इस बार कमाल हो गया। 23 गांवों में महिलाओं को चौधर मिली है। कुल 48 ग्राम पंचायतों में से 16 महिला रिजर्व थी। जिन गांवों में महिला चौधरी बनी हैं। बता दें कि उन गांवों में से अधिकतर में लिंगानुपात काफी कम है। पढ़ी-लिखी चौधरी के आगे लिंगानुपात बड़ी समस्या बनेगा।
बीडीपीओ के अनुसार लिंगानुपात सुधार के लिए महिला सरपंच को ही गांव की ब्रांड एंबेसडर बनाया जाएगा। पंचायती राज संस्था के चुनाव में पहली बार सरकार ने शैक्षणिक योग्यता की शर्त रखी थी। जिसके बाद हरियाणा और पंजाब के सीमा से सटा हुए डबवाली के ग्रामीण आंचल में बड़ा परिवर्तन देखने को मिला है। महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीटें आरक्षित होने के बावजूद 50 फीसदी महिलाएं चुनकर छोटी सरकार में पहुंची हैं।
48 सरंपचों में तीन ग्रेजुएट, जिसमें से दो महिलाएं
सबसे खास बात यह है कि कुल 48 चौधरियों में से तीन चौधरी ही ग्रेजुएट हैं। जिसमें भी दो महिलाएं शामिल हैं। गांव अलीकां से वीरपाल कौर तथा झुट्टीखेड़ा से ममता ग्रेजुएट हैं। जबकि छह बारहवीं पास, नौ दसवीं पास तथा छह मिडिल पास हैं। पढ़ी-लिखी महिला चौधरियों के गांवों में लिंगानुपात सबसे बड़ी समस्या है। एक जनवरी 2015 से दिसंबर 2015 तक के आंकड़ों पर नजर दौड़ाई जाए तो कुछ गांवों को छोड़कर अधिकतर गांवों का क्रूर चेहरा सामने आता है। पंजाब सीमा से सटे गांव देसूजोधा का लिंगानुपात 1000 : 615 है। आठ हजार आबादी वाले इस गांव में 65 बेटों के मुकाबले 40 बेटियों का जन्म हुआ। देसूजोधा पीएचसी के तहत आने वाले दूसरे गांव मांगेआना में भी कमोबेश वैसे ही हालात हैं। लिंगानुपात 1000 : 684 है। करीब तीन हजार आबादी वाले इस गांव में 38 बेटों के मुकाबले 26 बेटियां आई। बनवाला का लिंगानुपात 1000 : 684 है। इस गांव की आबादी करीब साढ़े चार हजार है। 38 बेटों के पीछे 26 बेटियां का जन्म हुआ है। गांव कालूआना का लिंगानुपात 778 रह गया। करीब सात हजार की आबादी वाले इस गांव मं 45 बेटों के पीछे 35 बेटियों ने जन्म लिया।
चकजालू से मिलेगी सीख
गांव चकजालू प्रदेश का एकमात्र संपूर्ण साक्षर गांव है। इसके अतिरिक्त गांव में अनेकों खूबियां हैं। लिंगानुपात में खंड डबवाली में टॉप पर है। जनवरी 2015 से दिसंबर 2015 तक गांव में चार बेटों के पीछे नौ बेटियों का जन्म हुआ है। लिंगानुपात 1000 : 2250 है। आरक्षित कोटे से बाहर होने के बावजूद इस गांव की चौधरी बेटी बनी है। छोटा सा गांव अब लिंगानुपात सुधार के मामले में पूरे खंड को सीख देगा।
जिन 23 गांवों में महिला सरपंच चुनी गई, उन गांवों का लिंगानुपात
गांव लिंगानुपात
अहमदपुर दारेवाला 1074
अलीकां 960
बनवाला 684
भारूखेड़ा 800
चकजालू 2250
चौटाला 929
देसूजोधा 615
गिदडख़ेड़ा 1000
गोरीवाला 833
हैबूआना 1000
झुट्टीखेड़ा 1500
जोगेवाला 1000
कालूआना 778
खुईयांमलकाना 739
लखुआना 913
मांगेआना 684
मोडी 1231
पन्नीवाला मोरिकां 1800
पन्नीवाला रूलदू 905
पाना 875
राजपुरा माजरा 727
रामपुरा बिश्नोईयां 950
शेरगढ़ 960
सरपंच बनेंगी ब्रांड एंबेसडर
इस बार पढ़े-लिखों की सरकार बनी है। महिला सरपंचों के लिए 16 पद आरक्षित थे। खंड डबवाली में करीब 50 फीसदी महिला सरपंच चुनकर आए हैं। अधिकतर गांवों में लिंगानुपात कम है। ऐसे में सुधार के लिए सरपंच को ब्रांड एंबेसडर बनाया जाएगा। ताकि ग्रामीण उनसे सीख ले सकें। पढ़ी-लिखी होने के नाते वे बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ मुहिम को जल्दी समझ जाएंगी। ऐसे में उपरोक्त सभी गांवों में व्यापक तरीके से अभियान चलाकर ग्रामीणों को शिक्षित किया जाएगा।
-सतिंद्र सिवाच, बीडीपीओ, डबवाली
जिला सिरसा का लिंगानुपात 1000 : 914 हैं। जबकि खंड डबवाली का ओवरऑल लिंगानुपात 1000 : 935 है। इस बार करीब पचास फीसदी महिला सरपंच बनकर आई हैं। वह भी पढ़ी-लिखी। ऐसे में लिंगानुपात जैसी बुराई के खिलाफ आसानी से लड़ा जा सकता है।
-एमके भादू, एसएमओ, डबवाली