गांव फग्गू में पिछले लंबे समय से लग रहे पशु मेले का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। यह मेला सिरसा शहर से लगभग 40 किलो मीटर दूर गांव फग्गू में लगता है। विवाद के चलते गांव में दो पक्ष आमने-सामने आ गए हैं। इस विवाद के मद्देनजर कुछ दिन पूर्व एडीसी सिरसा ने फग्गू में पहुंचकर दोनों पक्षों से बातचीत करते हुए पूरे मामले की जानकारी ली। जिसके बाद उच्चाधिकारियों द्वारा मेले को पुरानी जगह पर ही लगवाने के आदेश जारी किए गए। बतादें कि इस मामले में पहला पक्ष गुरुद्वारा कमेटी और दूसरा पक्ष पंचायती सदस्य हैं।
रविवार को पशु मेला पुरानी जगह गुरुद्वारा कमेटी की जमीन पर ही लगाया गया। हालांकि इससे पहले उक्त मेला पिछली दो बार पंचायत की जगह में लगा था। इस बार भी दूसरे पक्ष को ये उम्मीद थी कि मेला इसी जगह लगेगा। जिसको लेकर कमेटी की ओर से सभी तरह की तैयारियां की गई थी। मेला पुरानी जगह पर लगने के चलते पंचायत व लोगों में रोष भी देखा गया। किसी विवाद की आशंका के चलते हर बार की तरह इस बार भी ड्यूटी मजिस्ट्रेट व पुलिस बल मौजूद रहा।
सरपंच बोले- मेला निजी जगह की बजाए पंचायती जगह पर लगे
पशु मेला पुरानी जगह पर लगने के विरोध में काफी संख्या में महिलाएं व पुरुष एकत्रित हो गए और सांकेतिक धरना देते हुए इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि पशु मेला निजी जगह की बजाए पंचायती जगह पर ही लगाया जाना चाहिए। मौके पर मौजूद सरपंच बलजीत सिंह व पूर्व सरंपच राज सिंह सहित अन्य लोगों ने विरोध जताते हुए कहा कि ये पशु मेला राजनीतिक लोगों का शिकार हो चुका है। जिसके चलते अधिकारी दबाव में आकर कभी पुुरानी जगह तो कभी नई जगह पर पशु मेला लगवाने के आदेश जारी कर रहे हैं। लोगों ने कहा कि उन्होंने पंचायती भूमि पर पशु मेले में आने वाले व्यापारियों के लिए लंगर तैयार किया था, लेकिन पुरानी जगह पर मेला लगवाने से उनका काफी नुकसान हुआ है। क्योंकि मेले का स्थान बदलने को लेकर उन्हें किसी तरह की कोई लिखित सूचना नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि अफसरों की मनमानी के खिलाफ वे मुख्यमंत्री व उपायुक्त से मिलेंगे। अगर इसके बाद भी उनकी मांग पूरी नहीं की गई तो पंचायत सहित ग्रामीण धरना देने पर मजबूर होंगे।
उन्होंने बताया कि पहली बार करीब 8 लाख व दूसरी बार करीब 6 लाख का राजस्व एकत्रित हुआ लेकिन पुरानी जगहों पर 3 से 4 लाख रुपये का ही राजस्व मिलता था। ऐसे में अवैध रूप से बने पशु बाड़ों से बड़ा गोलमाल किया जा रहा है। इन पशु बाड़ों को बंद करवाने के लिए पंचायत समिति के चेयरमैन गुरविन्द्र सिंह व पंचायत द्वारा उच्चाधिकारियों को शिकायत की गई थी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा कि गुरुद्वारा पातशाही आठवीं के पास कुछ लोगों के निजी प्लॉट है जिनमें अवैध तरीके से पशु बाड़ा बनाए हुए हैं।
गुरुद्वारा कमेटी के सदस्य बोले- 14 साल से इसी जगह पर लग रहा है मेला
वहीं गुरुद्वारा कमेटी के सदस्य रामसिंह व अन्य लोगों ने बताया कि गुरुद्वारा के पास जमीन खुली है और अच्छे तरीके से व्यापारियों की सुरक्षा के इंतजाम किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 14 वर्षों से इसी जगह पर मंडी का आयोजन किया जाता है, अधिकारियों के आदेशों पर इसी जगह पर दोबारा मंडी लगवाने का प्रबंध किया गया है। इस मेले में न तो गुरुद्वारा की तरफ से अवैध तरीके से कोई फीस वसूली जाती है और न ही उनके द्वारा पशु बाड़ा बनाकर कोई अवैध कार्य किया जाता है। गुरुद्वारा की तरफ से सिर्फ मेले में आने वाले व्यापारियों के लिए लंगर का प्रबंध किया जाता है। गुरुद्वारा में आने वाली हर संगत के लिए लंगर की सेवा करना ही गुरुओं द्वारा बताई गई पुरातन रीत का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि हमने मेले को लेकर कोई राजनीतिक दबाव नहीं बनाया। मेले को लेकर एडीसी व अन्य अधिकारी आकर जायजा ले चुके हैं। मेला अधिकारियों के ही आदेश के बाद लगाया गया है।
अधिकारियों के आदेशों पर ही पुरानी जगह पर मेला लगवाया गया है। किसी तरह की अवैध वसूली या अवैध पर्ची न काटने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। जहां उच्चाधिकारियों द्वारा आदेश दिए गए वहीं पर आयोजन किया जाएगा।
- ओमप्रकाश, बीडीपीओ (बडागुढ़ा)