पत्र उन्होंने आगे लोकनिर्माण विभाग को भेज दिए थे। अग्निशमन यंत्रों को चालू करने की जिम्मेदारी उन्हीं की है।
उन्होंने कहा कि उपकरणों के साथ-साथ इन्हें चलाने का प्रशिक्षण भी दिया जाना चाहिए। उधर, लोक निर्माण विभाग के जेई जसवंत का कहना है कि उनके पास सूचना अभी आई है, उस पर कार्रवाई की जा रही है। जल्द ही अस्टीमेट बनाकर आग बुझाने के उपकरणों को दुरुस्त कर दिया जाएगा।
इस मामले पर फायर सेफ्टी अधिकारी जगदीश चंद्र गिल का कहना है कि उन्होंने जिला उपायुक्त अंशज सिंह को इस पूरे मामले के बारे में सूचित किया गया था। उपायुक्त को भवन में कार्यरत कर्मचारियों को भी अग्निशमन उपकरण चलाने का प्रशिक्षण दिलवाने के लिए कहा था।
उन्होंने आश्वासन दिया है कि जल्द प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया जाएगा। अग्निशमन यंत्रों में सामने आई कमियों को दुरुस्त करने के लिए भी लोकनिर्माण विभाग को लिखा जाएगा।