आपदा प्रबंधन के प्रबंधों पर नजर डालें तो मात्र औपचारिकता ही दिखाई पड़ती हैं। व्यवस्था के अनुसार आपदा आने पर ही प्रबंधों की व्यवस्था होती है। जिले में हर वर्ष घग्घर नदी की बाढ़ की संभावना बनी रहती है इस लिए नदी की बाढ़ से पूर्व तैयारियों को लेकर साढ़े चार लाख रुपये सालाना बजट आवंटित होता है। इसके अलावा किसी भी आपदा के लिए पहले कोई बजट नहीं मिलता। किसी प्रकार की आपदा आने के पर ही बजट जारी होता है जिसकी कोई समय सीमा नहीं होती।
किसी भी प्रकार की आपदा के लिए पहले से कोई बजट जारी नहीं होता। केवल घग्घर नदी की बाढ़ के मद्देनजर साढ़े चार लाख रुपये सलाना जारी होते हैं जिससे बाढ़ रोकथाम के प्राथमिक कार्यों पर और आपदा प्रबंधन के प्रशिक्षण शिविरों पर खर्च किए जाते हैं। इसके अलावा किसी प्रकार की आपदा आने पर ही बजट जारी होता है। आपदा के लिए बजट फिक्स नहीं होता क्योंकि आपदा आने पर पहले से उसका कोई अनुमान नहीं लगाया जा सकता।
वर्ष 2010 में घग्घर नदी में बाढ़ आई थी जिसने खूब कहर बरपाया था। उस वक्त राहत कार्यों पर खर्च की जाने वाली राशि करोड़ों में थी। जिला राजस्व अधिकारी को आपदा प्रबंधन का नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। राजस्व विभाग में बाढ़, आगजनी,
सूखा, तूफान, ओलावृष्टि आदि को लेकर अलग-अलग सैल बनाए गए हैं। फिलहाल बाढ़ सेल को छोड़कर किसी भी सैल के पास बजट नहीं है और न ही पूर्व के वर्षों में आया।
बांधों की मजबूती के लिए प्रस्ताव के अनुसार बजट आता है जो निर्धारित नहीं है। हर वर्ष बांधों की मजबूती का कार्य होता है इस लिए ज्यादा बजट की आवश्यकता नहीं पड़ती। आपदा प्रबंधन के जिला नोडल अधिकारी अमी चंद सैनी ने बताया कि आपदा को लेकर जो प्राथमिक तैयारियां होती है वे सब पूरी हैं और किसी प्रकार की आपदा आती है तो मौके और हालात के अनुसार कार्रवाई की जाती है।
हमारी तैयारी पूरी है: सोखल
बाढ़ राहत प्रशिक्षक रणजीत सोखल ने बताया कि बाढ़ की आशंका को लेकर राहत कार्यों के लिए हमारी पूरी तैयारी है। इसी कड़ी में सोमवार को सभी मोटर वोट का ट्रायल लिया जाएगा। 10 गोताखोर और छह कैनाल गार्ड भी हमारी टीम में शामिल हैं ताकि कहीं पर भी जरूरत पडने पर लोगों की मदद की जा सके। इसके अलावा 11 किश्ती, पांच मोटर वोट, 85 लाइफ जैकेट, 35 चप्पू, दो ऑक्सीजन सिलेंडर का प्रबंध किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि सोमवार को प्रशासनिक अधिकारी बाढ़ राहत कार्यों का जायजा भी लेंगे।
जिले का बांटा आठ जोन में
प्रशासन ने घग्घर में बाढ़ की संभावना को लेकर राहत कार्यों में तेजी कर दी है। सभी राहत कार्य 30 जून तक पूरे कर लिए जाएंगे। पंजाब से राजस्थान सीमा तक घग्घर को आठ जोन में बांटा गया है और हर जोन में एक ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया है। तटबंधों का मजबूतीकरण जोरों से हो रहा है इसके अलावा ड्रेनों और फलड्डी नहरों की सफाई की गई है। घग्घर जल सेवाएं मंडल के कार्यकारी अभियंता एनके भोला ने बताया कि नदी के आसपास के गांवों के सरपंचों से संपर्क किया जा रहा है ताकि वे बांध की स्थिति के बारे में बता सकें। उन्होंने बताया कि सभी 419 प्वांइटों का निरीक्षण कर लिया गया है। बाढ़ के मद्देनजर कंट्रोल रूम स्थापित कर दिया गया है। विभिन्न विभागों से कर्मचारी व अधिकारी एक जुलाई से 30 सितंबर तक (बाढ़ सीजन) इस ड्यूटी से जुड़े रहेंगे। इस दौरान 24 घंटे शिफ्टों में कर्मचारियों व अधिकारियों की तैनाती रहेगी।
60 किलो मीटर से अधिक लंबाई है बांध की
घग्घर के दोनों और बनाया गया बांध जिले की सीमा में 60 किलो मीटर से भी अधिक लंबा है। विभाग के अनुसार ओटू से राजस्थान सीमा तक करीब 30 किलो मीटर की लंबाई इस बांध की है जबकि ओटू से पंजाब सीमा की ओर फरवाईं कलां तक 26.70 किलो मीटर बांध की लंबाई है। फरवाईं कलां से मुसाहिबवाला (पंजाब सीमा) तक दूसरे विभागों के तहत बांध बनाया गया है। बता दें कि बांध की मजबूती के लिए हर वर्ष कार्य किया जाता है।