संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। छोटी दिवाली का पर्व शनिवार को जिलेभर में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। घरों में दीप जलाए गए और लोगों ने नरक चतुर्दशी परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना की। वहीं, दिवाली के मुख्य पर्व को लेकर शहर से लेकर गांवों तक तैयारियां जोरों पर रही।
सिरसा, रानियां, ऐलनाबाद, डबवाली और कालांवाली सहित जिले के विभिन्न क्षेत्रों में लोगों ने घरों की साफ-सफाई के बाद सजावट की। घरों के मुख्य द्वार पर बंदनवार लगाए गए तो कहीं रंग-बिरंगी बिजली की लड़ियों से मकानों को सजाया गया।
बाजारों में भी त्योहार की खरीदारी को लेकर दिनभर चहल-पहल बनी रही। दिवाली को लेकर बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में उत्साह दिखाई दिया। लोगों ने घरों में स्थापित मंदिरों की सफाई कर उन्हें पूजा के लिए तैयार किया।
मिट्टी और स्टील के मंदिरों को सजाने के साथ पूजा स्थलों को भी व्यवस्थित किया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों ने अपने पूजा स्थलों और आटड़ियों की साफ-सफाई कर त्योहार की तैयारियां पूरी की।
घरों में दीप जलाने और मां लक्ष्मी के स्वागत की तैयारी के बीच बाजारों में मिठाइयों, पूजन सामग्री और सजावटी सामान की खरीदारी भी जारी रही।
पंडितों के अनुसार, छोटी दिवाली को नरक चतुर्दशी, रूप चतुर्दशी और नरक चौदस के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने इसी दिन नरकासुर का वध कर हजारों बंदी महिलाओं को मुक्त कराया था।
इसी उपलक्ष्य में नरक चतुर्दशी का पर्व मनाया जाता है। इसके अगले दिन दिवाली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा कर घर-परिवार में सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
आज शाम 5:54 से 7:48 बजे तक लक्ष्मी पूजन का मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य पंडित नीरज भारद्वाज ने बताया कि दिवाली का मुख्य पर्व रविवार 8 नवंबर को मनाया जाएगा। कार्तिक अमावस्या तिथि के प्रदोष काल में होने के कारण दिवाली रविवार को ही मनाई जाएगी। मां लक्ष्मी और भगवान गणेश के पूजन के लिए शाम 5:54 बजे से रात 7:48 बजे तक का समय विशेष शुभ रहेगा। वृषभ स्थिर लग्न में पूजा करना फलदायी माना जाता है। प्रदोष काल शाम 5:30 बजे से रात 8:09 बजे तक रहेगा। उन्होंने बताया कि अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह 10:51 बजे शुरू होकर 9 नवंबर को सुबह 11:32 बजे तक रहेगी। मान्यता के अनुसार भगवान श्रीराम के 14 वर्ष का वनवास पूरा कर अयोध्या लौटने पर नगरवासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। तभी से दिवाली पर घरों में दीप प्रज्ज्वलित करने की परंपरा चली आ रही है। इस दिन लोग मां लक्ष्मी की पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं।
9 को सोमवती अमावस्या, पितरों का पूजन, 10 को गोवर्धन पूजा
पंडित नीरज ने बताया कि 9 नवंबर को सोमवती अमावस्या का संयोग रहेगा। इस दिन स्नान, दान, पितरों के तर्पण और भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है। श्रद्धालु पितरों की शांति के लिए तर्पण और पूजन करेंगे। इसके अगले दिन 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाएगा। गोवर्धन पूजा के अवसर पर घरों में गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाकर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है। इसके साथ ही अन्नकूट का भोग लगाया जाता है। गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6:40 बजे से 8:50 बजे तक रहेगा। वहीं, गोधूलि मुहूर्त शाम 5:28 बजे से 7:15 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार गोवर्धन पूजा प्रकृति, गोवंश और अन्न के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का पर्व है।
भाई-बहन के अटूट प्रेम का त्योहार भैयादूज
11 को पंडित रामराज कौशिक ने बताया कि 11 नवंबर को भैयादूज का पर्व मनाया जाएगा। इसे यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी आयु, सुख-समृद्धि और खुशहाल जीवन की कामना करती हैं। भाई भी बहनों को उपहार देकर उनके प्रति स्नेह प्रकट करते हैं।
भैयादूज पर तिलक लगाने का शुभ समय
सुबह 6:45 बजे से 9:26 बजे तक रहेगा। इसके अलावा, सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:06 बजे तक भी तिलक किया जा सकेगा। भैयादूज के साथ ही पांच दिवसीय दीपोत्सव पर्व शृंखला का समापन होगा।
ऐसे करें मां लक्ष्मी और गणेश की पूजा
ज्योतिषाचार्य रामराज कौशिक के अनुसार, दिवाली के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के मंदिर और पूजा स्थल की साफ-सफाई कर मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और मां सरस्वती की प्रतिमाएं स्थापित करें। शाम को शुभ मुहूर्त में पूजा के लिए चौकी सजाकर उस पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं। चौकी पर भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की प्रतिमाएं स्थापित कर विधि-विधान से पूजन करें। पूजा की शुरुआत भगवान गणेश के पूजन से करें। इसके बाद मां लक्ष्मी को कमल का फूल, अक्षत, रोली, चंदन, धूप, दीप, फल और मिठाई अर्पित करें। मां सरस्वती और कुबेर देव का भी स्मरण करें। पूजा के दौरान श्रीसूक्त, लक्ष्मी चालीसा और गणेश स्तुति का पाठ करना शुभ माना जाता है। पूजन के अंत में परिवार के सभी सदस्यों के साथ आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
मां लक्ष्मी और गणेश के विशेष मंत्र मां लक्ष्मी मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः॥ भगवान गणेश मंत्र ॐ गं गणपतये नमः॥
महालक्ष्मी गायत्री मंत्र
ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे
विष्णुपत्न्यै च धीमहि।
तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्॥
दिवाली पर इन बातों का रखें ध्यान
घर, दुकान और प्रतिष्ठान की अच्छी तरह साफ-सफाई करें।
मुख्य द्वार पर रंगोली बनाएं और स्वस्तिक जैसे शुभ चिह्न अंकित करें।
घर के मंदिर और मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं।
मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए घर को स्वच्छ और प्रकाशमय रखें।
जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और मिठाई का दान करें।
परिवार के बुजुर्गों का आशीर्वाद लें और आपसी प्रेम व सद्भाव बढ़ाएं।
मिट्टी के दीपक जलाकर पर्यावरण के अनुकूल दिवाली मनाएं।