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Sirsa News: 10 दिनों में घग्गर में 16,950 क्यूसेक घटा पानी, लोगों ने ली राहत की सांस

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रानियां। जलस्तर घटने के उपरांत ओटू हेड का दृश्य। संवाद 
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रानियां। अंबाला, पंचकूला और शिवालिक की पहाड़ियों में हुई भारी बारिश से अगस्त व सितंबर के प्रथम सप्ताह तक नदी का जलस्तर काफी बढ़ता रहा। इससे सिरसा के विभिन्न क्षेत्रों में रिंग बांध टूटने से किसानों की हजारों एकड़ फसल जल मग्न हो गई और फसलों का बड़ा नुकसान उठाना पड़ा, लेकिन बीते 10 दिनों से घग्गर के घट रहे जलस्तर से लोगों ने राहत की सांस ली है।
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पिछले 10 दिनों में घग्गर में पानी की मात्रा 16, 950 क्यूसेक घटी है। घग्गर प्रबंधों की सुरक्षा के लिए प्रशासन के साथ-साथ क्षेत्र की अनेक सामाजिक संस्थाओं क्लब व पास लगता गांव के लोगों ने कमजोर तटबंधों पर दिन-रात पहरा लगाकर निगरानी की और और जिला प्रशासन का पूरा साथ दिया। बुधवार को ओटू हेड पर 10,600 क्यूसेक पानी पहुंचा, जहां से विभाग की ओर से हेड के 649 पॉइंट का लेवल मेंटेन कर पानी राजस्थान की ओर छोड़ा जा रहा है।
लोगों ने बताया कि बीते 20 दिनों तक उन्हें घग्गर में बढ़ते स्तर और कमजोर तटबंध के टूटने का डर सताता रहा, लेकिन विभागीय सुरक्षा प्रबंधन के चलते कहीं भी बड़े तटबंध टूटने जैसी कोई घटना नहीं हुई। जिससे कि बड़े स्तर पर क्षेत्र में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो। क्षेत्रवासी में बताया कि मौजूदा समय में जलस्तर काफी कम हो गया है।
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फिलहाल उन्हें घग्गर तटबंध के टूटने या किसी बाढ़ जैसी स्थिति की चिंता नहीं है। खैरेकां पुल से लेकर राजस्थान सायफन तक दोनों तरफ के तटबंधों के दर्जनों जगहों पर ग्रामीण व समाजसेवी संस्थाओं की ओर से पहरा लगाकर प्रशासन का साथ दिया गया ताकि किसी भी स्थिति से निपटा जा सके।

इस दौरान उम्मीद क्लब बणी के सदस्यों ने बीते 15 दिनों तक अपने स्तर पर मिट्टी थैलों, लाइट की व्यवस्था व अन्य उपकरणों के साथ दिन रात पहरा लगाकर तटबंधों की निगरानी व सुरक्षा की गई। क्लब प्रधान सुखजीत सिंह ने बताया कि घग्गर के नियमित रूप से घट रहे जलस्तर के उपरांत ज्यादातर समाजसेवी संस्थाओं ने वापसी कर ली, लेकिन क्लब की ओर से अभी भी सुबह शाम घग्गर के जलस्तर की जांच की जा रही है।

क्षेत्रवासियों ने नुकसान की भरपाई की मांग रखी
किसानों ने बताया कि उन्होंने घग्गर रिंग बांध व बड़े तटबंधों के बीच 80 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से जमीन ठेके पर लेकर धान की फसल लगाई थी। जो रिंग बांध टूटने से पूरी तरह से नष्ट हो गई और समतल भूमि पर भी काफी मिट्टी चढ़ गई। इससे उन्हें लाखों का नुकसान हुआ है। इस साथ घग्गर तटबंधों पर बसे मजदूर व गरीब तबके के लोगों के मकानों की दीवारों में दरार आने से क्षतिग्रस्त हो गए। वहीं बहुत से ऐसे मकान थे जो पूरी तरह से ढह गए। पीड़ित किसानों व मकान मालिकों ने सरकार व प्रशासन से जल्द से जल्द सर्वे करवाकर डूबी फसलों और गिरे मकानों का मुआवजा देने की गुहार लगाई है।
क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन का जताया आभार
क्षेत्रवासियों और सामाजिक संस्थाओं ने जिला प्रशासन की ओर से घग्गर तटबंधों की सुरक्षा के लिए किए गए प्रबंधन की सराहना करते हुए आभार जताया। इस दौरान क्षेत्र वासियों व संस्थाओं ने ऑटो हेड से लेकर राजस्थान सायफन तक दोनों तक बांधों पर सड़़क निर्माण व लाइट लगाने की अपील की।
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ओटू हेड पर घग्गर जलस्तर की बीते 10 दिनों की रिपोर्ट

17 सितंबर - 10600 क्यूसेक।

16 सितंबर - 10600 क्यूसेक।

15 सितंबर - 17350 क्यूसेक।

14 सितंबर - 20800 क्यूसेक।

13 सितंबर - 22350 क्यूसेक।

12 सितंबर - 22750 क्यूसेक।

11 सितंबर - 24000 क्यूसेक।

10 सितंबर - 26190 क्यूसेक।

9 सितंबर - 27500 क्यूसेक।

8 सितंबर - 27550 क्यूसेक।
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