संवाद न्यूज एजेंसी
राजू
ओढां। अरंडी व्यावसायिक तिलहनी फसल है। इसकी खेती के लिए अधिक संसाधनों की जरूरत नहीं होती। पिछले कुछ वर्षों से नरमे की फसल में लगातार हो रहे घाटे के कारण किसानों ने इस बार खरीफ के सीजन में नरमे के साथ परीक्षण के तौर पर करीब 100 एकड़ रकबे में अरंडी की बिजाई की है।
ओढां खंड के गांव नुहियांवाली में इस बार किसानों ने अधिक रकबे में अरंडी की फसल की बिजाई की है। इससे पहले गांव में कम लोग ही अरंडी की बिजाई करते थे। इस साल अरंडी की बिजाई करने वाले किसानों ने इस फसल को मुनाफे का सौदा बताया। किसानों के मुताबिक नरमे के बजाय अरंडी में मुनाफा ज्यादा है। आगामी समय में इसका रकबा बढ़ाएंगे। संवाद
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पिछले करीब पांच वर्षों से अरंडी की खेती कर रहा हूं। शुरुआत में जब मैंने फसल बोई थी तो कई लोगों ने टोका भी था। उन्होंने कहा कि ये कौन सी फसल है। ये तो सुंडी का घर है। इससे अच्छा तो सामान्य फसल ही बो लेता। पहली बार इस बारे में जानकारी कम थी, लेकिन इधर-उधर से जानकारी लेकर ट्रायल के तौर पर पांच एकड़ रकबे में अरंडी की बिजाई की। इसकी लागत तो नाममात्र की रही। फसल और आमदनी अच्छी हुई। इसके बाद से मैं पिछले कई वर्षों से लगातार अरंडी की बिजाई कर रहा हूं। इस समय मेरे साढ़े चार एकड़ खेत में अरंडी की फसल बिल्कुल तैयार है लेकिन सिरसा मंडी में इसे बेचने की व्यवस्था न होना बड़ी समस्या है। - दयाराम सुथार।
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न ज्यादा सिंचाई करनी पड़ी न कीटनाशकों का खर्च। इसलिए किसानों को इसकी बिजाई अधिक करनी चाहिए। मैंने इस वर्ष पहली बार छह एकड़ रकबे में बिजाई की है। नरमे की फसल में लगातार हो रहे घाटे के कारण मैंने इसे विकल्प के तौर पर आजमाया। फसल बेहद अच्छी है। अरंडी की बिजाई से लेकर कटाई तक करीब 30,000 रुपये खर्च आएगा जबकि नरमे की इतनी खेती पर करीब डेढ़ लाख रुपये खर्च आता। अगली बार अन्य फसल को घटाकर अरंडी का दायरा बढ़ाएंगे। - सुनील सहारण।
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पिछले कुछ वर्षाें से नरमे की फसल तो लगातार घाटे का सौदा बन रही है। कीटनाशकों पर अधिक खर्च करने के बाद भी कुछ बचने की उम्मीद नहीं। ऐसे में मैंने इस बार आठ एकड़ रकबे में अरंडी की बिजाई कर दी। अन्य फसलों की अपेक्षा लागत खर्च बेहद कम आई। पहले कोई अनुभव भी नहीं था। मेरे पास पांच एकड़ में नरमा भी है लेकिन ये फसल घाटे में है। क्योंकि कीटनाशक, बिजाई और मजदूरी का खर्च अधिक होने के कारण मुनाफा तो दूर लागत भी मिलना मुश्किल है। - राजकुमार देमीवाल।
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अरंडी की फसल काफी फायदे का सौदा है। इससे जल की भी बचत होती है लेकिन क्षेत्र में अरंडी का मंडीकरण न होने के कारण फसल बेचने के लिए दूसरे क्षेत्रों में जाना पड़ता है। अगर यहां इस फसल की खरीद शुरू होगी तो काफी फायदा मिलेगा। किसान अन्य फसलों के साथ अरंडी की भी बिजाई करें क्योंकि अगर दूसरी फसल में घाटा होता है तो ये फसल उसे पूरा कर देगी। मैंने इस बार अढ़ाई एकड़ में अरंडी की बिजाई की है। फसल बेहद अच्छी हुई है। अगली बार दायरा बढ़ाने की इच्छा है। - कन्हैया लाल।
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अरंडी कम पानी और कम खर्चे की एक अच्छी तिलहन फसल है। पिछले कुछ समय से किसानों का इस फसल की ओर रुझान काफी बढ़ा है। ओढां खंड के 8-9 गांवों में किसानों ने अरंडी की बिजाई की है। प्रति एकड़ आठ से 10 क्विंटल का उत्पादन है। किसान किसी भी प्रकार के मौसम में इसकी बिजाई कर सकते हैं। अरंडी के दाम भी अच्छे हैं। अच्छी बात तो ये है कि इस फसल को पशु-पक्षी कोई नुकसान नहीं पहुंचाते। खाद-पानी की भी कोई ज्यादा जरूरत नहीं। रोग भी कम लगते हैं। किसान अन्य फसलों के साथ अरंडी की बिजाई भी अवश्य करें। हालांकि अभी इसकी ज्यादातर खेती राजस्थान क्षेत्र में होती है। - रमेश सहु, सहायक तकनीक अधिकारी, कृषि विभाग, ओढां।