सिरसा। कृषि कानूनों के खिलाफ शुरू हुए किसान आंदोलन के कारण करीब 10 माह से डिप्टी सीएम हाउस को जाने वाले रास्ते को अवरोधक लगाकर बंद किया हुआ है। ऐसे में प्रतिदिन यहां से गुजरने वाले 5 हजार से ज्यादा लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। निजी स्कूल और सरकारी कार्यालय होने के कारण लोगों को करीब 5 किलोमीटर घूमकर अपनी मंजिल तक जाना पड़ता है। इस स्थिति को देखते हुए दो अधिवक्ताओं ने न्यायालय में याचिका दायर कर रास्ता खुलवाने की मांग की है। न्यायालय ने याचिका स्वीकार कर ली। अब अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी।
अधिवक्ता महेश पारीक और सुनील वर्मा ने सिवलि जज के न्यायालय में याचिका दायर करने का दावा किया है। उन्होंने बताया कि बरनाला रोड और साथ गलती दो गलियों में अवरोध लगाकर रास्ता बंद किया गया है। इस कारण यहां रहने वाले लोगों और दुकानदारों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी धरना-प्रदर्शन के कारण सड़क को बंद नहीं किया जा सकता। शाहीन बाग प्रदर्शन मामले में भी सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि प्रदर्शनकारियों को प्रदर्शन करने का अधिकार है लेकिन वे सड़क को ब्लॉक नहीं कर सकते। इसके बावजूद यहां डीसी और एसपी ने रास्तों को बंद करवा रखा है। याचिकाकर्ता दोनों अधिवक्ताओं ने कहा कि ये लोगों के मौलिक अधिकारों का हनन है, इसलिए रास्ता खुलवाया जाए।
ये है मामला
किसानों ने करीब 10 महीने पहले कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन करने की योजना बनाई और डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला के आवास का घेराव करने की चेतावनी दी। इस पर जिला प्रशासन ने शहर के बरनाला रोड स्थित बाबा भूमण शाह चौक पर डिप्टी सीएम आवास की ओर जाने वाले रास्ते पर अवरोधक लगाकर रास्ता जाम कर दिया। इतना ही नहीं दूसरी ओर से भी रास्ता बंद किया गया। ताकि इस रोड पर कोई ना आ सके। इस दौरान किसानों ने अवरोध हटाने के प्रयास किए लेकिन उन पर वाटर केनन से पानी की बौछारें की गई और आंसू गैस के गोले दागे गए। तब से अब तक जिला प्रशासन ने मिनी बाईपास के अलावा साथ लगती दो गलियों को भी अवरोधक लगाकर स्थायी रूप से बंद कर दिया है।
लोगों को ये आ रही परेशानी
- चौटाला हाउस रोड पर निजी स्कूल है और सरकारी कार्यालय भी है। यहां आने वालों को परेशानी होती है।
- पार्क में आने वालों को भी घूमकर आना पड़ता है।
- स्थानीय निवासियों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
- हिसार से आकर डबवाली की ओर जाने वाले भारी वाहनों के लिए भी रूट डायवर्ट किया गया है जिस कारण उन्हें 5 किलोमीटर अतिरिक्त घूमकर जाना पड़ता है।
अगली सुनवाई 28 को
अधिवक्ता महेश पारीक और सुनील वर्मा ने बताया कि उन्होंने रास्ता खुलवाने के लिए जिला प्रशासन से मांग की थी। लेकिन रास्ता नहीं खोला गया। अब उन्होंने जिला न्यायालय में दावा किया है। उनकी याचिका स्वीकार हो गई है और अगली सुनवाई के लिए 28 सितंबर की तारीख निर्धारित की गई है।