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गांव कुम्हारिया के किसान पवन बैनीवाल को किन्नू के बाग ने किया मालामाल

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किन्नू के बाग में ट्रेक्टर पर भोजन करते किसान पवन बेनीवाल। - फोटो : Sirsa
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चोपटा। राजस्थान की सीमा से सटे हरियाणा के पैंतालिसा क्षेत्र में रेतीली जमीन है। प्रदेश के अंतिम छोर पर पड़ने के कारण हमेशा सिंचाई के पानी की कमी रहती है। जिस कारण परंपरागत खेती से आमदनी कम हो जाती है। ऐसे में आर्थिक स्थिति की खराब होने लगती है। ऐसे में गांव कुम्हारिया (सिरसा) के किसान पवन बैनीवाल ने अतिरिक्त कमाई का जरिया खोजा। उसने अपने घर की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाए रखने के लिए वर्ष 2008 में 15 एकड़ भूमि में किन्नू का बाग लगाया। इससे पवन को परंपरागत कृषि के साथ अतिरिक्त आमदनी भी शुरू हो गई। पवन को 70 हजार रुपये प्रति एकड़ की कमाई होने लगी यानी हर वर्ष करीब 10 लाख रुपये की अतिरिक्त कमाई। लीक से हटकर कुछ करने के जज्बे ने पवन को हरियाणा के साथ-साथ निकटवर्ती प्रदेश राजस्थान के आसपास के गांवों में अलग पहचान भी दिलवाई। संवाद
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ससुराल से मिली प्रेरणा किन्नू का बाग लगाने की प्रेरणा
पवन बैनीवाल ने बताया कि रेतीली जमीन व नहरी पानी की हमेशा कमी के कारण परंपरागत खेती में अच्छी बारिश होने पर ही बचत होती है। अगर बारिश नहीं हो तो घाटा ही लगता। एक दिन व अपनी ससुराल डिंगावाली (पंजाब) में गया था। वहां पर उसने किन्नू के बाग देखे। कतार में लगे पौधों के बीच में अन्य फसलों (गेहूं, सरसों आदि) की बिजाई की हुई थी। वहां से किन्नू के बाग के बारे में पता कर गांव लौटकर 15 एकड़ जमीन में किन्नू का बाग लगाया। किन्नू के पौधों में जल्दी सिंचाई की जरूरत नहीं होती। पवन ने बताया कि अब इस जमीन में किन्नू के पौधों के साथ साथ मौसमी फसलें गेंहू, सरसों, ग्वार बाजरा व कपास नरमे की खेती भी करता है। शुरू में तो किन्नू के बाग से उसे 5 लाख रुपये सालाना अतिरिक्त आमदनी होने लगी है। लेकिन अब हाल के वर्षों में 70 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से करीब 10 लाख रुपये अतिरिक्त आमदनी होने लगी। पवन बैनीवाल ने बताया कि उसने सबसे पहले गांव में किन्नू का बाग लगाया। उसके बाग को देखकर गांव के अन्य किसानों ने भी किन्नू के बाग लगाकर अतिरिक्त कमाई शुरू कर दी है। पवन ने बताया कि पास लगती राजस्थान की तहसील भादरा के कई गांवों के किसान किन्नू का बाग देखने के लिए आते हैं। ताकि उनकी परंपरागत खेती के अन्य अतिरिक्त कमाई भी शुरू हो सके। पवन ने बताया कि वह सब्जियां अपने खेत में ही उगाता है कभी भी बाजार से नहीं लाता। मौसम के अनुसार बैंगन, घीया, तोरी, टमाटर, लहसून, प्याज, गाजर इत्यादि उगा लेता है।
पानी की कमी पूरी करने के लिए खेत में बनवाई डिग्गी
पवन बैनीवाल ने बताया कि सरकार के सहयोग से उसने खेत में एक पानी की डिग्गी भी बना ली है। उस डिग्गी में पानी इक्ट्ठा करके रखता है जब भी किन्नू के पौधों व फसलों सिंचाई की जरूरत होती है, तो इस डिग्गी से इनकी कमी पूरा कर लेता है। सिंचाई ड्रिप सिस्टम द्वारा की जाती है, जिससे पानी व खाद व दवाई सीधे पौधों को मिल जाती है तथा पानी भी बेकार नहीं जाता। पवन ने बताया कि आस पड़ोस के किसानों को जब भी सिंचाई के पानी की जरूरत नहीं होती तो वह उन किसानों से किराये पर पानी लेकर डिग्गी भर लेता है। डिग्गी में मछली पालन से भी उसे अतिरिक्त कमाई होती है।
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चोपटा में मंडी व वैक्सिंग प्लांट लगाया जाए
पवन बैनीवाल ने बताया कि उसके गांव से सिरसा मंडी 37 किलोमीटर दूर पड़ती है। जिससे फलों को वहां ले जाकर बेचने में यातायात खर्च ज्यादा आता है तथा बचत कम होती है। इसके अलावा नजदीक में कोई वैक्सिंग प्लांट भी नहीं है जिसमें की फलों को संभाल कर रखा जाए। उसका कहना है कि अगर फलों की मंडी नाथूसरी चोपटा में विकसित हो जाए तो यातायात खर्च कम होने से बचत ज्यादा हो जाएगी। साथ ही चोपटा में एक वैक्सिंग प्लांट भी लगाया जाए।
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