संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। सरकार चाहे स्वच्छता को लेकर गंभीर हो, लेकिन धरातल पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। शहर में स्वच्छता के महाअभियान के दौरान की गई खानापूर्ति की पोल मुख्यमंत्री उड़नदस्ते की रिपोर्ट में खुली है। यह रिपोर्ट सीएम को भेजी गई है। इसमें खुले में कचरा डालने का जिक्र है। डंपिंग साइट पर बेसहारा पशुओं के जमावड़े और गंदगी खाते की फोटो भी साथ लगाई गई है।
हैरानी की बात है कि ऐसा आलम तब है, जब क्लस्टर स्तर पर एजेंसी लगाई गई है। एजेंसी के अनुबंध में साफ शब्दों में जिक्र किया गया है कि एजेंसी को अपने सभी डंपिंग प्वाइंट ढककर रखना है, लेकिन ऐसा कहीं भी नजर नहीं आता है। इतना ही नहीं, नगर परिषद के अधिकारी भी चार महीने से इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं। नियमानुसार एजेंसी को जगह देने की जिम्मेदारी नगर परिषद प्रशासन की तय की गई है।
बता दें कि शहर को स्वच्छ बनाने के लिए पिछले दिनों महाअभियान चलाया गया था। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर राजनेता भी फोटो खिंचवाते नजर आए थे। इस अभियान की हकीकत जानने के लिए शुक्रवार को मुख्यमंत्री उड़नदस्ते सिरसा पहुंचा था। सब इंस्पेक्टर राजेश कुमार, जिला कल्याण अधिकारी राकेश कुमार के साथ सुबह सात बजे भगत सिंह चौक पर पहुंचे और सफाई कर्मचारियों की हाजिरी जांची। इसे बाद नगर परिषद में जाकर हाजिरी व स्वच्छता अभियान के दौरान प्रयोग की गई मशीनरी का रिकॉर्ड अपने साथ ले गए। अब टीम ने अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी है। इसमें अग्रवाल कॉलोनी , सीडीएलयू मिनी बाइपास, नागरिक अस्पताल सहित कई एरिया की पशुओं के खुले में कचरा खाने का जिक्र किया है।
पॉलीथिन खाने से होती है बेसहारा पशुओं की मौत
भले ही सरकार ने जुलाई 2022 से सिंगल यूज प्लास्टिक बैन कर दिया हो, लेकिन आज भी इसी बिक्री जारी है। इसका खामियाजा पर्यावरण के साथ बेसहारा पशुओं को भुगतना पड़ रहा है। शहर के मुख्य डंपिंग प्वाइंटों पर बड़े स्तर पर बेसहारा पशु पॉलीथिन खाते नजर आते हैं। जिससे उसकी मौत होती है।
डपिंग प्वाइंटों को किया जाना था कवर्ड
प्रदेश सरकार ने सिरसा में पूजा कंसलटेंट एजेंसी के साथ कचरा निस्तारण का अनुबंध किया है। नियमानुसार कंपनी को सभी डंपिंग प्वाइंटों को कवर्ड करना था और नगर परिषद को उसे जगह उपलब्ध करवानी थी। लेकिन दोनों ही इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। एक मात्र बस स्टैंड के पास कवर्ड बने डंपिंग प्वाइंट को गेट तक एजेंसी ने बंद करने की जहमत नहीं उठाई।
कोट्स
हमारे पास चार महीने से अनुबंध आया है। पिछले 20 सालों से ऐसे ही चला आ रहा है। धीरे-धीरे व्यवस्था में सुधार किया जाएगा। कोशिश रहेगी डंपिंग प्वाइंटों से समय पर कूड़ा उठाया जाए। - जतिन कुमार, सुपरवाइजर, पूजा कंसलटेंट।
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हमारी ओर से कोशिश की जा रही है कि ज्यादा से ज्यादा डंपिंग प्वाइटों को खत्म किया जाएगा। बेसहारा पशुओं को पकड़ने के लिए अधिकारियों के साथ गोशाला प्रबंधकों की बैठक की जाएगी। डंपिंग प्वाइंटों पर कचरा तुरंत प्रभाव से उठाया जाएगा। - जयवीर सिंह, सीएसआई, नगर परिषद