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Sirsa News: गदली का पशु अस्पताल खुद बीमार, मवेशियों के इलाज के लिए भटकते हैं पशुपालक

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गांव गदली ​​​स्थित पशु अस्पताल।
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डिंग मंडी। गांव गदली में स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय पिछले दस वर्षों से बंद पड़ा है। अस्पताल भवन की हालत जर्जर हो चुकी है और चारों ओर झाड़ियां व घास उगी हैं। पशुचिकित्सा सेवाओं के अभाव में गांव के पशुपालकों को मामूली इलाज के लिए भी डिंग मंडी या सिरसा शहर जाना पड़ता है। कई बार समय पर चिकित्सा न मिलने से मवेशियों की मौत तक हो जाती है।
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ग्रामीण मनोज ने बताया कि हमारे लिए पशु आय का मुख्य स्रोत हैं, लेकिन इलाज के अभाव में कई बार पशु रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। सरकार की तरफ से अस्पताल भवन तो है, लेकिन डॉक्टर और स्टाफ की तैनाती न होना गंभीर लापरवाही है। ग्रामीणों की मांग है कि पशुपालन उनकी आजीविका का अहम हिस्सा है, ऐसे में अस्पताल को जल्द चालू किया जाए। साथ ही अस्पताल परिसर की सफाई व जल निकासी व्यवस्था भी सुधारी जाए, जिससे महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को राहत मिल सके।
जलभराव से बदहाल हैं गांव की गलियां
गांव के सरपंच जयंत सिंह ने बताया कि बरसात के मौसम में गांव की कई गलियां कीचड़ और गंदे पानी से भर जाती हैं। खासकर बन मंदोरी की ओर जाने वाली गलियां और नारायण खेड़ा मोड़ क्षेत्र में पानी की निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है। उन्होंने बताया कि टूटी हुई नालियों और रुके हुए पानी के कारण बच्चों व बुजुर्गों को फिसलने और गिरने का खतरा बना रहता है।
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उन्होंने कहा कि मच्छरों के पनपने से बीमारियों का खतरा भी लगातार बना हुआ है। बच्चों को स्कूल जाने के लिए कीचड़ और गंदगी से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे दुर्घटनाएं भी होती हैं। सरपंच ने प्रशासन से मांग की कि जल्द ही गांव की जल निकासी और साफ-सफाई की व्यवस्था दुरुस्त की जाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके।
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पशु चिकित्सालय के लिए हमने कई बार विभाग को पत्र लिखा। अधिकारियों का कहना है कि स्टाफ नहीं है। हम फिर से मांग उठाएंगे कि गांव में डॉक्टर व सहायक की नियुक्ति की जाए। वहीं, गांव में कुछ गलियों में इंटरलॉकिंग टाइल्स अधूरी हैं और नाली निर्माण की योजना प्रस्तावित है। बजट की स्वीकृति मिलते ही काम शुरू करवाया जाएगा। -
जयंत सिंह, सरपंच, गदली।



गांव गदली की जनसंख्या और पशुओं की संख्या इतनी नहीं है कि वहां स्थायी रूप से डॉक्टर या अन्य स्टाफ की तैनाती की जा सके। विभाग द्वारा पशु अस्पताल की स्वीकृति के लिए कुछ न्यूनतम मानक निर्धारित किए गए हैं और फिलहाल यह गांव मानकों पर खरा नहीं उतरता। इसलिए यहां अभी नियमित चिकित्सक की नियुक्ति नहीं की जा सकती। - उप निदेशक सुखविंदर सिंह, पशुपालन विभाग।
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