शहीद भगत सिंह स्टेडियम के सामने कृषि कानूनों और पुलिस कार्रवाई के विरोध में किसानों का धरना तीसरे दिन में प्रवेश कर गया। शुक्रवार को किसानों के धरने पर समर्थन देने के लिए कालांवाली से कांग्रेस विधायक शीशपाल केहरवाला व कांग्रेसी नेता होशियारी लाल शर्मा पहुंचे, लेकिन उन्हें किसानों को संबोधित करने नहीं दिया गया। इससे पहले सुबह किसानों ने धरना सड़क के किनारे तक लगा दिया था, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों के समझाने के बाद किसानों को पीछे हटाया गया। अब किसानों का धरना गेट व सड़क के बीच वाली जगह पर है।
स्वराज इंडिया मंच के संस्थापक सदस्य योगेंद्र यादव ने कहा कि अगर हमें डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला की कुर्सी को हिलाना है तो जनता का साथ चाहिए। ऐसा कोई भी काम नहीं करना है कि जिससे जनता हमारे खिलाफ हो जाए। जिस दिन 100 महिलाएं किसानों के धरने पर आकर बैठ गईं, उस दिन वह एक हजार के बराबर दिखाई देंगी। इस पर काम करना शुरू कर दें। यह स्टेडियम किसानों का बेस कैंप बन गया है। हमारे नौजवान साथियों ने अकालियों को कुर्सी से उतार दिया। अगर किसान बादल के घर पर दीवार कूद कर चढ़ जाते तो किसान आंदोलन बदनाम हो जाता। यदि छह अक्तूबर को किसान नेताओं ने सावधानी नहीं बरती होती तो पूरा आंदोलन बिगड़ जाता। उन्होंने किसान आंदोलन से जुडे़ युवाओं को आगाह करते हुए कहा कि जल्दबाजी और जोश में ऐसा कुछ भी न करें कि जिससे किसानों को सिर पकड़ कर सोचना पड़े। धरनास्थल पर गुरुद्वारा चिल्ला साहिब व डेरा बाबा भूमणशाह मंगाला की ओर से लंगर की व्यवस्था की गई।
जब तादाद अधिक होगी, तभी निर्णय लिया जाएगा : मंदीप नथवान
किसानों के धरने पर रतिया के गांवों से किसान पहुंच रहे हैं। धरने पर कुछ युवाओं ने पंजाब की तरह ही टोल नाकों पर धरने देकर, उन्हें फ्री करने और पेट्रोल पंप के आगे धरने देने की बात कही। हालांकि किसान नेता मंदीप नथवान ने कहा कि हमारी तादाद इतनी ज्यादा नहीं है कि हम ये काम कर सकें। पहले धरने पर किसानों की संख्या बढ़ाओ, इसके बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा।