कपास की फसल में रोग-कीट नियंत्रण पर किसानों को मिला वैज्ञानिक प्रशिक्षण
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संवाद न्यूज एजेंसी
डिंग मंडी। डिंग की पुरानी अनाज मंडी में मंगलवार को किसानों के लिए कृषि प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों और वैज्ञानिक खेती के नवीन तरीकों से अवगत कराना था। विशेषज्ञों ने उत्पादन बढ़ाने, लागत कम करने और गुणवत्तापूर्ण उपज प्राप्त करने के उपाय बताए।
प्रशिक्षण में किसानों को फसल सुरक्षा और उर्वरकों व कीटनाशकों के संतुलित उपयोग की जानकारी दी गई। केंद्र व राज्य सरकार की किसान कल्याणकारी योजनाओं पर भी विस्तार से बताया गया। विशेष रूप से कपास (नरमा) की फसल में आने वाले प्रमुख रोगों और कीटों पर चर्चा हुई।
विशेषज्ञों ने गुलाबी सुंडी, सफेद मक्खी, तेला, नेमाटोड और उखेड़ा रोग की पहचान सिखाई। उनकी रोकथाम और वैज्ञानिक उपचार के बारे में भी किसानों को बताया गया। केंद्रीय कपास अनुसंधान केंद्र सिरसा के वैज्ञानिक सतीश सेन ने समेकित कीट एवं रोग प्रबंधन (आईपीएम) अपनाने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि नियमित फसल निरीक्षण से फसल नुकसान कम होता है। चंबल फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड के पंकज गिल ने मृदा स्वास्थ्य के महत्व पर प्रकाश डाला।
मृदा स्वास्थ्य और उर्वरक उपयोग
पंकज गिल ने मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मृदा परीक्षण के आधार पर ही संतुलित उर्वरकों का प्रयोग जरूरी है। गिल ने हरी खाद के उपयोग को बढ़ावा देने की अपील की। इससे भूमि की उत्पादकता लंबे समय तक बनी रहती है। रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता भी कम होती है।
कार्यक्रम में उपस्थिति और किसानों की प्रतिक्रिया
इस कार्यक्रम में सतीश सेन, पंकज गिल, सुनील लांबा और कुबेर सिंह उपस्थित रहे। मार्केट कमेटी उपाध्यक्ष मनोज खुराना और सचिव रामजीलाल भी मौजूद थे। बड़ी संख्या में किसानों ने भी इसमें भाग लिया। किसानों ने विशेषज्ञों से अपनी फसलों की समस्याओं पर चर्चा की और समाधान प्राप्त किए। उन्होंने प्रशिक्षण को उपयोगी बताते हुए भविष्य में ऐसे और कार्यक्रम आयोजित करने की मांग की।