चोपटा। खंड के गांव लुदेसर में कृषि विभाग की ओर से धान की सीधी बिजाई हेतु किसान जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें 60 किसानों ने भाग लिया। इसके साथ ही शिविर में किसानों को नरमे की फसल में गुलाबी सुंडी होने के कारण, निवारण ओर सावधानियों के बारे में जानकारी दी गई।
कृषि विकास अधिकारी डॉ. शैलेंद्र सहारण ने बताया कि कृषि विभाग से बिटीएम डॉ. महेंद्र सिंह, एटीएम डॉ. होशियार सिंह, डॉ. रविंद्र कुमार व सुपरवाइजर पवन कासनिया ने विभागीय योजनाओं की जानकारी दी है। इस मौके पर सहारण ने कहा कि अगर किसान धान की सीधी बिजाई करता है तो प्रदेश सरकार 4000 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से उसके खाते में सब्सिडी दे रही है। डीसीआर ऑनलाइन करवाने हेतु किसान सीएससी सेंटर पर जाकर मेरी फसल मेरा ब्योरा से धान की सीधी बिजाई का फार्म भर सकते हैं। जिसकी अंतिम तारीख 10 जुलाई है।
इसके अलावा किसानों को कृषि विकास अधिकारी डॉ. शैलेंद्र सहारण ने नरमे की फसल पर गुलाबी सुंडी व सफेद मक्खी के नियंत्रण ओर मूंगफली व ग्वार फसल पर लगने वाली फफूंद के बारे जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कपास की फसल में गुलाबी सुंडी की निगरानी फूलों व टिंडो पर करें। फलीय भागों पर 10 फीसदी से अधिक प्रकोप इसका आर्थिक कगार है। खेत के विभिन्न हिस्सों से 60 फूलों की जांच करने पर अगर इन में से रॉजेटेड फूल तथा सुंडी के द्वारा नुकसान किए गए 6 फूल मिलते हैं तो गुलाबी सुंडी की रोकथाम के लिए स्प्रे करें।
ये बरतें सावधानियां
- कीटनाशक का छिड़काव दोपहर 12 बजे से पहले या फिर शाम के समय ही करना चाहिए।
- एक ही कीटनाशक का छिड़काव बार-बार नहीं करना चाहिए।
- कीटनाशक के छिड़काव के बाद 24 घंटों के भीतर अगर वर्षा आ जाती है तो, कीटनाशक का छिड़काव दोबारा करें।
- कीटनाशक का छिड़काव करते समय सावधानी रखें। जैसे छिड़काव करते समय शरीर, चेहरे और आंखों का ढकना, हवा के विपरीत छिड़काव नहीं करना, आदि।
- कपास की बीजाई के 90-120 दिन के बीच में अंडा परजीवी ट्राईकोग्रामा बैक्टीरिया के 60,000 अंडे प्रति एकड़ के हिसाब से छोड़े।
- जिस खेत में गुलाबी सुंडी का प्रकोप हुआ हो, उस कपास को अलग चुगाई करें व अलग ही भंडारित करें।
- कपास की चुनाई व छंटियों/लकड़ियों की कटाई आर्थिक लाभ के हिसाब से जितना जल्दी हो सकें कर लेनी चाहिए।
- कपास की अंतिम चुगाई के बाद खेत में बचे अधखुले व खराब टिंडों को नष्ट करने के लिए खेत में भेड़, बकरी आदि जानवरों को चरने दें।
- कपास की लकड़ियों को छाया में खेत में ही इकट्ठा न करें। कपास की लकड़ियों को जमीन पर पीटे ताकि इनमें छिपे गुलाबी सुंडी के लार्वा नीचे गिर जाए और छंटियों को जमीन पर लंबवत खड़ा करें।