संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। भले ही इस बार पराली जलाने के मामले कम आए हैं, लेकिन दिवाली के बाद से प्रदूषण के स्तर में इजाफा हो रहा है। इस सीजन में पहली बार वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 300 को पार कर बहुत खराब श्रेणी में पहुंच गया। सोमवार को रात आठ बजे प्रदूषण का औसतन स्तर 305 एक्यूआई दर्ज किया गया। हवा की गुणवत्ता बेहद खराब रही जो स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है।
बता दें कि दिवाली के बाद से सिरसा जिले में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। रविवार को प्रदूषण का स्तर 200 एक्यूआई दर्ज किया गया था। शहर में स्मॉग की चादर रविवार रात ही छाने लगी थी। सोमवार सुबह जब लोग घरों से बाहर निकले तो चारों ओर धुआं ही धुआं दिखाई दिया। पार्कों में सैर करने पहुंचे लोगों को आंख-नाक में जलन के साथ ही सांस लेने में दिक्कत हुई। सोमवार को सुबह के समय एक्यूआई 239 दर्ज किया गया। इसके बाद प्रदूषण के स्तर में लगातार बढ़ोतरी होती रही। शाम पांच बजे एक्यूआई 289 व शाम सात बजे एक्यूआई 299 दर्ज किया गया। इसके बाद रात आठ बजे एक्यूआई 300 पार करके 305 तक पहुंच गया। वहीं, आसमान में सुबह और शाम धुंध छाई रही। इससे लोगों को आंखों में जलन संबंधी दिक्कतें झेलनी पड़ीं। रविवार के मुकाबले सोमवार को प्रदूषण का स्तर 105 एक्यूआई बढ़ा है। इस सीजन में पहले बार एक्यूआई 300 के पार पहुंचा है।
इस प्रदूषण के स्तर में सुबह की सैर करना सभी लोगों के लिए हानिकारक होता है। हवा में कार्बन और पीएम 10 की मात्रा की अधिकता होती है। जो सांस के साथ शरीर में जाती है और फेंफड़ों को नुकसान पहुंचाती है।
बॉक्स
प्रदूषण के चार कारण
1. वाहन का धुआं
2. पटाखों का धुआं
3. पराली जलाना
4. फैक्टरियों का धुआं
इस प्रकार रहा है साल दर साल दिवाली के अगले दिन का एक्यूआई
वर्ष : एक्यूआई
2018 : 434
2019 : 444
2020 : 462
2021 : 380
2022 : 188
2023 : 246
न्यूनतम तापमान में आ रही निरंतर गिरावट, 16.1 डिग्री पहुंच तापमान
जिले के न्यूनतम तापमान में भी निरंतर गिरावट दर्ज की जा रही है। सोमवार को न्यूनतम तापमान में 1.5 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। जिले का न्यूनतम तापमान 16.1 डिग्री व अधिकतम तापमान 33.2 डिग्री दर्ज किया गया। अधिकतम तापमान में भी 1.7 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई है।
कोट्स
प्रदूषण के स्तर में इजाफा देखने को मिला है। विभिन्न कारणों से प्रदूषण का स्तर बढ़ा है। जहां न्यूनतम तापमान में तेजी से कमी आ रही है। वहीं, हवा नहीं चलते से सारा धुंआ वातावरण में जमा हो गया है। इसमें पटाखों से लेकर वाहनों तक का धुंआ है। कई अन्य कारक भी वातावरण को प्रदूषित कर रहे हैं। पराली को लेकर हमारे अधिकारी फील्ड में जाकर जागरूक कर रहे हैं। - विनोद बाल्यान, रीजनल ऑफिसर, प्रदूषण बोर्ड, सिरसा