सिरसा। घुटने का गलत ऑपरेशन करने के आरोप लगा अस्पताल में रोष प्रदर्शन करने और ग्रामीणों के खिलाफ केस दर्ज होने के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। मंगलवार को डबवाली रोड के लाल बत्ती चौक स्थित गिल अस्पताल के समक्ष दिनभर ग्रामीणों और आईएमए के सदस्यों में तनावपूर्ण माहौल बना रहा। दिनभर दोनों पक्षों ने एक दूसरे के खिलाफ जमकर नारेेबाजी की। वहीं दोनों पक्षों के बीच पुलिस बल दिनभर दीवार बनकर तैनात रहा है। जब दोनों पक्षों में सहमति नहीं बनी तो ग्रामीणों ने अस्पताल के समक्ष ही धरना देकर नारेबाजी करनी शुरू कर दी।
बता दें कि ऑपरेशन के बाद भी जब खिलाड़ी का घुटना ठीक नहीं हुआ तो बीते शनिवार को वैदवाला के ग्रामीणों ने गिल अस्पताल में पहुंचकर रोष प्रकट किया था। जिसके बाद अस्पताल की महिला डॉक्टर प्रवीण गिल ने महिला थाने में छेड़छाड़ की शिकायत देकर भूपेंद्र सिंह वैदवाला, जगतार सिंह सहित 40 अन्य लोगों पर केस दर्ज करवा दिया। डॉक्टर का कहना है कि आरोपियों ने 15 जनवरी को अस्पताल में हंगामा करने और बदनाम करने की नियत से छेड़छाड़ की थी।
जब इस बारे में ग्रामीणों को जानकारी लगी तो अस्पताल का घेराव करने की चेतावनी दे दी। ग्रामीण भूपेंद्र सिंह वैदवाला ने इस बारे में सोशल मीडिया पर पोस्ट डाल दी कि वे रोष जताते हुए अस्पताल का घेराव करेंगे। इसकी सूचना जब निजी अस्पताल संचालक को लगी तो उन्होंने मामले की जानकारी आईएमए सदस्यों को दी। जिसके बाद आईएमए के भी सभी सदस्य अस्पताल के बाहर एकत्र हो गए। वहीं माहौल बिगड़ता देख शहर थाने की ओर से पुलिस बल को मौके पर तैनात कर दिया।
उधर करीब साढ़े 12 बजे किसान ट्रैक्टर ट्रॉली पर सवार होकर रोष प्रकट करते हुए अस्पताल के समक्ष पहुंच गए। दोनों ही पक्ष अस्पताल के बाहर आमने सामने हो गए। इस बीच शहर थाना प्रभारी विक्रम सिंह ग्रामीणों को समझाते हुए दिखाई दिए लेकिन उन्होंने उनकी एक नहीं मानी। तीन घंटे तक विरोध प्रदर्शन के बीच दोनों पक्षों में सहमति नहीं बन पाई। खबर लिखे जाने तक ग्रामीणों ने अस्पताल के बाहर ही धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया था।
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ग्रामीण बोले महिला डॉक्टर का सहारा लेकर झूठा मुकदमा दर्ज करवाया
ग्रामीण भूपेंद्र सिंह वैदवाला ने कहा कि नवंबर में उनके गांव के कबड्डी खिलाड़ी जगतार सिंह ने गिल अस्पताल में घुटने का ऑपरेशन करवाया था, लेकिन दो माह बाद भी ठीक नहीं हो पाया। दर्द से राहत पाने के लिए वह इंजेक्शन लगवाता रहा। इसके बाद अब उसकी टांग सूखना शुरू हो चुकी है। खिलाड़ी के घुटने का दोबारा से ऑपरेशन करवाने की मांग को लेकर वह 15 जनवरी को अस्पताल डॉक्टरों से मिलने के लिए पहुंचे। उनकी डॉक्टरों के साथ बैठक हुई।
डॉक्टरों ने भी ऑपरेशन दोबारा से करवाने पर सहमति जताई। लेकिन बीते दिन डॉक्टरों ने महिला डॉक्टर का सहारा लेते हुए उनके साथियों के खिलाफ अभद्र भाषा का उपयोग करने और अस्पताल को बदनाम करने के का झूठा आरोप लगाकर पुलिस में शिकायत दे दी। हालांकि उनका समझौता पुलिस अधिकारियों ने करवाया था। जिसके बाद उन्होंने रोष प्रदर्शन बंद कर दिया था।
डॉक्टर बोले- केस नहीं लेंगे वापस, पीड़ित का दोबारा से इलाज करवाने को तैयार
वहीं आईएमए के जिला प्रधान डॉ. आशीष खुराना ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि करीब एक माह पूर्व युवक अस्पताल में अपने घुटने का ऑपरेशन करवाने के लिए आया था। ऑपरेशन के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। कुछ दिन पूर्व उसे बुखार हुआ। जिसके बाद उसे घुटने में हल्का दर्द महसूस हुआ। इस पर वह गिल अस्पताल के संचालक कुलविंद्र गिल से मिला।
उन्होंने उसे उपचार का भरोसा दिलवाया। लेकिन सोमवार को युवक कुछ अन्य लोगों को लेकर अस्पताल में आया और महिला चिकित्सक के साथ बदसलूकी की। गिल ने दावा किया ग्रामीणों ने उनसे 5 लाख रुपये की डिमांड भी की थी। वहीं उन्होंने कहा कि वे युवक का उपचार करवाने के लिए तैयार है लेकिन वह पुलिस को दी गई शिकायत वापस नहीं लेंगे। वे पीड़ित का किसी भी अन्य संस्थान में अपने स्तर पर इलाज करवाने को तैयार हैं। इस मौके पर आईएमए के प्रदेश संरक्षक डॉ. वेद बैनीवाल आईएमए के पूर्व प्रधान डॉ. अशोक पारीक, डॉ. प्रवीन आदि उपस्थित रहे।