सुनील बैनीवाल
सिरसा। चार बच्चों की मौत के बाद दिसंबर 2022 और जनवरी 2023 में 42 दिन का आंदोलन। समाधान की उम्मीद में तत्कालीन सीएम मनोहर लाल के शहर करनाल तक पैदल यात्रा। तत्कालीन चिकित्सा मंत्री अनिल विज से मुलाकात और अस्पताल में महिला और बाल रोग विशेषज्ञ की शीघ्र तैनाती का आश्वासन। इतना सब कुछ होने के बावजूद परिणाम शून्य। चौटाला के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ। महिला रोग विशेषज्ञ और सर्जन का इंतजार भी पूरा नहीं हो सका है। ये हालात तब हैं जब इस गांव के पांच विधायक सदन में हैं।
जननायक चौधरी देवीलाल के गांव चौटाला के इस अस्पताल की दुर्दशा ऐसी कि गांव की गर्भवती महिलाओं व उनके परिजनों को चिकित्सा सुविधाओं के लिए डबवाली या सिरसा की भागदौड़ करनी पड़ रही है। यहां से देश के उपप्रधानमंत्री व प्रदेश के मुख्यमंत्री तक निकल चुके हैं। राजनीतिक रसूख का कुछ लाभ भी मिला है। वक्त के साथ-साथ गांव में विकास हुआ और आज भारत माला सिक्स लेन हाईवे गांव के पास से गुजर रहा है। राजनीतिक तौर पर गांव मजबूत होने के चलते स्वास्थ्य विभाग की ओर से यहां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण किया गया है। सीनियर मेडिकल ऑफिसर की तैनात भी केंद्र में की गई है। लेकिन चिकित्सकों की संख्या सीएचसी में पूरी नहीं हो पाई। गर्भवती महिलाओं की डिलिवरी के लिए न तो गायनोकॉलोजिस्ट और न ही बच्चों के लिए बाल रोग विशेषज्ञ को तैनाती। यह स्थिति तब है जब एक साल पहले चार बच्चों की मौत पर करनाल तक पैदल मार्च किया था।
बता दें कि प्रति माह सीएसची में 15 से 20 डिलिवरी के मामले आते हैं। चिकित्सक नहीं होने के कारण इनको डबवाली जाना पड़ता है। संवादयदि कोई इमरजेंसी मरीज होता है तो उसे सिरसा नागरिक अस्पताल में रेफर कर दिया जाता है। चिकित्सकों के अनुसार डबवाली में ट्रामा सेंटर बनाया जाए, तो महिलाओं से जुड़ी सुविधाओं को बढ़ावा मिलेगा।
हाईवे के कारण एमरजेंसी सुविधाओं की बड़ी मांग
चिकित्सकों और ग्रामीणों ने बताया कि भारत माला सिक्स लेन बनने के बाद इमरजेंसी सुविधाओं की मांग में तेजी आई है। हाईवे पर होने वाले हादसों को देखते हुए राजस्थान और डबवाली के बीच यह एकमात्र सीएचसी है। यहां सबसे पहले घायलों को प्राथमिक उपचार के लिए लाया जाता है। इस सीएचसी में एमडी, सर्जन का होना बेहद जरूरी है। गांव से डबवाली 30 किलोमीटर दूरी है।
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42 दिन चले आंदोलन के बाद भी आज भी चिकित्सकों का इंतजार
ग्रामीण कॉमरेड राकेश फगोड़िया ने बताया कि गांव अबूबशहर, चौटाला और तेजाखेड़ा के बच्चों की मौत हुई थी। इसके बाद दिसंबर 2022 में चिकित्सकों की मांग को लेकर धरना शुरू हुआ था। गांव चौटाला की सीएचसी में 21 दिन धरना दिया गया था। इसके बाद 20 से 25 ग्रामीण पैदल यात्रा करते करनाल पहुंचे थे। उन्होंने मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया था। तत्कालीन ओएसडी संजय बठला ने आश्वासन दिया था कि वह सीएम से मुलाकात करवाएंगे। सीएम से बात नहीं होने पर लघु सचिवालय पर 10 धरना दिया था। इसके बाद तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज से मुलाकात हुई थी। उन्होंने तुंरत प्रभाव से गायनोकॉलोजिस्ट और बाल रोग विशेषज्ञ लगाने के आदेश दिए थे। चिकित्सक नहीं लगने पर 20 दिन बाद दोबारा विज से मिले थे। उन्होंने दोनों चिकित्सकों को सस्पेंड कर दिया और चिकित्सक लगाने का आश्वासन दिया था। इसके बाद एक बार फिर मुलाकात की थी, आज तक कोई चिकित्सक नहीं आया है।
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यह मिल रही है सुविधा
1 एक्स-रे
2 लैब टेक्नीशियन
3 सात चिकित्सक तैनात है।
4 एसएमओ की तैनाती है।
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यह सुविधा आज तक नहीं मिली
1. सर्जन नहीं है।
2. गायनोकॉलोजिस्ट नहीं है।
3. अल्ट्रासाउंड मशीन नहीं है।
4 . हड्डियों के चिकित्सक नहीं है।
5. बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है।
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ब्लड बैंक का किया जा रहा है निर्माण
गांव चौटाला में ब्लड बैंक के भवन का निर्माण कार्य जारी है। राजस्थान की सीमा के नजदीक होने के कारण मेडिकल सुविधा गांव चौटाला में ही मिलती है। कई बार एमरजेंसी मरीजों को रक्त की जरूरत पड़ जाती है। इसलिए गांव के सीएचसी में ब्लड बैंक का निर्माण किया जा रहा है।
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गायनोकॉलोजिस्ट और सर्जन नहीं है। लंबे समय से इनकी मांग है। भारत माला प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद सर्जन और ऑथो के चिकित्सकों की मांग बढ़ गई है। हादसों में इमरजेंसी होती है और दोनों चिकित्सक जरूरी है। कई बार हमारी ओर से मांग की जा चुकी है। एक्स-रे की सुविधा हमारे यहां शुरू हो चुकी है। -डॉ. बालेश बंसल, एसएमओ
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कोट्स
42 दिन आंदोलन करने के बाद भी आज तक गायनोकॉलोजिस्ट व बाल रोग विशेषज्ञ नहीं मिले हैं। एक साल का वक्त गुजर गया है। चुनाव में आने वाले चौटाला परिवार के लोगों से बस यही सवाल करेंगे कि महिलाओं और बच्चों के भविष्य के लिए उन्होंने क्या किया। चुनावों के बाद में आंदोलन फिर शुरू किया जाएगा। - राकेश फागोड़िया, किसान नेता