सिरसा। गुरुद्वारा श्री चिल्ला साहेब में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़।
सिरसा। गुरुनानक देवजी की जयंती शुक्रवार को मनाई गई। इस दौरान गुरुद्वारा चिल्ला साहिब में श्रद्धा का सैलाब उमड़ा। पंजाब और राजस्थान की सीमा पर लगे क्षेत्र से भी सिख समुदाय के लोग बड़ी संख्या में गुरुद्वारा श्री चिल्ला साहिब में पहुंचे। श्रद्धालुओं ने वहां मत्था टेका और शीश नवाकर सरोवर का पवित्र जल ग्रहण किया। रात में लोगों ने घरों में दीपमाला की। कुछ लोगों ने अपने घरों को रंग-बिरंगी लड़ियों से सजाया। गुरु पर्व की खुशी में श्रद्धालुओं ने आतिशबाजी भी की।
गुरु पर्व के दिन बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक लंगर सेवा करते नजर आए। रागी, ढाडी जत्थों ने गुरुओं की वाणी सुनाकर उनका गुणगान किया। गुरुद्वारा श्री चिल्ला साहिब की मान्यता को देखते हुए सिख समुदाय समेत अन्य समुदायों के लोग भी गुरुद्वारे में पहुंचे और शीश नवाया। गुरुद्वारा श्री चिल्ला साहिब को रंग-बिरंगी झालर और स्वचलित लड़ियों से सजाया गया। गुरुद्वारा प्रबंधन समिति की ओर से व्यवस्था बनाने के लिए सदस्यों की ड्यूटी लगाई गई।
अलसुबह से गुरुद्वारे में गुरुग्रंथ साहिब के दर्शन के लिए लंबी लाइन लगी। श्रद्धालु अलसुबह ही श्री चिल्ला साहिब में पहुंच गए। मान्यता के अनुसार गुरुद्वारा साहिब में बने सरोवर में श्रद्धालुओं ने पंच स्नान कर जल ग्रहण किया। इसके बाद श्री निशान साहिब पर शीश नवाकर लोगों ने मन्नत मांगी। गुरुद्वारा श्री चिल्ला साहिब के तीन बड़े सभागारों में लंगर के लिए बड़े स्तर पर विशेष व्यवस्था की गई। इसमें हजारों लोगों ने लंगर ग्रहण किया।
गुरुद्वारे के बाहर हुआ मेले का आयोजन
गुरुद्वारा चिल्ला साहिब के बाहर मेला लगा। इसमें बच्चों और महिलाओं ने खूब खरीदारी की। फड़ वालों ने गुरुद्वारे से एक किलोमीटर की दूरी तक समान के स्टाॅल लगाए। वहां पहुंचे लोगों ने अपनी पसंद का सामान खरीदा। गुरुद्वारे में शाम 7:30 बजे से रात 12 बजे तक दीवान का आयोजन किया गया। इसमें दूरदराज से आए रागी, ढाडी जत्थों ने प्रस्तुति दी। दीवान में हजारों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। इस दौरान सिरसा के गुरुद्वारा श्री चिल्ला साहिब में श्री गुरु नानक देव जी के आगमन और 41 दिन की गतिविधियों के बारे में संगत को बताया गया।
-
गुरुपर्व के लिए गांव अहमदपुर में भी ग्राम की और गांव के गुरुघर में गुरु के पाठ के भोग पाए गए। इस दौरान पूरे गांव ने गुरुघर में माथा टेका और गुरु साहिब की पवित्र वाणी का अनुसरण किया। पूरे गांव में किसी भी घर में खाना नहीं बनाया। गांव के सभी लोगों ने गुरुद्वारे में ही पाठ के भोग के बाद एक साथ बैठकर लंगर ग्रहण किया। गांव के मौजूद लोगों ने बताया कि गांव में यह रीत पांच साल से चल रही है।