सिरसा। चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय ने विधि विभाग में कार्यरत एक प्रोफेसर का लीयन बर्खास्त कर दिया। इस फैसले को उक्त प्रोफेसर ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। जिस पर कोर्ट ने उस पर रोक लगा दी। लेकिन इसके बावजूद सीडीएलयू अब इस मुद्दे को अंतिम फैसले के लिए कार्यकारी परिषद की बैठक में ले गया। बैठक मंगलवार को होनी है, लेकिन कार्यकारी परिषद की बैठक होने से पहले ही प्रोफेसर ने कुलपति सहित कार्यकारी परिषद के 17 सदस्यों को एडवांस लीगल नोटिस भेज दिया है। इसमें चेताया गया है कि जब उच्च न्यायालय ने रोक लगा रखी है तो बैठक में कैसे ले जाया जा सकता है।
सीडीएलयू के विधि विभाग में प्रो. राजेश मलिक कार्यरत थे। उन्होंने करीब 3 साल पहले महेंद्रगढ़ की सेंट्रल यूनिवर्सिटी में ज्वाइन कर लिया था। फिलहाल वे सीडीएलयू से अवकाश लेकर लीयन पर हैं। प्रो. मलिक का लीयन का पीरियड 14 अगस्त 2021 से 13 अगस्त 2022 तक है। बताया जा रहा है कि लेकिन इसी बीच सीडीएलयू ने एक फैसला लेते हुए 29 दिसंबर को प्रो. राजेश मलिक का लीयन बर्खास्त कर दिया। इसके बाद प्रो. राजेश मलिक ने उच्च न्यायालय में सीडीएलयू के इस फैसले को चुनौती दी और याचिका दायर की। सूत्र बताते हैं कि इसके बाद उच्च न्यायालय ने स्टे भी दे दिया। लेकिन इसके बावजूद सीडीएलयू ने अपनी कार्रवाई नहीं रोकी और अब फैसले पर फाइनल मोहर लगाने के लिए इस मुद्दे को कार्यकारी परिषद की बैठक में ले जाया जा रहा है।
कार्यकारी परिषद की महत्वपूर्ण बैठक आज, 17 सदस्यों को प्रोफेसर ने भेजा लीगल नोटिस
सीडीएलयू की कार्यकारी परिषद की महत्वपूर्ण बैठक मंगलवार को होना प्रस्तावित है। सूत्र बताते हैं इसमें एक मुद्दा ये भी है कि प्रो. राजेश मलिक का लीयन यानी अवकाश बर्खास्त कर दिया गया है। क्योंकि यूनिवर्सिटी में सभी महत्वपूर्ण फैसलों पर अंतिम मोहर कार्यकारी परिषद के सदस्य ही लगाते हैं। इसलिए ये बर्खास्त करने का फैसला भी कार्यकारी परिषद ने ही करना है। लेकिन कार्यकारी परिषद की बैठक से पहले ही प्रो. राजेश मलिक ने सीडीएलयू के वीसी सहित 17 सदस्यों को एडवांस नोटिस भेजा है। इसमें बताया गया है कि सीडीएलयू ने बिना किसी पूर्व सूचना प्रो. का लीयन बर्खास्त कर दिया है। इसके बाद उच्च न्यायालय का स्टे भी आ गया। लेकिन अब इसे कार्यकारी परिषद का एजेंडा बनाया है। प्रो. राजेश मलिक ने अपनी ओर से भेजे नोटिस में कहा है कि यदि बैठक में इस फैसले पर मोहर लगी तो ये न्यायालय की अवमानना होगी।
जानिये... क्या है लीयन बर्खास्त
जब एक प्रोफेसर एक विश्वविद्यालय में रहते हुए किसी दूसरे विश्वविद्यालय में जाकर नौकरी ज्वाइन कर ले। लेकिन पहले से चल रही नौकरी से भी त्यागपत्र ना दे। ऐसे में वह प्राध्यापक लीयन ले सकता है। इसका मतलब वह अवकाश पर रहेगा और लीयन के तहत नई जगह पर नौकरी करेगा। इसके लिए दोनों विश्वविद्यालय सहमत होना जरूरी हैं। एक वर्ष का लीयन होता है, जिसे समय और आवश्यकता अनुसार आगे भी बढ़ाया जा सकता है। नियम कहते हैं कि लीयन को बर्खास्त करने के लिए प्राध्यापक को कम से कम तीन माह का नोटिस दिया जाना भी जरूरी है।
जो भी फैसला किया है वह नियम अनुसार किया है। नियम से बाहर जाकर कोई काम नहीं किया जाता। लीगल नोटिस आया है और मेरे संज्ञान में भी है।
-प्रो. अजमेर सिंह मलिक, कुलपति, सीडीएलयू, सिरसा।
सेवानिवृत्त अधिकारी की नियुक्ति पर सीडीएलयू को नोटिस
सिरसा। चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय में सेवानिवृत्त अधिकारी को दोबारा नियुक्ति देने पर एक पूर्व छात्र ने विश्वविद्यालय को अवमानना नोटिस भेजा है। इसमें उन्होंने बताया है कि सीडीएलयू ने वर्ष 2010 में शपथ पत्र देकर बताया था कि सेवानिवृत्त अधिकारियों को काम पर नहीं रखा जाएगा। लेकिन इसके बावजूद अब वीसी कार्यालय में ही सेवानिवृत्त अधिकारी को नियुक्ति दे दी गई है।
सीडीएलयू के पूर्व छात्र विक्रम की ओर से वकील सुरेंद्र पाल ने एक एडवांस अवमानना नोटिस भेजा है। इसमें उन्होंने बताया है कि सीडीएलयू में सेवानिवृत्त अधिकारियों की नियुक्ति पर वर्ष 2010 में विवाद हुआ। मामला न्यायालय तक पहुंचा तो फैसला हुआ कि विश्वविद्यालय अब सेवानिवृत्त अधिकारियों की नियुक्ति नहीं करेगी। उस समय जो अधिकारी कार्रवाई में शामिल था और सेवानिवृत्त अधिकारियों की नियुक्ति के खिलाफ था, वही अधिकारी आज स्वयं वीसी कार्यालय में सेवानिवृत्ति के बाद काम कर रहा है। इसीलिए पूर्व छात्र विक्रम ने सीडीएलयू को नोटिस भेजकर पुराने मामले का जिक्र किया है। अब सीडीएलयू इस पर आगामी कार्रवाई करेगी। सीडीएलयू के वीसी प्रो. अजमेर सिंह मलिक ने पुष्टि की है कि लीगल नोटिस आया है और हम नियम अनुसार कार्रवाई कर रहे हैं।