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हैरतअंगेज : जिन गांवों में महिलाओं की चौधर, वहां लिंगानुपात बहुत कम

Mon, 04 Jul 2016 01:37 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
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gender - फोटो : demo
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यूं तो डबवाली क्षेत्र का लिंगानुपात जिला सिरसा में बेहतर है। जिले का 1000 : 941 है तो डबवाली का 949 है। स्वास्थ्य विभाग ने सुधार की गुंजाइश में तथ्य जुटाने शुरू कर दिए हैं। सामने आया है कि कम जनसंख्या वाले गांवों में लिंगानुपात कम है। इन गांवों में विभाग ने योजनाबद्ध तरीके से काम करना शुरू कर दिया है। विभाग ऐसे दंपतियों पर  कड़ी नजर रख रहा है। जिनके एक बेटी है और दूसरे बच्चे की चाह है, उन पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
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जनस्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो बड़े गांवों में स्थिति ठीक है। विभाग उन गांवों पर ज्यादा फोकस कर रहा है, जिनमें लिंगानुपात 800 से भी नीचे है। खंड डबवाली में ऐसे 11 गांव हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि खराब प्रदर्शन करने वाले गांवों की कमान महिलाओं के हाथ में है। जिसमें गांव गिदड़खेड़ा, झुट्टीखेड़ा, लखुआना, रामपुरा बिश्नोइयां सहित अहमदपुर दारेवाला शामिल हैं। उपरोक्त पांचों गांवों में महिला सरपंच होते हुए भी लिंगानुपात 273 से 750 तक है। इस शर्मनाक परिणाम के बाद विभाग ने गांव के एलिजिबल कपल की एक सूची बनानी शुरू कर दी है।

नवविवाहिताओं के साथ-साथ उन कप्पल की पहचान भी की जा रही है, जिनके एक बेटी है। ऐसे कपल को ट्रैक किया जा रहा है। साथ में ग्रामीण आंचल में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के प्रति भी जागरूक कर रहा है। डबवाली के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी एमके भादू ने बताया कि जांच में सामने आया है कि यहां जनसंख्या कम हैं, वहां लिंगानुपात भी कम है। चूंकि ऐसे गांवों में एलिजिबल कपल की संख्या काफी कम होती है। हम 1000 : 949 के लिंगानुपात के साथ जिला सिरसा में आगे हैं। बेहतर प्रदर्शन करने के लिए मेहनत कर रहे हैं।
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रानियां, कालांवाली ने बढ़ाई चिंता
रानियां तथा कालांवाली ने विभाग की चिंता बढ़ा रखी है। उप सिविल सर्जन वीरेश भूषण का कहना है कि एएनएम तथा आशा वर्कर को दो माह का समय दिया गया है। इस दौरान परिणाम बेहतर नहीं आया तो उन पर कड़ी कार्रवाई होगी। विभाग ब्लाक हेडक्वार्टर पर जाकर कमियों के बारे में जानकारी प्राप्त कर रहा है। ताकि उसे दूर किया जा सकें।
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